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मेट्रो मजेंटा लाइन के उद्घाटन के बहाने कम किया गया दिल्ली सरकार का कद

इसे राजनीतिक लाभ लेने की होड़ कहें या दिल्ली सरकार की भूमिका को कम करना कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को समारोह में बुलाया तक नहीं गया है, जबकि इस लाइन के नौ में से सात स्टेशन दिल्ली में हैं और परियोजना की आर्थिक भागीदारी में दिल्ली व केंद्र बराबर के हिस्सेदार हैं।

Author नई दिल्ली | December 25, 2017 3:54 AM
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (File Photo)

प्रधानमंत्री कार्यालय, शहरी विकास मंत्रालय और उत्तर प्रदेश सरकार ने मिलकर दिल्ली मेट्रो की मजेंटा लाइन के उद्घाटन समारोह को हाईजैक कर लिया है। इसे राजनीतिक लाभ लेने की होड़ कहें या दिल्ली सरकार की भूमिका को कम करना कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को समारोह में बुलाया तक नहीं गया है, जबकि इस लाइन के नौ में से सात स्टेशन दिल्ली में हैं और परियोजना की आर्थिक भागीदारी में दिल्ली व केंद्र बराबर के हिस्सेदार हैं।  दिल्ली मेट्रो के इतिहास में यह पहला मौका है जबकि दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) को ही इसके मुख्य कार्यक्रम के आयोजन से अलग-थलग कर दिया गया है। इस घटना से राजनीतिक गलियारों में जहां विवाद शुरू हो गया है वहीं यह बदले राजनीतिक परिदृश्य की ओर भी इशारा करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पार्टी के जिस वरिष्ठ नेता के जन्मदिन के मौके पर यह उद्घाटन करने वाले हैं, उनके ही समरसता के विचार तक इस समारोह में सम्मान तक नहीं किया जा रहा।
प्रधानमंत्री मोदी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर सोमवार को मजेंटा लाइन के बॉटनिकल गार्डन-कालकाजी सेक्शन का उद्घाटन करेंगे। यह लाइन भले ही दिल्ली और के बीच फैली है, लेकिन इसके केवल दो स्टेशन (बॉटनिकल गार्डन व ओखला बर्ड सैंक्चुरी) ही नोएडा में पड़ते हैं, बाकी के सात स्टेशन दिल्ली के हिस्से में आते हैं। इसके बावजूद उद्घाटन समारोह में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नहीं बुलाया गया। इतना ही नहीं, इस आयोजन से डीएमआरसी को भी दूर रखा गया है। सारा कार्यक्रम पीएमओ, यूपी सरकार और नोएडा प्राधिकरण ने तय किया है।

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साल 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जब दिल्ली मेट्रो का उद्घाटन किया था तब दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी और मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सहित पूरा विपक्ष उद्घाटन में मौजूद था। प्रधानमंत्री वाजपेयी ने तब एक आम आदमी की तरह स्टेशन पर 200 रुपए का मेट्रो कार्ड खरीदा था और मेट्रो कार्ड से यात्रा करके इसका उद्घाटन किया था। उनके साथ मौजूद सभी अतिथियों ने भी कार्ड खरीद कर उद्घाटन वाली टेÑन में सफर किया था और बिना शोर मचाए संदेश दिया था कि मेट्रो पक्ष-विपक्ष सबकी है, हम सब आम आदमी की तरह भुगतान करके ही मेट्रो में सफर करेंगे। इसके बाद उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने भी दिल्ली की कांग्रेस सरकार की मौजूदगी में मेट्रो के विस्तारित हिस्से का उद्घाटन किया। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने भी मेट्रो लाइन का उद्घाटन किया। केंद्र में कांग्रेस की सरकार आने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व केंद्रीय शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी समेत कई बड़े नेताओं ने अलग-अलग समय में मेट्रो की विभिन्न लाइनों या खंडों का उद्घाटन किया, लेकिन उद्घाटन समारोह में पक्ष-विपक्ष के सभी लोगों को बुलाया गया।

इतना ही नहीं, अब से पहले मेट्रो से जुड़े सभी कार्यक्रम डीएमआरसी खुद आयोजित करता रहा है, लेकिन इस बार उसे ही पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। यह पहला मौका है जब न केवल दिल्ली सरकार को बल्कि डीएमआरसी को भी कार्यक्रम से बाहर रखा गया है। इसे डीएमआरसी की स्वायत्तता में दखल के तौर पर भी देखा जा रहा है। वजह जो भी हो, लेकिन अधिकारी इस पर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।

 

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