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यूपी: पहली बार डिजाइन पाठ्यक्रम को मान्यता दी एआइसीटीई ने

उद्योग और बाजार की मांग के अनुरूप औद्योगिक डिजाइनिंग एक बड़ा रोजगार उन्मुख क्षेत्र बनने जा रहा है। परंपरागत डिजाइनिंग, जिसे कपड़े, फैशन या घर के अंदर की साज सज्जा इंटीरियर डिजाइनिंग से जोड़कर देखा जाता रहा है, उसमें अब बड़ा बदलाव आ गया है।

Author नोएडा। | July 4, 2018 6:18 AM
एकेटीयू के नोएडा कैंपस में यूपी इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन में बैचलर ऑफ डिजाइन और मास्टर ऑफ डिजाइन के पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं।

उद्योग और बाजार की मांग के अनुरूप औद्योगिक डिजाइनिंग एक बड़ा रोजगार उन्मुख क्षेत्र बनने जा रहा है। परंपरागत डिजाइनिंग, जिसे कपड़े, फैशन या घर के अंदर की साज सज्जा इंटीरियर डिजाइनिंग से जोड़कर देखा जाता रहा है, उसमें अब बड़ा बदलाव आ गया है। मोबाइल, ऑटोमोबाइल, लैपटॉप, एलसीडी से जुड़ी कंपनियों में डिजाइन को सबसे ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। इसी को ध्यान में रखकर अब सरकारी संस्थानों ने भी डिजाइन क्षेत्र में उच्च स्तरीय शिक्षण पाठ्यक्रम संचालित करने की पहल की है। इस कड़ी में सेक्टर-62 स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से मान्यता प्राप्त डिजाइन पाठ्यक्रम संचालित करने वाला देश का पहला विश्वविद्यालय बन गया है। एआईसीटीई ने देश में पहली बार किसी डिजाइन संस्थान को मान्यता दी है।

एकेटीयू के नोएडा कैंपस में यूपी इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन में बैचलर ऑफ डिजाइन और मास्टर ऑफ डिजाइन के पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। एकेटीयू के अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा वैश्विक परिवेश में डिजाइनिंग क्षेत्र इतना व्यापक हो गया है कि किसी उद्योग या उत्पाद तक इसे सीमित नहीं रखा जा सकता है। फैशन डिजाइनिंग, इंटीरियर डिजाइनिंग जैसे पाठ्यक्रम काफी पहले से संचालित हो रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में मोबाइल, गेम्स, मोटरसाइकिल, कार, लैपटॉप समेत तमाम तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के डिजाइन उत्पाद की सफलता या विफलता का मानक बन गए हैं। उत्पादों के अलावा मोबाइल ऐप्लीकेशन में भी डिजाइनिंग की बहुत बड़ी मांग है। विजुअल कम्युनिकेशन के क्षेत्र में डिजाइनिंग को सबसे ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।

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यूजर इंटरफेस/यूजर एक्सपीरिएंस के आधार पर मोबाइल ऐप और गेम्स (ऑनलाइन गेम्स) के डिजाइन में दिन-ब-दिन बदलाव हो रहे हैं। उपभोक्ता से मिलने वाले निष्कर्ष (फीडबैक) के आधार पर देशी और विदेशी कंपनियों में नए डिजाइन की लगातार मांग बढ़ रही है। यूपी इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन में स्नातक पाठ्यक्रम में 40 और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में 18 सीट हैं। बैचलर ऑफ डिजाइन 4 साल का पाठ्यक्रम है जबकि मास्टर ऑफ डिजाइन 2 साल का है। हालांकि आइआइटी मुंबई और आइआइटी गुवाहाटी परिसर में डिजाइन के बैचलर पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन भी कला और क्राफ्ट के क्षेत्र में डिजाइन पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है।

यूपी समेत देश की कई निजी संस्थान और विश्वविद्यालयों में भी डिजाइन से संबंधित पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। इससे इतर केवल औद्योगिक उत्पादों की डिजाइन की विशेषज्ञता वाले किसी पाठ्यक्रम को एआइसीटीई ने मान्यता प्रदान की है। परंपरागत इंजीनियरिंग या मास्टर डिग्री के मुकाबले डिजाइन पाठ्यक्रम प्रायोगिक प्रशिक्षण पर केंद्रित है। जहां विद्यार्थियों को विशेषज्ञों के साथ मॉडल या स्टेशन पर काम करना होगा। इसी वजह से इन पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या कम रखी गई है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार नोएडा, ग्रेटर नोएडा इलाका मोबाइल उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। देश में बनने वाले करीब आधे मोबाइल इन्हीं इलाकों में लगी कंपनियों में बनेंगे। चीन की कई मोबाइल बनाने वाली कंपनियों ने डिजाइनिंग के लिए अलग से टीम रखी हुई है। जिसके चलते औद्योगिक डिजाइनिंग के जानकारों के लिए रोजगार की असीम संभावनाएं हैं।

कुछ तथ्य

  • औद्योगिक डिजाइनिंग के क्षेत्र में बना उत्तर प्रदेश का पहला संस्थान ‘उत्तर प्रदेश इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन’
  • एकेटीयू के नोएडा कैंपस में बैचलर और मास्टर पाठ्यक्रम होंगे संचालित जिनमें क्रमश: 40 और 18 सीटें हैं
  • मोबाइल, ऑनलाइन गेम्स, कार, मोटर साइकिल, लैपटॉप समेत ऐप डिजाइनिंग के क्षेत्र में हैं रोजगार की असीम संभावनाएं

यूपी सरकार की पहल पर शुरू हुए उच्चस्तरीय डिजाइन संस्थान को एआइसीटीई ने मान्यता प्रदान की है। डिजाइन के क्षेत्र में एआइसीटीई ने देश में पहली बार किसी संस्थानों को मान्यता दी है। -वीरेंदर पाठक, निदेशक यूपी इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन नोएडा

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