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2009 नोएडा सामूहिक बलात्कार: दिल्ली की अदालत ने नौ लोगों को किया बरी

विशेष न्यायाधीश शैल जैन ने आरोपियों के खिलाफ साक्ष्यों का अभाव होने की बात कहते हुए उन्हें बरी कर दिया।
Author नई दिल्ली | February 16, 2017 22:02 pm
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तिुतकरण के लिए किया गया है।

दिल्ली की एक अदालत ने 2009 में नोएडा के एक मॉल से पुरुष मित्र के साथ वापस लौट रही 24 वर्षीय एमबीए छात्रा के साथ हुए सामूहिक बलात्कार के मामले में गुरुवार (16 फरवरी) को नौ लोगों को बरी कर दिया। विशेष न्यायाधीश शैल जैन ने आरोपियों के खिलाफ साक्ष्यों का अभाव होने की बात कहते हुए उन्हें बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना पांच जनवरी 2009 की है। छात्रा अपने पुरुष मित्र के साथ नोएडा के ग्रेट इंडिया प्लेस मॉल से कार से वापस लौट रही थी। रास्ते में क्रिकेट मैच खेलकर लौट रहे 11 युवकों ने बैट का डर दिखाकर उनका वाहन रोक दिया। कार रोकने के बाद, सभी युवक भीतर आए और कार चलाकर गढ़ी चौखंडी गांव तक ले गए और बारी-बारी से छात्रा के साथ बलात्कार किया। महिला के मित्र ने नोएडा पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज करायी थी। इस मामले में पुष्पिन्दर उर्फ तूइयां, श्रीकांत, संजय, गौतम, सुधीर, लिटिल, ओमकार, पुष्पेन्द्र, शशिकांत, गोलू और एक किशोर आरोपी थे। सभी गढ़ी चौखंडी गांव के निवासी हैं। इनमें से आरोपी पुष्पिन्दर उर्फ तूइयां, की सुनवायी के दौरान मौत हो चुकी है।

उच्चतम न्यायालय के आदेश पर मामले की सुनवायी नोएडा अदालत से दिल्ली के तीस हजारी अदालत में स्थानांतरित कर दी गयी। पीड़िता के पुरुष मित्र ने अपनी जान को खतरा और मामला वापस लेने का दबाव पड़ने का हवाला देते हुए न्यायालय से ऐसा करने का अनुरोध किया था। आरोपियों में से एक के वकील प्रदीप शर्मा ने दावा किया कि उनके मुव्वकिल को झूठे मुकदमे में फंसाया गया है और उसके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। हादसे के बाद आरोपियों की ओर से कथित धमकियां मिलने के कारण पीडिता लंदन चली गयी पीड़िता ने अक्तूबर 2012 में अदालत से कहा था कि वह उसके साथ बलात्कार करने वाले अदालत में मौजूद सभी 10 आरोपियों को पहचानती है और दिखाए जाने पर 11वें व्यक्ति को भी पहचान लेगी। किशोर होने के कारण 11वें आरोपी को पहले अदालत में पेश नहीं किया गया था। उन्होंने बचाव पक्ष के वकील के इस आरोप का भी खंडन किया था कि उनके आरोप झूठे हैं।

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