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यूपी को सूखाग्रस्त, बुंदेलखंड को आपदाग्रस्त घोषित करे सपा सरकार: योगेंद्र यादव

योगेंद्र यादव ने आशंका जतायी कि उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से तथा बुंदेलखंड में सूखे की स्थिति अकाल में तब्दील हो सकती है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि वह प्रदेश..

Author लखनऊ | October 27, 2015 10:19 PM
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ योगेंद्र यादव। (पीटीआई फोटो)

आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता योगेंद्र यादव ने मंगलवार को आशंका जतायी कि उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से तथा बुंदेलखंड में सूखे की स्थिति अकाल में तब्दील हो सकती है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि वह प्रदेश को सूखाग्रस्त और बुंदेलखंड को विशेष ‘आपदाग्रस्त’ घोषित करे।

योगेंद्र ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘राष्ट्रव्यापी सूखे का केंद्र उत्तर प्रदेश है। इस साल यहां बहुत कम बारिश हुई। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड में जो हालात हैं, उन्हें देखकर लगा कि कहीं स्थिति अकाल में ना तब्दील हो जाए। वैसे जानवरों के लिए तो अकाल शुरू हो चुका है। जानवर या तो बेचे जा रहे हैं या लोग उन्हें खुला छोड दे रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘बुंदेलखंड में तो आपात स्थिति है। हम 28 तहसीलों के 200 गांवों में सर्वे कर रहे हैं और पता करने की कोशिश कर रहे हैं कि कहीं भुखमरी के हालात तो नहीं बन रहे हैं।’’

योगेंद्र ने कहा, ‘‘सूखा अदृश्य त्रासदी है। भूकंप आता है तो नजर आता है और उससे छोटे बड़े, अमीर गरीब सभी प्रभावित होते हैं। लेकिन अकाल दबे पांव आता है और सबसे पहले गरीब पर उसका प्रभाव पड़ता है।’’

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्य सूखा घोषित कर चुके हैं लेकिन उतर प्रदेश में इतनी भयावह स्थिति होने के बावजूद प्रदेश सरकार ने राज्य को सूखाग्रस्त नहीं घोषित किया है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आमंत्रण पर उनसे मुलाकात करने आये योगेंद्र ने कहा कि वह मुख्यमंत्री के समक्ष सूखे की बात मजबूती से उठाएंगे और अपने सुझाव भी रखेंगे। सुझावों में प्रदेश को सूखाग्रस्त और बुंदेलखंड को आपदाग्रस्त घोषित करना शामिल होगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अत्यंत संकटग्रस्त क्षेत्रों में बीपीएल, एपीएल और अंत्योदय कार्ड में भेद खत्म करके सबको एक समान कार्ड दे और उसी पर अनाज उपलब्ध कराये क्योंकि लोगों को अनाज की सख्त जरूरत है। साथ ही सूखा प्रभावित इलाकों के युवाओं को रोजगार के विकल्प मुहैया कराये। इन क्षेत्रों से युवाओं का बडे पैमाने पर पलायन हो रहा है।

योगेंद्र यादव ने कहा कि मनरेगा योजना सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को रोजगार देने के उद्देश्य से शुरू की गयी थी लेकिन दुर्भाग्य है कि इस योजना का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। मनरेगा योजना की कानूनी अड़चनें दूर कर इसे सुगम और सरल बनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि पेयजल की व्यवस्था, नहरों की सफाई, खराब पड़े हैंडपंप सही कराने जैसे कार्य भी सरकार को कराने चाहिए। ये कार्य आपदा राहत कोष से होने चाहिए।

योगेंद्र ने कहा कि किसानों का कम से कम इस साल का कर्ज सरकार माफ करे और उसके बाद जो कर्ज बचता है, उस पर ब्याज कम करे तथा उसकी अवधि नये सिरे से निर्धारित करे। मुआवजे की व्यवस्था को दोषपूर्ण बताते हुए योगेंद्र ने कहा कि इसका कार्यान्वयन को ‘बंटाधार’ है। गांव वालों को लेखपाल ‘विलेन’ (खलनायक) नजर आता है। ऐसी अवधारणा लोगों के मन में बैठी है। तकनीक के जरिए लेखपाल व्यवस्था खत्म की जानी चाहिए।

नयी राजनीतिक पार्टी बनाने या किसी अन्य दल में शामिल होने के बारे में किये गये सवाल पर योगेंद्र ने यह कहते हुए जवाब देने से इंकार किया कि वह अभी केवल सूखे पर बात करने आये हैं। इस बारे में यदि वह कुछ बोलते हैं, वही खबर बन जाएगी और सूखे की खबर दब जाएगी।

योगेंद्र यादव स्वराज अभियान के संस्थापक सदस्य हैं, जिसके तत्वावधान में आज उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस की और स्वराज अभियान से ही जुडे ‘जय किसान’ मुहिम के राष्ट्रीय संयोजक हैं। बाद में योगेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से उनके पांच कालिदास मार्ग स्थित सरकारी आवास पर मुलाकात की। दोनों ने सूखे और किसानों की अन्य समस्याओं पर चर्चा की।

बैठक के दौरान अखिलेश ने योगेंद्र को आश्वासन दिया कि उनकी सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव मदद करेगी। अखिलेश ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने उन्हें (योगेंद्र) आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार किसानों की समस्याओं के हल के लिए हरसंभव मदद करेगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं किसानों के मुद्दे के समाधान के लिए राज्य सरकार को सुझाव देने के लिए योगेंद्र जी का धन्यवाद करता हूं।’’

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