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शिवपाल खेमे में बस 5 लोग: परिवार के 9 सदस्‍य अखिलेश की तरफ, पर मुलायम का भाईप्रेम पड़ रहा भारी

साल 2012 में जब अखिलेश यादव को यूपी का सीएम बनाया गया तब भी रामगोपाल मुलायम के फैसले के समर्थन में थे लेकिन शिवपाल खिलाफ थे।
Author October 24, 2016 14:17 pm
समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव का परिवार (इलस्ट्रेशन-मनाली घोष)

उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव करीब 50 साल पहले विधायक का चुनाव जीता था। इन पांच दशकों में उनके परिवार के 17 सदस्य केंद्र या राज्य की राजनीति में उतर चुके हैं। भारतीय राजनीति में परिवारवाद कोई नई बात नहीं है लेकिन भारतीय मानकों से भी उत्तर प्रदेश के इस समाजवादी परिवार की टक्कर के आज बहुत ही कम राजनीतिक परिवार नजर आते हैं। खुद मुलायम सिंह के अलावा उनके भाई, भतीजे, भतीजी, बेटे, बहू और पोते सक्रिय राजनीति में हैं। राज्य में अगले साल विधान सभा चुनाव होने हैं और उससे पहले पहली बार मुलायम परिवार में दरार सबके सामने खुल कर आ गई है। मुलायम सिंह यादव के परिवार का एक धड़ा उनके बेटे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ है तो दूसरा धड़ा उनके भाई और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवगोपाल यादव के साथ। आइए मुलायम के राजनीतिक सफर पर एक नजर डालने के बाद देखते हैं उनके परिवार में कौन किसके साथ है।

मुलायम सिंह यादव, 77

राजनीति विज्ञान से एमए

सांसद, आज़मगढ़, यूपी

संपत्तिः 15,96,71,543 रुपये (पत्नी की संपत्ति शामिल) 2014 में चुनाव आयोग को दिए हलफनामे के अनुसार

1967 में इटावा की जसवंत नगर सीट से सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर विधान चुनाव लड़े और जीते। 1977 में जनता पार्टी की सरकार में केंद्रीय सहकारी मंत्री बनने से पहले वो तीन बार विधायक रह चुके थे।1980 के चुनाव में जनता पार्टी के कई नेताओं की तरह हार का सामना करना पड़ा तो यूपी विधान परिषद के सदस्य बने। तीन बार (1989-91, 1993-1995 और 2003-07) यूपी के मुख्यमंत्री रहे। अब तक आठ बार एमएलए रह चुके हैं और अभी पांचवी बार एमपी हैं। पहली बार सीएम जनता दल के नेता तौर पर बने थे। जनता दल के विघटन के बाद 1992 में बेनीप्रसाद वर्मा और रेवती रमण सिंह जैसे साथियों के साथ मिलकर समाजवादी पार्टी की स्थापना की।

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अखिलेश की टीम

1- अखिलेश यादव, 43
मुलायम सिंह यादव की पहली पत्नी स्वर्गीय मालती देवी के पुत्र, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
सिविल इंजीनियर,
एमएलसी
संपत्तिः 7,21,51,310 रुपये (पत्नी की संपत्ति शामिल), मार्च 2012 के हलफनामे के अनुसार

अखिलेश ने मैसूर विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद ऑस्ट्रेलिया से एमबीए किया। राजनीति में साल 2000 में कन्नौज संसदीय उप-चुनाव जीत कर प्रवेश किया। अखिलेश ने इसी सीट से 2004 और 2009 में भी लोक सभा चुनाव जीता। साल 2012 में जब समाजवादी पार्टी को यूपी में बहुमत मिला तो मुलायम ने अखिलेश को सीएम बनाने का फैसला किया। मुलायम के चचेरे भाई रामगोपाल यादव ने अखिलेश यादव को सीएम बनाए जाने का समर्थन किया, वहीं शिवपाल ने इस फैसले पर आपत्ति जताई।

2- डिंपल यादव, 38
अखिलेश यादव की पत्नी
बीकॉम
सांसद, कन्नौज
संपत्तिः 28,05,16,415 रुपये (पति की संपत्ति शामिल), 2014 के चुनावी हलफनामे के अनुसार

सैन्य अधिकारी की बेटी डिंपल की अखिलेश से 1999 में शादी हुई। साल 2009 में वो फिरोजाबाद संसदीय उप-चुनाव से प्रत्याशी बनाई गईं लेकिन वो कांग्रेस के राज बब्बर से चुनाव हार गईं। अखिलेश के सीएम बनने के बाद जब कन्नौज लोक सभा सीट खाली हुई तो डिंपल उसके उप-चुनाव में जीतकर संसद पहुंची। 2014 के लोक सभा चुनाव में भी वो कन्नौज सीट से जीतने में कामयाब रहीं। जब वो लखनऊ में रहती हैं तो अपनी दो बेटियों और बेटे के साथ वक्त बिताती हैं. उनका नाम शायद ही कभी विवाद में आया हो। हालांकि मुलायम परिवार के खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में डिंपल भी आरोपी थीं। अब वो मामला बंद हो चुका है।

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3- रामगोपाल यादव, 70
मुलायम के चचेरे भाई
सपा महासचिव
पीएचडी
राज्य सभा सांसद
संपत्ति: 10,49,03,998 रुपये, 2014 के चुनावी हलफनामे के अनुसार

रामगोपाल ने इटावा के बसरेहर ब्लॉक प्रमुख के तौर पर 1988 में अपना राजनीतिक करियर शुरू किया था। चार साल के अंदर सपा ने उन्हें राज्य सभा भेज दिया। वो अब तक केवल एक बार 2004 में लोक सभा चुनाव जीते हैं। 1996 से पार्टी के महासचिव रामगोपाल का संबंध दूसरी पार्टियों से भी बेहतर माना जाता है। पार्टी के अंदर ‘प्रोफेसर साहब’ कहे जाने वाले रामगोपाल को मुलायम के सबसे भरोसेमंद सलाहकारों में माना जाता है। रामगोपाल अमर सिंह को राज्य सभा भेजने के खिलाफ थे। रामगोपाल के तीन बेटे थे जिनमें से एक बेटे का निधन हो चुका है। उनकी एक बेटी भी है।

4- अक्षय यादव, 29
रामगोपाल के छोटे बेटे
बीबीए
सांसद, फिरोजबाद
संपत्तिः 10,08,83,304 रुपये (पत्नी की संपत्ति शामिल), 2014 के चुनावी हलफनामे के अनुसार
2014 में फिरोजबाद लोक सभा सीट से अक्षय को टिकट दिए जाने को लेकर रामगोपाल और शिवगोपाल में तनातनी हो गई थी लेकिन वो आम तौर पर पार्टी की राजनीति में ज्यादा दखल नहीं देते। अक्षय इटावा या मैनपुरी भी कम ही जाते हैं। वो अपना ज्यादातर समय दिल्ली में बिताते हैं। ताजा विवाद में बस एक बार परिदृश्य में आए जब उनके चचेरे भाई अरविंद सिंह को पार्टी से निकाल दिया गया। अक्षय ने कहा कि किसी के खिलाफ लगे आरोपों की पुष्टि करने से पहले उस पर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।

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5- धर्मेंद्र यादव, 38
मुलायम के भाई अभय राम के बेटे
राजनीति विज्ञान से एमए
सांसद, बदायूं
संपत्तिः 14,99,05,46 रुपये (पत्नी की संपत्ति शामिल), 2014 के चुनावी हलफनामे के अनुसार

धर्मेंद्र के पिता अभय राम कभी राजनीति में नहीं रहे लेकिन वो दूसरी बार बदायूं से सांसद हैं। वो सैफई महोत्सव के प्रमुख आयोजक हैं। अमर सिंह के पार्टी के निकाले जाने के बाद उन्होंने इस कार्यक्रम को पहले की तरह जारी रखने का जिम्मा उटाया था। सपा के सत्ता से बाहर होने पर भी सैफई महोत्सव सफलता पूर्वक कराकर उन्होंने अपनी धाक जमाई। दिल्ली और बदायूं में बराबर समय देने वाले धर्मेंद्र संसद में नियमित उपस्थित रहते हैं। संसद में उनकी हाजिरी 94 प्रतिशत है।

6- संध्या यादव, 38
मुलायम की भतीजी
जिला पंचायत चैयरमैन, मैनपुरी
संपत्तिः उपलब्ध नहीं

धर्मेंद्र की जुड़वा बहन संध्या की शादी सपा की पूर्व विधायक उर्मिला यादव के बेटे से हुई है। वो राजनीति में इसी साल आई हैं। फिलहाल वो घर से ही पार्टी का कामकाज देखती हैं।

7- तेज प्रताप यादव, 27
मुलायम का चचेरा-पोता, राजद प्रमुख लालू यादव का दामाद
एमबीए
सांसद, मैनपुरी
संपत्तिः Rs 42,55,56,96 रुपये, 2014 के चुनावी हलफनामे के अनुसार

तेज प्रताप ने ऑस्ट्रेलिया के लीड्स यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है। 2014 के मैनपुरी उप-चुनाव में उतरने और जीत हासिल करने से पहले घर पर रहकर अभय राम की मदद करते थे। सांसद बनने के बाद तेज प्रताप अपना ज्यादातर समय दिल्ली में गुजारते हैं।

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8- मृदुला यादव
तेज प्रताप की मां
सैफई ब्लॉक प्रमुख (2015 से)
संपत्तिः उपलब्ध नहीं
मृदुला और तेज प्रताप का समाजवादी पार्टी में एक अहम पहचान ये भी है कि सैफई महोत्सव मृदुला के स्वर्गीय पति और तेज प्रताप के पिता रनवीर को समर्पित है। मृदुला पहले सैफई में अपने पैतृक घर पर रहती थीं। तेज प्रताप के सांसद बनने के बाद वो ज्यादातर समय दिल्ली में रहती हैं।

9- अरविंद सिंह
रामगोपाल के भतीजे, करहल (मैनपुरी) के पूर्व ब्लॉक प्रमुख
राजनीति विज्ञान से एमए
एमएलसी
संपत्तिः चुनाव आयोग की वेबसाइट पर हलफनामा उपलब्ध नहीं

रामगोपाल की बहन के बेटे हैं। दो महीने पहले ही एमएलसी बने हैं. सपा के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी संभालने के बाद शिवपाल ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से निकाल दिया। अरविंद ने खुद पर लगे आरोपों से इनकार किया है।

10- बिल्लू यादव
रामगोपाल के भतीजे
परास्नातक, ब्लॉक प्रमुख, करहल (मैनपुरी)
संपत्तिः ब्योरा उपलब्ध नहीं
अरविंद के भाई हैं और पिछले साल उनकी जगह ब्लॉक प्रमुख बने। वो पारिवारिक कारोबार में अपने भाई की मदद करते हैं।

भाग-2 में पढ़ें: भतीजे अखिलेश से ”तनातनी” में परिवार का बहुमत नहीं है शिवपाल के पास, मुलायम की दूसरी पत्‍नी जरूर हैं साथ

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  1. M
    Mohit Rajput
    Sep 26, 2016 at 8:56 pm
    कमोबेश कुछ वैसी ही जिम्मेदारी और जवाबदेही आज के दौर में, मै आप लोगों की समझता हूँ। जहाँ तक ऊपर लिखे गए लेख का सवाल है तो मै समझता हूँ इसमें कुछ त्रुटियां हुई है।1) उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव (।/ने/,) करीब 50 साल पहले विधायक का चुनाव जीता था।2) पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष 'शिवगोपाल यादव' जोकि शिवपाल सिहं यादव है। दो जगह3) मृदुला यादव : मृदुला और तेज प्रताप 'का' (की) समाजवादी पार्टी में एक अहम पहचान ये भी है...
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    Reply
    1. M
      Mohit Rajput
      Sep 26, 2016 at 8:03 pm
      पत्रकारिता के क्षेत्र मे शुरुआत से ही एक्सप्रेस ग्रूप की अपनी साख रही है। यह विगत काल में इस संस्थान से जुड़ी विियों के अथक प्रयासों का परिणाम ही है जो इस संस्थान को अपनें प्रतिद्वन्द्वी से अलग श्रेणी में लाकर खड़ा करती है। कहीं न कहीं यह छवि आज भी जनमानस के बीच में बनाए हुए है। लेकिन जिस प्रकार एक पिता जब अपनी विरासत अपने पुत्र को सौपता है, तो यह उस पुत्र का दायित्व बनता है कि वह उस विरासत को निष्ठापूर्वक संभाले और हो सके तो उसे सर्वोच्च शिखर पर स्थाप्त करे।
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      Reply
      1. Sidheswar Misra
        Sep 27, 2016 at 10:00 am
        जब से नए संपादक आये है भारद्वाज जी , रागदरबारी गाये है
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