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VIDEO: बोले योगी आदित्‍यनाथ- अगर अदालतें फैसला नहीं कर सकतीं तो बताएं, 24 घंटे में सुलझा लेंगे राम मंदिर मुद्दा

तुष्टिकरण की राजनीति पर विपक्षी दलों पर कटाक्ष करते हुए योगी आदित्य नाथ ने कहा, 'अगर विवाद सुलझ गया, तीन तलाक प्रतिबंध लागू है, तुष्टिकरण की राजनीति का हमेशा के लिए अंत हो जाएगा।।'

Author January 27, 2019 11:20 AM
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ। (इंडियन एक्सप्रेस फोटो)

सुप्रीम कोर्ट को विवादास्पद राम मंदिर विवाद पर अपना फैसला जल्द देना चाहिए, अन्यथा उत्तर प्रदेश सरकार इसे 24 घंटे में हल करेगी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने दावा किया है कि ‘न्यायालय राम मंदिर मुद्दे का फैसला जल्दी करे और नहीं कर सकता तो केवल हमें सौंप दे, मैं कह सकता हूं कि चौबीस घंटे के भीतर राम जन्मभूमि से संबंधित विवाद का समाधान कर देंगे।’ इंडिया टीवी के कार्यक्रम में नजर आए सीएम योगी ने कहा कि राम जन्म भूमि के मुद्दे पर गैर अनावश्यक देरी हो तो यह जनता के धैर्य के साथ उनके विश्वास के सामने भी संकट खड़ा करता है। उन्होंने कहा, ‘यदि अनावश्यक देरी होती है, तो संस्थान लोगों का भरोसा खो सकते हैं। यह अब तक एक संकट पैदा कर रहा है क्योंकि लोगों का धैर्य और विश्वास चिंतित है। तुष्टिकरण की राजनीति पर विपक्षी दलों पर कटाक्ष करते हुए योगी आदित्य नाथ ने कहा, ‘अगर विवाद सुलझ गया, तीन तलाक प्रतिबंध लागू है, तुष्टिकरण की राजनीति का हमेशा के लिए अंत हो जाएगा।।’

जानना चाहिए कि इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह चुके हैं कि विवादित भूमि का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और इसे पूरा होने दिया जाए। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि कोर्ट का इसपर जो भी फैसला आता है। इसके बाद जहां भी सरकार की जिम्मेदारी शुरू होती है, उनकी सरकार सभी तरह के प्रयास करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को कानून के अनुसार चलने दिया जाना चाहिए। इसे राजनीतिक दृष्टि से नहीं मापा जाना चाहिए।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने संवदेनशील अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर सुनवाई के लिए शुक्रवार (25 जनवरी, 2019) को पांच सदस्यीय एक नई संविधान पीठ का गठन किया। पीठ का पुनर्गठन इसलिए किया गया क्योंकि मूल पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति यूयू ललित ने 10 जनवरी को मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने मामले की सुनवाई में आगे हिस्सा लेने से मना कर दिया था क्योंकि वह 1997 में एक संबंधित मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की तरफ से एक वकील के तौर पर पेश हुए थे।

नई पीठ में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर को शामिल किया गया है। न्यायमूर्ति एन वी रमण भी नई पीठ का हिस्सा नहीं हैं। वह 10 जनवरी को जिस पीठ ने मामले पर सुनवाई की थी, उसमें शामिल थे। नई पीठ में न्यायमूर्ति भूषण और न्यायमूर्ति नजीर नये सदस्य हैं।

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