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यूपी: दस साल से घाटे में किसान! प्रति किलो लागत है 6 रुपए, बिक रहा 3 से 4 के भाव में

एक अन्य किसान हरिहर सागर ने बताया, 'सरकारों में किसानों के लिए कोई विशेष मदद नहीं है। धान के रेट 1750 किए तो खाद के दाम बढ़ा दिए। पिछले साल के मुकाबले इस साल भी धान करीब 100 क्विंटल से सस्ता बिक रहा है जबकि हमारी लागत बढ़ रही है।' बता दें कि साल 2018 में किसानों ने सरकार के प्रति विरोध जताते हुए यूपी की सड़कों पर आलू फेंक दिए थे।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सरकार बनाने के चौबीस घंटों के भीतर कांग्रेस नीत राज्य सरकारों ने किसानों के कर्ज माफी की घोषणा कर दी। इसके बाद भाजपा नीत राज्यों सरकार में भी कर्ज माफी के लिए कुछ कदम उठाए गए। हालांकि अब सवाल उठने लगा है कि किसानों बिगड़ती आर्थिक हालत सुधारने के लिए क्या कर्जमाफी ही एक मात्र विकल्प बचा है? हालांकि उत्तर प्रदेश में किसानों से बातचीत के आधार पर यह रिपोर्ट भी सामने आती दिख रही है कि कर्ज माफी एक विकल्प जरूर है। यहां आलू की खेती करने वालों किसानों को पिछले दस सालों में खेती से लाभ तो नहीं मिला, बल्कि भारी नुकसान ही हुआ है। यूपी के बाराबंकी में किसानों ने एनडीटीवी के पत्रकार को बताया कि एक एकड़ आलू की खेती में 60 से 70 हजार रुपए खर्च हो रहे हैं।

किसान ने बताया, ‘एक किलो आलू उगाने में 5 से 6 रुपए की लागत आती है।’ मंडी में आलू के रेट पर किसान ने बताया, ‘मंडी में आलू का रेट तय नहीं है। कभी 4 रुपए तो कभी 5, 8, 10 और 12 रुपए किलो भी बिकता है। आलू अगर 6 रुपए प्रपि किलो से कम बिकेगा तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।’ पिछले दस साल की आलू ब्रिकी पर उन्होंने बताया, ‘किसान का आलू इस दौरान तीन से चार रुपए के हिसाब से ही बिका है। एक साल आलू दस रुपए किलो बिकता है दूसरे इसकी कीमत महज दो रुपए किलो रह जाती है।’

प्रदेश में आलू की बढ़ती घटती कीमत उन्होंने बताया कि किसान ने पहले साल एक एकड़ में खेती की। लाभ हुआ तो अगले साल तीन एकड़ में आलू उगा दिए। ऐसे में मार्केट में आलू की कीमत गिर गई। हालांकि इसकी एक वजह यह भी है कि प्रदेश में आलू ब्रिकी की उचित व्यवस्था ही नहीं है। वैसे प्रदेश में पूरे भारत का चालीस फीसदी आलू होता है मगर ब्रिकी की अच्छी व्यवस्था नहीं है। सरकार की तरफ से भी उचित व्यवस्था नही है।

पत्रकार द्वारा पूछने पर की वह प्रदेश के आलू बाहर क्यों नहीं बेचते तो किसान ने सरकार पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि सरकार ने ऐसा कोई नीति नहीं बनाई कि किसान अपना आलू बाहर के प्रदेशों में बेच सके। सरकार को किसानों के परिवहन पर छूट देनी चाहिए जिससे दूर दराज के इलाकों में अपनी फसल ले जाने पर किसानों को यह महंगा ना पड़े। सरकार को चाहिए कि राज्य में चिप्स की फेक्ट्रियां स्थापित करे। इससे किसानों की आमदनी बढ़ सकती है।

एक अन्य किसान हरिहर सागर ने बताया, ‘सरकारों में किसानों के लिए कोई विशेष मदद नहीं है। धान के रेट 1750 किए तो खाद के दाम बढ़ा दिए। पिछले साल के मुकाबले इस साल भी धान करीब 100 क्विंटल से सस्ता बिक रहा है जबकि हमारी लागत बढ़ रही है।’ बता दें कि साल 2018 में किसानों ने सरकार के प्रति विरोध जताते हुए यूपी की सड़कों पर आलू फेंक दिए थे।

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