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उत्तर प्रदेश के राज्यपाल से बढ़ी सपा की दूरी

समाजवादी पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल से टकराव की मुद्रा में है। लचर कानून व्यवस्था पर राज्यपाल राम नाइक की तरफ से उठाया गया सवाल प्रदेश की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी..

लखनऊ | October 29, 2015 1:20 AM
फाइल फोटो

समाजवादी पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल से टकराव की मुद्रा में है। लचर कानून व्यवस्था पर राज्यपाल राम नाइक की तरफ से उठाया गया सवाल प्रदेश की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी को नागवार गुजर रहा है। यही वजह है कि कबीना मंत्री मोहम्मद आजम खां के बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर राम गोपाल यादव राजभवन को संवैधानिक हद में रहने की नसीहत दे चुके हैं। विधानसभा चुनाव के करीब पहुंच रहे उत्तर प्रदेश में सियासी हांडी की गर्मी बरकरार रखने के लिए समाजवादी पार्टी राजभवन से मोर्चा लेने की तैयारी में है।

उत्तर प्रदेश में राजभवन और समाजवादी पार्टी के बीच की तल्खी दस्तूर की शक्ल अख्तियार कर चुकी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए राज्यपाल रहे टीवी राजेश्वर से हुई रार पुरानी बात नहीं है। उस दौर में प्रदेश सरकार और राजभवन कई मर्तबा आमने-सामने आ गए थे और दोनों के बीच टकराव के हालात पैदा हो गए थे। उस वक्त राजभवन के बढ़ते दखल से झुंझला कर मुलायम सिंह यादव ने राजभवन को साजिश का अड्डा तक करार दे दिया था। वैसा ही कुछ राम नाइक के राज्यपाल बनने के बाद दोहराया जा रहा है। प्रोफेसर राम गोपाल यादव ने दो दिन पूर्व राज्यपाल पर संवैधानिक मर्यादाओं का पालन न करने और आरएसएस के स्वयंसेवक की तरह काम करने का आरोप लगाकर संकेत दे दिए हैं कि पुराने मुलायम सूत्र को पुन: दोहराने का मन समाजवादी पार्टी बना चुकी है।

प्रदेश के राज्यपाल का पदभार संभालने के बाद से राज्यपाल राम नाइक कई मर्तबा आजम खां के निशाने पर आ चुके हैं। राज्यपाल बनने के बाद राम नाईक ने आजम खां के एक करीबी को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया था और इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री को वापस भेज दिया था। इस वाकये के बाद से आजम खां राज्यपाल के खिलाफ हमलावर हुए। वह सिलसिला अब भी जारी है।

एक और वाकया है जिससे सरकार, समाजवादी पार्टी और राजभवन के बीच के संबंधों में पनप रही तल्खी का अंदाजा लगाया जा सकता है। मुख्य सचिव के पद से हटने के बाद जावेद उस्मानी के मुख्य सूचना आयुक्त के पद की शपथ लेने के लिए राजभवन जाना था। राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया जिसमें कैबिनेट मंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां राजभवन तो पहुंचे लेकिन उन्होंने राज्यपाल राम नाइक से न ही दुआ-सलाम की और न ही समारोह के बाद आयोजित होने वाली चाय पार्टी में ही उन्होंने शिरकत की। इससे साफ हो गया कि आखिर सरकार और सपा के मंसूबे राज्यपाल को लेकर हैं क्या?

दरअसल समाजवादी पार्टी चाहती है कि राज्यपाल सार्वजनिक मंचों से और मीडिया के समक्ष प्रदेश सरकार की कमियों का उल्लेख करने से परहेज करें। उन्हें जो कहना हो वह मुख्यमंत्री से कहें। इस टीस को प्रोफेसर रामगोपाल यादव दो दिन पहले उजागर भी कर चुके हैं। प्रदेश में कानून व्यवस्था के ध्वस्त होने के राज्यपाल के बयान से सरकार और समाजवादी पार्टी तिलमिला गई है। इसीलिए प्रोफेसर यादव को राज्यपाल को केंद्र में मंत्री बनाने की सलाह तक देनी पड़ी। नामित विधान परिषद सदस्यों की सूची को कई मर्तबा राजभवन की तरफ से लौटाने और राज्य सरकार को अंततोगत्वा पांच नाम पर पुनर्विचार करने की नसीहत देने के राज्यपाल के फैसले के बाद प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार की साख प्रभावित हुई थी। इस साख पर आई आंच की कसमसाहट और कानून व्यवस्था पर खुद को घेरे जाने की कड़वी सच्चाई ने समाजवादी पार्टी के पास राज्यपाल पर हमलावर होने के अलावा कोई रास्ता नहीं छोड़ा है।

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