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एएमयू से हटाओ जिन्ना की फोटो- योगी आदित्य नाथ की हिंदू युवा वाहिनी ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम

हिंदू संगठन ने कहा है कि अगर दो दिन में जिन्ना की तस्वीर नहीं हटाई गई तो इसके सदस्य जबरन इस काम को करेंगे।

पाकिस्तान के कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर अलीगढ़ मुस्लिम विवि में लगाने पर हंगामा मचा था। (फोटो-सोशल मीडिया)

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में पाकिस्तान के कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की हिंदू युवा वाहिनी ने यूनिवर्सिटी को 48 घंटे का अल्टीमेटम देकर जिन्ना की तस्वीर हटाने को कहा है। हिंदू संगठन ने कहा है कि अगर दो दिन में जिन्ना की तस्वीर नहीं हटाई गई तो इसके सदस्य जबरन इस काम को करेंगे। मामले में संगठन के उपाध्यक्ष आदित्य पंडित ने कहा है कि उन्होंने यूनिवर्सिटी से जिन्ना की तस्वीर हटाने की कसम खाई है। इससे पहले भारतीय जनता पार्टी के सासंद ने एएमयू से पूछा कि वह बताएं कि पाकिस्तान संस्थापक की तस्वीर यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट यूनियन के ऑफिस में क्यों लटकी है। कांग्रेस ने भाजपा सांसद की इस मांग को मुद्दों से भटकाने और विविधता की राजनीति करने वाला कहा है। गौरतलब है कि अलीगढ़ से भाजपा सांसद सतीश गौतम ने इस सप्ताह वाइस चांसलर को पत्र लिख यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर होने पर आपत्ति दर्ज कराई थी। इसपर यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता शफी किदवई ने मंगलवार (1 मई, 2018) सफाई देते हुए कहा कि जिन्ना यूनिवर्सिटी कोर्ट के संस्थापक सदस्य थे।

प्रवक्ता ने आगे कहा कि जिन्ना को 1938 में एमएमयू की लाइफटाइम मेंबरशिप दी गई थी। जिन्ना 1920 में यूनिवर्सिटी कोर्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। साथ ही वह इसके दानदाताओं में से भी एक थे। शफी किदवई के मुताबिक जिन्ना को एएमयू की लाइफटाइम मेंबरशिप तब दी गई थी जब मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग नहीं की थी। वहीं सांसद सतीश गौतम के पत्र पर कांग्रेस प्रवक्ता सुष्मिता देव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि लोगों का ध्यान मुख्य मुद्दों से भटकाने के लिए यह भाजपा की एक और कोशिश है। दरअसल जिन्ना विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पिछले सप्ताह आरएसएस कार्यकर्ता अमीर रशीद ने वाइस चांसलर को पत्र लिखकर यूनिवर्सिटी में संघ की शाखा आयोजित करने की मांग की थी। जिसके जवाब में यूनिवर्सिटी ने रशीद के ऐसे किसी भी प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया। कहा गया कि यूनिवर्सिटी में किसी भी शाखा और कैंप के आयोजन की अनुमति नहीं दी सकती है।

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