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यूपी: 44 लाख किसानों के हुए कर्ज माफ, बैंकों ने ढूंढ निकाले थे 66 लाख

कृषि विभाग के अधिकारी ने बताया कि गहन जांच के बाद उन किसानों के नाम लिस्ट से हटा दिए गए जो इस योजना के तहत फिट नहीं बैठते। बड़ी संख्या में लाभार्थी किसान नहीं थे।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर। (फाइल फोटो)

भाजपा सांसद से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने योगी आदित्य नाथ ने मार्च 2017 में सत्ता संभालने के बाद राज्य में किसानों को बैंक कर्ज से छूट देने की घोषणा की थी। हालांकि मालूम होता है कि बैंकों ने कृषि कर्ज में छूट योजना के लाभार्थियों के आकड़े ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए हैं। कर्ज माफी के मुद्दे से जूझ रहे लोगों ने यह बात कही है। इन लोगों का कहना है कि इस योजना के तहत जारी किए गए कुल धन में 33 फीसदी अभी तक खर्च नहीं किया गया है। जबकि किसानों को कर्ज से छूट देने वाली यह योजना 31 दिंसबर को खत्म हो जाएगी। समय सीमा बढ़ाए जाने पर किसानों को कर्ज से छूट में 31 मार्च, 2019 तक का मौका मिलेगा। हालांकि इस मामले में संबंधित लोगों ने खुलकर बात नहीं की है।

4 अप्रैल, 2017 को सीएम योगी आदित्य नाथ ने अपनी पहली कैबिनेट मीटिंग में छोटे और सीमांत किसानों का कर्ज माफ करने का फैसला लिया। इस योजना में एक लाख रुपए तक के कर्ज माफी की घोषणा की गई। सरकार ने यह फैसला अपने उस चुनावी वादे को पूरा करने के लिए लिया, जिसके तहत 36,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि निर्धारित की गई। सरकार के निर्देश पर बैंकों ने 66 लाख किसानों की पहचान की जो योजना के तहत फिट बैठते हैं। मगर अभी तक 44 लाख किसान इस योजना का लाभ उठा सके हैं। ये बैंकों द्वारा लक्षित किसानों का 66 फीसदी है। सरकार इस योजना में अभी तक 24,000 करोड़ खर्च कर चुकी है। जारी राशि का ये करीब 68 फीसदी बैठता है।

इस मामले में कृषि विभाग के अधिकारी ने बताया कि गहन जांच के बाद उन किसानों के नाम लिस्ट से हटा दिए गए जो इस योजना के तहत फिट नहीं बैठते। बड़ी संख्या में लाभार्थी किसान नहीं थे। सूत्रों के मुताबिक जब यूपीए के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार केंद्र की सत्ता पर काबिज थी तब 2008-09 में किसानों की कर्ज माफी की घोषणा की गई। इस दौरान बैंकों ने बड़ी संख्या में ऐसे किसानों के कर्ज माफ कर दिए जो लाभार्थी की श्रेणी में नहीं थे। इनमें से कुछ लोग तो किसान भी नहीं थे।

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