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कासगंज: सवर्णों के इलाके से बारात निकालना चाहता है दलित दूल्‍हा, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर कहा- पुलिस के पास जाओ

एडिशनल एडवोकेट जनरल, जो इस मामले में राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि याचिका खारिज कर दी गई क्योंकि कोर्ट के समक्ष लाया गया मामला मौलिक अधिकारों से संबंधित मामला नहीं था।

Author April 7, 2018 2:12 PM
गांव में जहां दलित समुदाय बारात निकालना चाहता था वहीं ठाकुरों ने इसका विरोध किया है। (फोटो सोर्स गजेंद्र यादव)

सारा हफीज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार (6 अप्रैल, 2018) को दलित दूल्हे की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें ठाकुर (सवर्ण) बहुल कासगंज जिले के एक गांव में बारात निकालने के लिए हस्तक्षेप की मांग की गई थी। मामले में हाईकोर्ट की बैंच ने 30 मार्च (औपचारिक तौर पर 6 अप्रैल) को याचिका खारिज करते हुए कहा कि वह चाहे तो पुलिस से संपर्क कर उन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा सकता है जो विवाह समारोह में परेशानियां पैदा कर रहे हैं।

बता दें कि ठाकुर बहुल निजामाबाद, जहां दुल्हन शीतल रहती है, में 27 वर्षीय संजय जाटव की बारात आने का विरोध किया गया है, जबकि हाथरस जिले का संजय घोड़ी पर चढ़कर बारात लाना चाहता है। सवर्ण समुदाय का कहना है कि यह उनके समुदाय के लिए अपमान की बात होगी।  गौरतलब है कि शीतल और संजय की शादी 20 अप्रैल को होनी है।

इसपर एडिशनल एडवोकेट जनरल, जो इस मामले में राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि याचिका खारिज कर दी गई क्योंकि कोर्ट के समक्ष लाया गया मामला मौलिक अधिकारों से संबंधित मामला नहीं था। इसलिए मामले का निपटारा स्थानीय प्रशासन द्वारा किया जाना चाहिए।

इससे पहले संजय जाटव ने अपनी याचिका में कोर्ट में कहा कि अदालत के हस्तक्षेप से उसे पूरे सम्मान के साथ पूरे बारात ले जाने की अनुमति दी जाए। इसके लिए जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा पूरे परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई जाए।

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