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उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश- मेडिकल कॉलेजों में दवा और गैस भुगतान बकाया न रखें

यह सुनिश्चित करें कि उनके मेडिकल कॉलेज या चिकित्सीय संस्थान में दवा और आॅक्सीजन की कमी न होने पाए और यदि किसी गैस आपूर्तिकर्ता का कोई भी पैसा बाकी हो तो उसका भुगतान तुरंत कर दिया जाए।

Author लखनऊ | August 14, 2017 2:54 AM
Yogi Atidyanath, Prayag Kumbh Mela, ganga swachata abhiyan, UP Chief Minister, Chief Minister Yogi Atidyanath, Yogi Atidyanath Statement, Prayag Kumbh 2019, Ganga Rever, Ganga Cleaning, National news, Jansattaयोगी ने कहा कि गंगा उत्तर प्रदेश के 25 जिलों से होकर बहती है। (Source: PTI)

गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में 30 बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद प्रदेश का चिकित्सा शिक्षा विभाग विशेष रूप से सतर्क हो गया है और उसने प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों और बडे़ चिकित्सा संस्थानों को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने संस्थानों में किसी भी प्रकार की दवा और आॅक्सीजन की कमी न होने दें। साथ ही यदि किसी गैस आपूर्तिकर्ता का कोई बकाया हो उसका भुगतान तुरंत किया जाए।  अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा शिक्षा) अनीता भटनागर जैन ने बताया कि यह निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पहले भी सभी 21 संस्थानों को दिए गए थे लेकिन गोरखपुर हादसे के बाद शनिवार यह निर्देश एक बार फिर सभी संस्थानों के प्रमुखों को भेजे गए हैं।  गौरतलब है कि शनिवार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पत्रकारों को बताया था कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत आॅक्सीजन की कमी की वजह से नही हुई है। अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा शिक्षा) जैन ने रविवार विशेष बातचीत में कहा कि गोरखपुर हादसे के बाद हमने प्रदेश के नौ सरकारी मेडिकल कॉलेजों और 12 अन्य बड़े चिकित्सीय संस्थानों के प्राचार्य और मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों को लिखित निर्देश दिए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके मेडिकल कॉलेज या चिकित्सीय संस्थान में दवा और आॅक्सीजन की कमी न होने पाए और यदि किसी गैस आपूर्तिकर्ता का कोई भी पैसा बाकी हो तो उसका भुगतान तुरंत कर दिया जाए। संस्थान में किसी भी तरह आॅक्सीजन की कमी न होने पाए और आॅक्सीजन का पर्याप्त स्टाक सुरक्षित रखा जाए।

उन्होंने कहा, ‘प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को व्यक्तिगत रूप से यह सुष्निश्चित करना है कि दवाओं में कोई कमी न हो, जहां पर गैस की आपूर्ति होती है वहां सारे भुगतान तुरंत कर दिए जाएं, इसमें कोई ढिलाई न बरती जाए। व्यक्तिगत रूप से वह देखे कि किसी भी तरह के भुगतान में कोई देरी न हो और मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पतालों में दवाओं और गैस की सप्लाई में कोई कमी न हो।’उन्होंने कहा कि वैसे गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत आॅक्सीजन की कमी की वजह से नही हुई है, जांच में साफ हो गया है कि वहां बच्चों की मौत बीमारियों की वजह से हुई है। और जहां तक बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज गोरखपुर की बात है, तो वहां तो गैस का भुगतान भी पहले ही कर दिया गया था। इसी लिए सभी प्रिसिंपल और चिकित्सा संस्थानों के प्रमुखों से कहा गया है कि वह दवाओं और गैस की मानीटरिंग स्वंय करे और भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी न करें और अगर कोई परेशानी होती है तो तुरंत शासन को उससे अवगत कराएं। जैन ने कहा कि यह मौसम बीमारियों का मौसम है इसलिए सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यो और चिकित्सा संस्थानों के प्रमुखों को पहले भी चिटठी भेज कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। अब एक बार फिर 12 अगस्त को इन सभी को चिटठी भेजकर हाईएलर्ट पर रहने को कहा गया है। उत्तर प्रदेश में नौ सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। ये मेडिकल कॉलेज लखनऊ, कानपुर, आगरा, इलाहाबाद, मेरठ, झांसी, गोरखपुर, सैफेई और अंबेडकर नगर में है । इसके अलावा 12 बडे़ चिकित्सीय संस्थान है जो राज्य सरकार के अन्तर्गत आते हैं।

 

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