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निकाय चुनाव: जहां योगी ने डाला वोट, वहां जीती मुस्लिम महिला, बोलीं- बाबा हमारे पड़ोसी, करते रहेंगे सहयोग

उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में भाजपा ने बसपा, सपा और कांग्रेस सहित सभी विपक्षी पार्टियों को करारी मात दी है। चुनाव में 16 में से 14 मेयर भाजपा के जीते।

गोरखपुर के वार्ड नंबर 68 से जीतीं नादिरा ख़ातून। (Photo: ANI)

इस साल भारी मतों से विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के नेतृत्व में निकाय चुनाव में भी बड़ी जीत हासिल की है। सूबे में भाजपा ने बसपा, सपा और कांग्रेस सहित सभी विपक्षी पार्टी को करारी मात दी है। चुनाव में 16 में से 14 मेयर भाजपा के जीते जबकि दो सीटों पर बसपा के उम्मीदवार जीते हैं। वहीं नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत में भी भाजपा के अधिकतर उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। हालांकि सबको चौंकाते हुए भाजपा का उम्मीदवार सीएम योगी आदित्य नाथ के क्षेत्र गोरखपुर के वार्ड नंबर 58 से हार गया। यह वही वार्ड है जहां से योगी वोटर हैं, उन्‍होंने मतदान भी किया था। यहां से मुस्लिम निर्दलीय उम्मीदवार नादिरा ख़ातून ने जीत हासिल की है।

यहां वार्ड नंबर 68 से चुनावी मैदानी में उतरीं नादिरा ख़ातून ने भाजपा उम्मीदवार माया त्रिपाठी को 422 वोट से हरा दिया। जीत के बाद नादिरा ने कहा कि सीएम योगी को जब भी जरूरत होगी वह उनका सहयोगी करेंगी। उनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर पढ़ाई है। आदित्य नाथ पर उन्होंने कहा, ‘बाबा की वजह से इस मुकाम पर पहुंचे हैं। बाबा हमारे पड़ोसी हैं। वो खुद जिताएं हैं हम लोगों को।’

गौरतलब है चुनाव नतीजों के बाद कुछ जगहों पर कथित तौर पर ईवीएम गड़बड़ी की बात भी सामने आईं। एक निर्दलीय प्रत्याशी का आरोप है की उसे एक भी वोट नहीं मिला है जबकि अन्य लोगों ने ना सही लेकिन उनका और उनके परिवार का वोट तो उन्हें मिलना चाहिए था। सहारनपुर से निर्दलीय उम्मीदवार शबाना का दावा है की उन्हें शून्य वोट मिला है। ईवीएम पर सवाल उठाते हुए वार्ड नम्बर 54 से प्रत्याशी शबाना का कहना है कि उन्हें एक भी वोट ना मिलने वाली बात उन्हें मतगणना से पता चली।

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शबाना ने कहा की मैंने और मेरे परिवार ने मुझे वोट दिया था तो मेरा वोट शून्य कैसे हो सकता है। मुझे करीब 900 वोट मिलने की उम्मीद थी लेकिन काउंटिंग में मेरे खाते में एक भी वोट नहीं आया। इससे साफ पता चलता है की ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की गई है। क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो कम से कम मेरा वोट तो मुझे मिलता। यह पहला मामला नहीं जब ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए हैं। इससे पहले कानपुर के वार्ड नम्बर 66 में वोटिंग के दौरान ईवीएम में गड़बड़ होने की बात सामने आई थी, जिसे लेकर स्थानीय लोगों ने खूब हंगामा किया था।

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