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कांग्रेस में “क्लास वॉर”! सिंधिया की मीटिंग में नहीं पहुंचे हारे हुए दिग्गज, अलग बैठक करने की अटकल

कुछ वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया कि दिल्ली-एनसीआर के करीब के उम्मीदवारों को दिल्ली में अलग-अलग बैठक में भाग लेना था।

Jyotiraditya Scindiaलखनऊ में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मुलाकात सिंधिया। (photo source- twitter.com/JM_Scindia)

लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में करारी हार का सामना करने के बाद कांग्रेस के महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार (14 जून, 2019) को प्रदेश के नेताओं से मुलाकात कर हार के कारणों की समीक्षा की। सिंधिया कांग्रेस के पश्चिमी उत्तर प्रदेश मामलों के प्रभारी भी हैं। उन्हें प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 38 सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बैठक में शामिल हुए कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि सिंधिया ने हार की संभावित वजहों को जानने के लिए जिलाध्यक्षों और नगर अध्यक्षों से बातचीत की। हालांकि इस बैठक में कांग्रेस के दिग्गज नेता नदारद रहे। बैठक में वरिष्ठ पार्टी नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, श्रीप्रकाश जायसवाल, आरपीएन सिंह, इमरान मसूद और सलमान खुर्शीद अनुपस्थित थे।

कुछ वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया कि दिल्ली-एनसीआर के करीब के उम्मीदवारों को दिल्ली में अलग-अलग बैठक में भाग लेना था। सिंधिया की बैठक में हिस्सा लेने वाले 28 उम्मीदवारों में से एक ने कहा, ‘पार्टी ने उनसे अलग से मुलाकात क्यों की? लखनऊ दिल्ली से ज्यादा दूर नहीं है और हम भी दिल्ली जा सकते थे।’ एक पार्टी नेता ने दावा करते हुए कहा कि बड़े नेता जानबूझकर लखनऊ की बैठक से दूर रहे। यह यह अंतर पार्टी के पुनर्निर्माण में एक बड़ा अवरोध है।

बता दें कि दो दिन पहले ही पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने रायबरेली में इसी तरह की समीक्षा बैठक की थी। इस बार चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस केवल एक सीट रायबरेली ही जीत सकी है। प्रियंका को पूर्वी उत्तर प्रदेश की 42 सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। सोनिया गांधी रायबरेली से पुन: चुनाव जीत गईं लेकिन उनके बेटे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अमेठी में केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से चुनाव हार गए।

कांग्रेस नेता अशोक सिंह बैठक में मौजूद थे। उन्होंने बताया कि बैठक में उन्होंने कहा कि पार्टी को हर किस्म का प्रयोग बंद करना चाहिए। उसे कार्यकतार्ओं और कैडर में विश्वास रखना चाहिए और पार्टी को अन्य दलों के साथ गठबंधन पर निर्भर नहीं करना चाहिए। (भाषा इनपुट)

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