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उत्तर प्रदेश: बलात्कार के आरोपी फरार मंत्री गायत्री प्रजापति का गनर गिरफ्तार

प्रजापति और छह अन्य के खिलाफ एक महिला से गैंगरेप और उसकी नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार के प्रयास का मामला दर्ज है।

Author लखनऊ/नई दिल्ली | Updated: March 6, 2017 8:11 PM
gayatri prajapati gunner, gayatri prajapati news, Rape gayatri prajapati, gayatri prajapati Latest newsप्रजापति पर गैंगरेप के साथ ही वीडियो बनाने का मामला दर्ज किया गया है। (photo source – Indian express)

बलात्कार के आरोपी उत्तर प्रदेश के फरार कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति के गनर चंद्रपाल को पुलिस ने सोमवार (6 मार्च) को गिरफ्तार कर लिया। अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्व) शिवराम यादव ने बताया कि चंद्रपाल को राजधानी की पुलिस लाइन के निकट से गिरफ्तार किया गया। उससे प्रजापति सहित मामले के अन्य आरोपियों के ठिकानों के बारे में पूछताछ की जा रही है और जानकारी मिलने पर उन ठिकानों पर छापेमारी की जाएगी। उन्होंने बताया कि गनर को मंगलवार (7 मार्च) को अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। प्रजापति का पासपोर्ट जब्त करने की कार्रवाई पहले ही कर दी गयी है और उनके खिलाफ ‘लुक आउट’ नोटिस जारी किया गया है। प्रजापति के पासपोर्ट को रद्द करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है।

प्रजापति और छह अन्य के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। इन सभी पर एक महिला से गैंगरेप और उसकी नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार के प्रयास का मामला दर्ज है। प्रजापति एवं उसके साथियों की तलाश में लखनऊ कानपुर एवं अमेठी सहित विभिन्न जगहों पर छापेमारी की जा रही है। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर मामला दर्ज होने के बाद से ही प्रजापति फरार हैं। प्रजापति के देश छोड़कर बाहर जाने की आशंका के मद्देनजर देश के हवाई अड्डों को पहले ही एलर्ट कर दिया गया था।

गायत्री प्रजापति को उच्चतम न्यायालय से नहीं मिली राहत

बलात्कार के आरोप में गिरफ्तारी से बच रहे उत्तर प्रदेश के मंत्री गायत्री प्रजापति सोमवार (6 मार्च) को उच्चतम न्यायालय से किसी प्रकार की राहत पाने में विफल रहे। लेकिन न्यायालय ने इस बात पर अप्रसन्नता व्यक्त की कि सपा नेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के उसके आदेश को ‘राजनीतिक रंग’ दिया जा रहा है। न्यायमूर्ति ए के सिकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि उसने सिर्फ कथित सामूहिक बलात्कार और एक महिला और उसकी पुत्री से बलात्कार के प्रयास के आरोप के मामले में प्रजापति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है और वह इन मामलों की निगरानी नहीं कर रहा है।

शीर्ष अदालत ने प्रजापति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश वापस लेने के लिये उनकी याचिका निरस्त करते हुये कहा कि उचित राहत के लिये मंत्री संबंधित अदालत में जा सकते हैं। न्यायालय ने 17 फरवरी को उप्र पुलिस को समाजवादी पार्टी के नेता गायत्री प्रजापति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने पुलिस को इस मामले में की गयी कार्रवाई की रिपोर्ट आठ सप्ताह में शीर्ष अदालत को सीलबंद लिफाफे में सौंपने का भी निर्देश दिया था। पीठ ने कहा, ‘हमने तो सिर्फ इन मामलों में एक प्राथमिकी दर्ज करने और जांच करने का निर्देश दिया है परंतु अब इस आदेश को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।’ पीठ ने कहा, ‘पुलिस को इस मामले की जांच करने दीजिये और वे जो कुछ भी कहना चाहे कहें।’

प्रजापति के विरोधियों में उन पर तथा उनकी पार्टी पर हमला करने के लिये राज्य में विधान सभा चुनाव के प्रचार के दौरान इस मुद्दे का इस्तेमाल किया है। प्रजापति का आरोप है कि यह मामला ‘राजनीति से प्रेरित है क्योंकि शिकायतकर्ता भाजपा से संबद्ध है।’ गिरफ्तारी पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुये प्रजापति मंत्री ने दावा किया था कि राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत में सही संदर्भ में तथ्यों को पेश नहीं किया और उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाये गये हैं। शीर्ष अदालत ने एक महिला की जनहित याचिका पर यह निर्देश दिया था। इस महिला का आरोप है कि प्रजापति और दूसरे लोगों ने बार बार उससे बलात्कार किया। याचिका में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध न्यायालय से किया गया था।

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