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शिया मौलाना कल्बे सादिक ने कहा- राम मंदिर बनाने के लिए बाबरी मस्जिद की जमीन दे दें मुसलमान

शिया मौलाना कल्बे सादिक ने कहा कि "अगर आप जमीन का एक टुकड़ा दे देंगे तो आप करोड़ों दिल जीत लेंगे।"

Author Updated: August 14, 2017 9:08 AM
Ayodhya dispute, Ayodhya row, Delhi Minority Commission, Delhi Minority Commission chairman, Dr Zafrul Islam Khan, Maulana Salman Nadvi, sri sri ravi shankar, supreme court, babri masque, Babri Masjid, Hindi news, news in Hindi, Jansattaगिराए जाने से पहले बाबरी मस्जिद (फाइल फोटो)

शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे सादिक ने रविवार (13 अगस्त) को कहा कि अगर बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुसलमानों के पक्ष में जाता है तो भी उन्हें वो जमीन हिंदुओं को दे देनी चाहिए। मौलाना कल्बे सादिक रविवार को  वर्ल्ड पीस एंड हारमनी कॉन्कलेव में बोल रहे थे। कल्बे सादिक ने कहा कि दोनों समुदायों को इस मसले को परस्पर सम्मान से निपटाना चाहिए। कल्बे सादिक ने कहा, “सुप्रीम कोर् का फैसला जब आए तो अगर ये मुसलमानों के हक में हो तो उन्हें जमीन हिंदुओं को दे देनी चाहिए। मुसलमनों को शांति और सौहार्द्र के साथ अदालत का फैसला स्वीकार करना चाहिए। अगर मुसलमान जीतते हैं तो मेरी उनसे विनम्र प्रार्थन है कि वो खुशी खुशी जमीन हिंदुओं को दे दें। अगर आप कुछ देंगे नहीं तो आपको कुछ मिलेगा नहीं। अगर आप जमीन का एक टुकड़ा दे देंगे तो आप करोड़ों दिल जीत लेंगे।”

हालांकि मुस्लिम आल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने मौलाना कल्बे सादिक के बयान को उनकी निजी राय बताते हुए इससे किनारा कर लिया। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बाबरी मस्जिद और राम मंदिर भूमि विवाद में याचिकाकर्ता है। मुस्लिम बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगमहली ने कहा, “ये उनकी निजी राय है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने साफ कहा है कि अदालत का जो भी फैसला होगा कि उसे स्वीकार होगा। मौलाना कल्बे सादिक की उस फैसले से रजामंदी थी। ये फैसला पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल बॉडी और एग्जीक्यूटिव काउंसिल दोनों जगह से पारित हुआ था।”

बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद पर शुक्रवार (11 अगस्त) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने सभी पक्षों को ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुवाद के लिए तीन महीने का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई पांच दिसंबर (2017) को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पहले वह दो मुख्य पक्षों को चुनेगा इसलिए सभी पक्ष अपने कागजात तैयार रखें। करीब 71 साल बाद बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक की लड़ाई हारने के बाद उत्तर प्रदेश का शिया वक्फ बोर्ड बुधवार (नौ अगस्त, 2017) को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। जहां बोर्ड ने 30 मार्च, 1946 को सुन्नी बोर्ड के पक्ष में सुनाए गए फैसले को चुनौती दी थी। अपनी याचिका में बोर्ड ने स्वीकारा कि बाबरी मस्जिद का निर्माण उस जगह बने एक मंदिर को तोड़कर किया गया था।

शिया वक्फ बोर्ड ने कोर्ट से अपील की कि अन्य याचिकाओं के साथ उसकी याचिका पर भी फैसला किया जाए। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने से एक दिन पहले बोर्ड ने कहा था कि वो बाबरी मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए तैयार है, जिससे इस विवाद को खत्म किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट में वक्फ बोर्ड ने अपनी याचिका एडवोकेट एससी धींगरा के जरिए दाखिल की। याचिका में कहा गया कि कोर्ट ने बाबरी मस्जिद पर सुन्नी वक्फ बोर्ड को मालिकाना हक देकर बड़ी गलती की है। क्योंकि मस्जिद का निर्माण एक शिया मुस्लिम ने करवाया था। दरअसल आमतौर पर लोग मानते हैं कि बाबरी मस्जिद का निर्माण मुगल बादशाह बाबर ने करवाया था, लेकिन इसे चुनौती देते हुए बोर्ड ने दावा किया कि बाबरी मस्दिद का निर्माण बाबर के मंत्री अब्दुल मीर बाकी ने करवाया था, जोकि शिया समुदाय से आते थे। मीर बाकी ने अपने पैसे से मस्जिद का निर्माण करवाया था। जबकि बाबर एक सुन्नी मुस्लिम थे।

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