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खुलने लगे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे में घपले, किसान नेता बोले- कड़ी कार्रवाई हो

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के जमीन अधिग्रहण में किसानों से औने-पौने दाम पर जमीन को खरीद कर चार गुना मुआवजा वसूलने की जांच के आदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

देश के सबसे लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के निर्माण में इटावा जनपद की तीन तहसीलों ताखा, इटावा और सैफई के किसानों की जमीन खरीदी गई हैं। ताखा तहसील में सबसे ज्यादा भूमि कुदरैल ग्राम पंचायत के किसानों से ली गई है। यहां घपले व्यापक नजर आ रहे हैं।  शासन की जांच में अधिसूचना जारी होने के एक वर्ष पूर्व में क्रय-विक्रय की गई भूमि का ब्योरा जिला प्रशासन जुटा रहा है। इस संबंध में तहसीलदार ताखा रामनयन ने भरथना रजिस्ट्रार कार्यालय जाकर इसका ब्योरा तलब किया। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के जमीन अधिग्रहण में किसानों से औने-पौने दाम पर जमीन को खरीद कर चार गुना मुआवजा वसूलने की जांच के आदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए हैं। एक्सप्रेस वे के निर्माण की सूचना 30 सितंबर, 2013 को जारी हुई थी। एक अनुमान के मुताबिक ताखा तहसील क्षेत्र में भी इस तरह के कई मामले हैं। इनकी रिपोर्ट तैयार करने में तहसील प्रशासन जुड़ा हुआ है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के लिए ताखा तहसील ग्रामसभा कुदरैल, कुरखा, नगला चिंता, खरगपुर सरैया, टकपुरा, कौआ, रमपुरा, अधीनी बनी हरदू, दींग, नगला और मेहरा हैं। इटावा तहसील में उनवा, संतोषपुर, ईश्वपुर, मूंज नीवासई, अगूपुर, गोपालपुर, भोजपुर और रामायन हैं। सैफई तहसील से बरौलीकला, लाडमपुर आदि गांव की जमीन का किसानों ने बेनामा किया है नहीं तो अधिग्रहण कर लिया गया था।

प्रत्येक तहसील क्षेत्र में सर्किल रेट अलग-अलग दर पर निर्धारित रहता है। यही नहीं, इन दरों की समीक्षा छह माह पर होती रहती है। अलग-अलग गांवों के लिए दरें भी अलग-अलग रहती हैंं। हालांकि इनमें से ज्यादातर में समानताएं रहती हैं। इटावा तहसील में एक्सप्रेस वे के लिए ली गई भूमि का सर्किल रेट शासन ने राजकीय मार्ग पर 20 लाख, जनपदीय मार्ग पर 15 लाख, आबादी भूमि पर 12 लाख और सामान भूमि पर आठ लाख रुपए प्रति हेक्टेअर निर्धारित हैं। किसानों को अपनी जमीन का चार गुना मुआवजा दिया गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता डा. रामशंकर कठेरिया का दावा है कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस की जमीन की खरीद फरोख्त में बड़ा खेल हुआ है। इसमें जिम्मेदार अफसरों और माफिया ने मिलकर अनियमितता की है। जांच के बाद दोषी लोगों पर कारर्वाई की जाएगी।
किसान नेता बोले, कड़ी कार्रवाई हो

माकपा एवं किसान सभा ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे में इटावा में भू अधिग्रहण के लिए धारा चार के प्रकाशन के समय प्रचलित सर्किल रेट का चार गुना प्रतिकार में भी आज एवं पुनर्वास दिलाए जाने की मांग प्रदेश सरकार से की है। माकपा राज्य मंत्री परिषद सदस्य मुकुट सिंह, किसान सभा के जिलाध्यक्ष नाथूराम यादव एवं जिला मंत्री संतोष साथ ने संयुक्तरूप से कहा है कि धारा चार के प्रकाशन के बाद केंद्र के सर्किल रेट चार गुना प्रतिकार और पुनर्वास का नया कानून पास हो गया था। इसलिए किसानों को लाभ से वंचित करते हुए दरों को घटाकर एक तिहाई कर उसका चार गुना कर दिया गया। यह किसानों के साथ बड़ा धोखा था। अधिग्रहण की प्रक्रिया अधूरी छोड़ जबरिया जमीन को बैनामा करा कर पुनर्वास सहित आगे कोर्ट जाने पर अपनी शिकायत रखे जाने के अधिकार से किसानों को वंचित कर दिया गया है।

किसान नेताओं ने कहा यदि योगी सरकार जांच के प्रति गंभीर है तो तत्कालीन डीएम एवं संबंधित अधिकारियों के खिलाफ किसानों के साथ धोखाधड़ी के लिए कड़ी कार्रवाई करते हुए किसानों को प्रथम प्रकाशन के बाद प्रचलित सर्किल रेट दरों का चार गुना प्रति कर ब्याज एवं पुनर्वास का भुगतान किया जाए। किसान नेताओं ने बताया कि इटावा सदर में 30 लाख रुपए हेक्टेयर से घटाकर 8 लाख, तहसील में 40 लाख से घटाकर के 11 लाख रुपए हेक्टेयर कर दिया गया जबकि सैफई में कृषि योग्य भूमि का 1.2 करोड़ रुपए बरकरार रखा गया था। किसान नेताओं ने बताया कि किसान सभा इस अन्याय के खिलाफ लगातार आंदोलन करती आ रही है।

मैनपुरी में भी गड़बड़ी!

पडोसी मैनपुरी जिले से होकर गुजर रहे एक्सप्रेस वे के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि के भुगतान में भी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। इस पर कैग ने भी आपत्ति जताई थी। तब यूपीडा के तत्कालीन अध्यक्ष ने डीएम को जांच के लिए लिखा था। हालांकि स्थानीय अधिकारियों ने सब कुछ ओके की रिपोर्ट दे दी। अब सरकार की ओर से जांच के आदेश होते ही स्थानीय अधिकारियों और कमर्चारियों की सांसें अटक गई हैं। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए जिले में किए गए भूमि अधिग्रहण पर भी पूर्व में भ्रष्टाचार के बादल मंडराते रहे हैं। पिछले साल सितंबर में कैग के आपत्ति जताने पर यूपीडा के तत्कालीन चेयरमैन नवनीत सहगल ने डीएम को मामले की जांच के आदेश दिए थे। तब कैग ने जांच के दौरान करहल में इंटरचेंज के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में गड़बड़ी पकड़ी थी। सूत्रों के अनुसार तब आवश्यकता से अधिक भूमि स्थानीय प्रशासन ने अधिग्रहीत कर ली थी। यही नहीं किसानों को उसका मुआवजा भी नियमों को ताक पर रखकर दिया गया था। इस पर यूपीडा के तत्कालीन चेयरमैन नवनीत सहगल ने डीएम को जांच करने के लिए कहा। हालांकि तब अधिकारियों ने शासन को सब कुछ ओके की रिपोर्ट भेज कर मामले की इतिश्री कर ली थी। मैनपुरी के डीएम सीपी सिंह का कहना है कि यदि शासन से मामले की जांच के आदेश आते हैं तो उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
304 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की गई थी
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का 28 किलोमीटर हिस्सा जिले की करहल तहसील से होकर गुजर रहा है। यह फिरोजाबाद के गोटपुर से शुरू होकर करहल के मोहब्बतपुर तक जाता है। इसके लिए जिले में कुल 22 गांवों की लगभग 304 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की गई थी। इसके लिए कुल 3500 बैनामे सरकार के पक्ष में कराए गए। इनमें से 2810 किसानों को मुआवजा दिया जाना था। इनमें से 2808 किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है। वहीं दो किसानों ने अभी तक मुआवजा नहीं लिया है जबकि 35 हेक्टेयर भूमि का तब 527 किसानों ने बैनामा नहीं किया था। इसमें मुआवजा राशि को लेकर विवाद की स्थिति थी। बाद में समझाने पर 398 किसानों ने बैनामा कर दिया और मुआवजा भी ले लिया। जबकि 152 किसानों ने अभी तक अपनी जमीन का बैनामा सरकार के पक्ष में नहीं किया है। सरकारी अभिलेखों के अनुसार भूमि अधिग्रहण के लिए जिले में कुल 376 करोड़ रुपए आए थे। इनमें से 317 करोड़ रुपए का मुआवजा दे दिया गया है। लगभग 30 करोड़ रुपए अभी भी जिला प्रशासन के पास हैं। एक्सप्रेस वे के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण के कई मामले अभी तक कोर्ट में विचाराधीन हैं। इनमें से ज्यादातर मामले सर्किल रेट और भूमि का मुआवजा निर्धारित करने को लेकर हैं। किसानों का आरोप है कि आसपास के दो खाताधारकों को अलग-अलग दर से मुआवजा दिया गया है जबकि दोनों की भूमि की मौजूदगी और प्रकार एक समान हैं।

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