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मुलायम ने अखिलेश यादव को सुनाई खरी-खरी, कहा- 2014 में मानी थी सारी बातें पर क्या निकला नतीजा

मुलायम सिंह ने कहा कि अगर वो (अखिलेश यादव) मेरे बेटे नहीं होते तो कोई उन्हें स्वीकार नहीं करता। मैंने और शिवपाल ने उस समय पार्टी को खड़ा किया जब अखिलेश स्कूल जाया करते थे।

Samajwadi Party, SP 23 Cadidate, Mukhtar Ansari, Mukhtar Ansari news, azam khan News, UP Assembly pollsसमाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव। (फाइल फोटो)

समाजवादी पार्टी में चाचा-भतीजे के बीच चली आ रही जंग खत्म होती दिखाई दे रही है। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने दोनों के बीच की खाई को पाटने का काम किया। यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने शनिवार को शिवपाल सिंह यादव से मुलाकात कर गिले-शिकवे दूर किए। मुलायम सिंह ने जिम्मेदारियां तय करते हुए अखिलेश यादव को कड़ा संदेश देने की भी कोशिश की है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक ने मुलायम सिंह ने पार्टी को संबोधित करते हुए तल्ख लहजे में कहा, ‘2014 में हमने वही किया जो अखिलेश ने कहा और हम (सपा) पांच सीटों पर सिमट गए। किसने शर्मिंदा किया, मैंने या उन्होंने? आगे कहा कि अखिलेश ने गलत किया तो मेरी जिम्मेदारी है कि मैं उसे गलत फैसले को सही करूं।

मुलायम सिंह ने कार्यकर्ताओं से कहा कि उनका फैसला नहीं बदलेगा और शिवपाल यादव ही समाजवादी पार्टी की उत्तर प्रदेश ईकाई के अध्यक्ष रहेंगे। नेताजी ने गलत फैसलों के लिए अखिलेश की आलोचना के साथ ही राज्य में उनके द्वारा किए गए कामों की प्रशंसा भी की। मुलायम सिंह ने कहा कि अगर वो (अखिलेश यादव) मेरे बेटे नहीं होते तो कोई उन्हें स्वीकार नहीं करता। मैंने और शिवपाल ने उस समय पार्टी को खड़ा किया जब अखिलेश स्कूल जाया करते थे।

वहीं, दूसरी ओर यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए शिवपाल यादव को पूरा समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की है कि विधानसभा चुनाव के लिए कड़ी मेहनत करें। अखिलेश ने शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर धन्यवाद भी दिया। शिवपाल यादव के समर्थकों की ओर से जारी विरोधी नारेबाजी के बीच शनिवार को अखिलेश अपने चाचा से मिलने उनके घर पहुंचे। इस दौरान उनकी पत्नी डिंपल यादव और उनकी चाची सरला (शिवपाल यादव की पत्नी) मौजूद रहीं।

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच तनातनी चल रही है। दोनों नेताओं के बीच मुख्तार अंसारी की पार्टी का सपा में विलय किए जाने के बाद से विवाद शुरू हुआ। अखिलेश इस विलय के खिलाफ थे। बाद में विलय को रद्द कर दिया गया। कहा जा रहा था कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव की इच्छा से विलय के प्रक्रिया को पूरा किया गया था। हाल ही में खनन मुद्दे पर घिरी यूपी सरकार ने मंत्री गायत्री प्रजापति को पद से हटा दिया था। उसके अगले दिन मुख्य सचिव दीपक सिंघल को भी हटा दिया गया। दोनों ही शिवपाल सिंह के करीबी बताए जाते हैं। इससे नाराज सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने अखिलेश की जगह शिवपाल को उत्‍तर प्रदेश समाजवादी पार्टी का अध्‍यक्ष बना दिया था। इसके बाद अखिलेश ने शिवपाल से मंत्री पद वापस ले लिए थे। बाद में मुलायम सिंह के दखल के बाद अखिलेश को फैसला वापस लेना पड़ा।

 

 

 

 

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