ताज़ा खबर
 

कौन है सपा में इस दंगल का सूत्रधार?

अखिलेश यादव ने अमर सिंह को सपा से निष्कासित किए जाने पर कहा, ‘मुझे प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी से हटाए जाने के लिए नेताजी के पास उस वक्त बैठे एक बाहरी खासी जल्दबाजी में थे। जब नेताजी के कार्यालय पर आदेश टाइप होने में विलम्ब होने लगा तो उन्होंने अपने कार्यालय से टाइपराइटर मंगवा कर मेरे खिलाफ बेहद जल्दबाजी में आदेश टाइप करवाया।

राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ नेता अमर सिंह। (फाइल फोटो)

आखिर समाजवादी पार्टी में चल रहे गृह युद्ध का सूत्रधार है कौन? अमर सिंह, प्रो. रामगोपाल यादव, शिवपाल सिंह यादव या अखिलेश यादव? सवाल बड़ा है। ये वो सवाल है जिसका जवाब उत्तरप्रदेश और देश, दोनों ही जानना चाहते हैं। अखिलेश यादव की मानें तो इस पूरी साजिश के जिम्मेदार अमर सिंह हैं। यदि प्रो. राम गोपाल यादव की कही बात पर भरोसा करें तो उत्तर प्रदेश के मौजूदा सियासी संकट के सूत्रधार और कोई नहीं बल्कि अमर सिंह हैं। ऐसा ही मानना मो. आजम खां का भी है जिनकी पहचान समाजवादी पार्टी में अमर सिंह के विरोधी के रूप में कई बरसों से स्थापित हो चुकी है।

सपा में मचे गृह युद्ध के सूत्रधार के बारे में प्रो. राम गोपाल यादव के उस बयान पर गौर करने की जरूरत है जो उन्होंने तीन महीने पहले देकर समाजवादी खेमे और देश की राजनीति में भूचाल ला दिया था। शालीन स्वभाव के प्रो. यादव ने उस वक्त कहा था, उत्तर प्रदेश में बिना त्यागपत्र मांगे अखिलेश यादव से प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी लेने के बाद छिड़े सियासी महासंग्राम के सूत्रधार और कोई नहीं बल्कि अमर सिंह हैं। मुलायम सिंह यादव की सरलता का फायदा उठा कर अमर सिंह ने अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने का फैसला करवा दिया। यह ऐन चुनाव के पहले सपा की छवि को खराब करने का षड़यन्त्र था।

प्रो. रामगोपाल यादव के इस बयान की अगली पंक्ति पर जाने से पहले अखिलेश से प्रदेश अध्यक्षता लेने के बाद शिवपाल यादव की ताजपोशी के बाद के घटनाक्रम पर भी गौर करना जरूरी है। अखिलेश यादव से प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी लेने के बाद उनके समर्थकों ने प्रदर्शन किया। शिवपाल यादव के समर्थक भी सड़क पर आ डटे। लेकिन कार्रवाई हुई अखिलेश टीम के बेहद भरोसेमंद सुनील सिंह यादव पर जो विधान परिषद सदस्यहैं। उनके अलावा आनन्द भदौरिया, मो. एबाद, बृजेश यादव, संजय लाठर, गौरव दुबे और दिग्विजय सिंह पर। इन सभी को समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। पूरे छह साल के लिए। सपा के उच्च पदस्त सूत्र बताते हैं कि ऐसा करने के पीछे सिर्फ एक ही मंशा थी, टीम अखिलेश को कमजोर करना। शिवपाल यादव ने इस आदेश को बीते वर्ष 19 सितंबर को जारी किया। उसके बाद वे लगातार अमर सिंह को बाहरी मानने को तैयार नहीं हुए, जबकि अखिलेश यादव और प्रो. रामगोपाल यादव ने सार्वजनिक मंचों से कई मर्तबा अमर सिंह को बाहरी करार दिया और सपा को अस्थिर करने का सूत्रधार ठहराया।

अब लौटते हैं पुन: प्रो. रामगोपाल यादव के बयान के अगले हिस्से पर। प्रो. रामगोपाल यादव ने सितंबर में कहा था, जिस तरह मुख्यमंत्री को बिना बताए अचानक उनसे प्रदेश अध्यक्षी ली गई, वह ही सपा में अंतरकलह का कारण बनी। यदि मुख्यमंत्री से कहा जाता तो वे स्वयं त्यागपत्र दे देते। इतना बखेड़ा ही खड़ा नहीं होता। उन्होंने खुलासा किया कि मुख्यमंत्री को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी से हटाए जाने वाली रात नेताजी का उनके पास फोन आया कि अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दीजिए और शिवपाल को यह पद दे दीजिए। नेताजी बेहद जल्दबाजी में यह पत्र हमसे लिखवाना चाह रहे थे। यह काम खुद को मुलायमवादी कहने वाले अमर सिंह का था जिनकी निष्ठा सिर्फ नेताजी से है, समाजवादी पार्टी से नहीं। चार महीने पहले प्रो. रामगोपाल यादव के इस बयान की पुष्टि एक जनवरी को मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के नवनियुक्त राष्टÑीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने की। उन्होंने अमर सिंह को सपा से निष्कासित किए जाने पर कहा, मुझे प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी से हटाए जाने के लिए नेताजी के पास उस वक्त बैठे एक बाहरी खासी जल्दबाजी में थे। जब नेताजी के कार्यालय पर आदेश टाइप होने में विलम्ब होने लगा तो उन्होंने अपने कार्यालय से टाइपराइटर मंगवा कर मेरे खिलाफ बेहद जल्दबाजी में आदेश टाइप करवाया। दो दिन पहले मो. आजम खां भी अमर सिंह का नाम लिए बगैर यह कह चुके हैं कि अमां जाने दें, हम ऐसे-वैसों की बात नहीं करते।

अमर सिंह के मामले पर समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, फिलहाल शिवपाल सिंह यादव और मुलायम सिंह यादव के अलावा पूरी समाजवादी पार्टी गृहयुद्ध के असल सूत्रधार के नाम और काम से बखूबी परिचित है। चार महीनों से अंतरकलह से जूझ रही पार्टी के भीतर सिर्फ इसी एक शख्स को निष्कासित करने की बात छोटे कार्यकर्ता से लेकर वरिष्ठ नेता ने दबी और खुली जुबान में की। रविवार को नरेश अग्रवाल ने अमर सिंह पर आरोप लगाकर इस बात की पुष्टि भी कर दी। समाजवादी पार्टी से रविवार को अमर सिंह के निष्कासन की घोषणा के बाद सभा स्थल पर तैरे उल्लास ने यह साफ कर दिया कि सपाई खेमा इस फैसले से कितना प्रसन्न है। ऐसे में अब यह सब जान गए हैं कि पूरे मामले की पटकथा का लेखक दरअसल है कौन?

 

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 500 के नए नोट के उड़ रहे प्रिंट! 4 दिन तक जेब में रखे, बाहर निकाले तो देखकर उड़ गए होश
2 लिफ्ट लेकर इंजीनियर को सुनसान जगह ले गई महिला, बंदूक की नोंक पर बनाई अश्लील क्लिप
3 विधायक का जनता को ‘न्यू ईयर गिफ्ट’, फ्री में यूज कर सकेंगे Wi-Fi