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सहारनपुर हिंसा: दलितों-ठाकुरों के घर-घर जाकर मिले योगी आदित्य नाथ के अफसर, मांगी माफी, सुनाए बुद्ध के किस्से

70 वर्षीय दलित महिला विमला से यूपी के गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्रा ने कहा, "हम सब इंसान हैं और हम सबका खून एक है।"

Saharanpur clashes, UP Home Secretaryसहारनपुर में हुई हिंसा के बाद घर-घर जाकर मिलते यूपी के गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्रा। (फोटो- गजेंद्र यादव)

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में राजपूतों और दलितों के बीच हुई हिंसा और मौतों के बाद राज्य के गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्रा और एडीजी (कानून-व्यवस्था) आदित्य मिश्रा शब्बीरपुर गांव के घर-घर जाकर लोगों से मुलाकात करके शांति बनाए रखने का अनुरोध कर रहे हैं। सहारनपुर में हिसा की शुुरुआत शब्बीरपुर गांव से ही हुई थी। गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्रा ने दोनों समुदायों के लोगों से पूरे मामले में पुलिस की नाकाम के लिए माफी भी मांगी। गृह सचिव ने दोनों समुदायों को आश्वासन दिया कि जिन पुलिस वालों ने अपनी दायित्व निभाने में कोताही बरती होगी उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

गांव के लोगों से बात करते हुए गृह सचिव मिश्रा ने कहा, “मैंने कई सरकारों के संग काम किया है। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि योगी (आदित्य नाथ) बात के पक्के हैं। उन्होंने मुझे आप लोगों की समस्याएं सुनने और उनका समाधान करने के लिए भेजा है।” गुरुवार (25 मई) को सुबह 11.30 बजे सरकारी अमला सहारनपुर पहुंचा। सरकारी अधिकारी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील के साथ ग्रामीणों को बुद्ध के जीवन से जुड़ी कहानियों के साथ ही अन्य धर्मों से जुड़े किस्से भी सुनाए। इन किस्सों में सहिष्णुता इत्यादि का महत्व रेखांकित किया गया था।

गांव के 73 वर्षीय राजपूत बुजुर्ग के घर पर बंधी गाय-भैंसों को देखकर एक सरकारी अधिकारी ने उनसे कहा कि वो गाय की रोज पूजा करने और उसका दूध पीने से वो 104 साल तक जी सकते हैं। गृह सचिव मिश्रा ने इस बात के लिए माफी भी मांगी की वो एक दिन पहले केवल दलितों से मिलकर चले गए थे। गृह सचिव मिश्रा ने कहा, “मेरी एक जरूरी बैठक थी और मुझे जाना था। आज मैं आप लोगों की शिकायतें सुनने आया हूं।”

गांववालों के संग बैठक के दौरान एक मौके पर राजपूत समुदाय के कुछ लोगों ने एक ग्राम प्रधान और भीम आर्मी के एक सदस्य को सबक सिखाने की भी बात कही।  मणि प्रसाद मिश्रा ने उन्हें शांत कराते हुए कहा, “भीम आर्मी को हम देख लेंगे।” कुछ ही देर बाद गृह सचिव स्थानीय दलित  से मिलने पहुंचे और “जय भीम” से लोगों का अभिवादन किया। 70 वर्षीय दलित महिला विमला से मणि प्रसाद मिश्रा ने कहा, “हम सब इंसान हैं और हम सबका खून एक है। आपके माध्यम से मैं दलित समाज से सरकारी की मदद की अपील करता हूं।”

जब कुछ दलितों ने गृह सचिव को पांच मई और 23 मई को हुई हिंसा के बाद प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई न करने की बात कही तो उन्होंने जवाब दिया, “अगर प्रशासन ने सही काम किया होता तो मुझे इस गांव में नहीं आना पड़ता। मैं यहां गलत को सही करने की आया हूं। अपने अनुभव से ये भी कहना चाहूंगा कि सरकार की मंशा गलत नहीं है।” मणि प्रसाद ने दलितों से राजपूतों के संग बैठक करने के लिए कहा जिसके लिए वो मान गए।

37 वर्षीय प्रदीप चौहान की हिंसा में मौत हो गई। उनके परिजनों ने गृह सचिव से हत्या के लिए भीम आर्मी को जिम्मेदार बताया। भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन सिंह ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया। विनय रतन सिंह ने कहा कि वो शांति बहाल करने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। एसपी (सिटी) प्रबल प्रताप सिंह ने बताया कि पुलिस मामले की जंच कर रही है और सभी कोणों से लोगों से पूछताछ कर रही है। एसपी सिंह के अनुसार हत्या में भीम आर्मी का हाथ होने की संभावना की भी पुलिस पड़ताल कर रही है।

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