rape survivor Canot abort says fast track court - Jansatta
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बलात्कार की शिकार नाबालिग को कोर्ट ने नहीं दी गर्भपात की इजाजत

एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 16 साल की रेप पीड़ित एक लड़की को गर्भपात करवाने की इजाजत नहीं दी है। लड़की को इस वक्त प्रेग्नेंट हुए 30 हफ्ते से ज्यादा का वक्त हो चुका है।

एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 16 साल की रेप पीड़ित को गर्भपात करवाने की इजाजत नहीं दी। (प्रतिकात्मक तस्वीर)

एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 16 साल की रेप पीड़ित एक लड़की को गर्भपात करवाने की इजाजत नहीं दी है। लड़की को इस वक्त प्रेग्नेंट हुए 30 हफ्ते से ज्यादा का वक्त हो चुका है। ऐसे में कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा कि इतने दिनों बाद गर्भपात की इजाजत नहीं दी जा सकती। यह फैसला बरेली के एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने किया है।

क्या था मामला: जिस लड़की को कोर्ट ने गर्भपात करने से रोका है वह 7 जून 2016 को प्रेग्नेंट होने की शिकायत लेकर बरेली के एक पुलिस स्टेशन पहुंची थी। उसके पिता ने पुलिस को बताया था कि जिसके घर पर वह काम करने जाती थी उसी घर के मालिक ने उसका बलात्कार किया था। शिकायत में कहा गया था कि शख्स ने पहले तो लड़की का बलात्कार किया और फिर शादी का झांसा देकर भी उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। पिता ने बताया था कि उसे दोनों के संबंधों के बारे में पहले कोई जानकारी नहीं थी।

कोर्ट ने क्यों मना किया: कोर्ट ने गर्भपात की मंजूरी नियमों को देखते हुए नहीं दी। दरअसल भारत में Termination of Pregnancy Act है। उसमें कहा गया है कि गर्भपात करवाना जायज तो है लेकिन उसके लिए कुछ शर्ते हैं। उनमें से एक प्रमुख शर्त यही है कि गर्भपात प्रेग्नेंट होने के 20 हफ्ते के अंदर करवाना होगा। इस वजह से लड़की को इजाजत नहीं मिली।

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