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उत्तर प्रदेश: प्रियंका की सक्रियता को लेकर कांग्रेस में ऊहापोह

समाजवादी पार्टी की तरफ से मुलायम सिंह यादव समेत तमाम नेता कांग्रेस नेतृत्व के संपर्क में हैं।
Author October 26, 2016 05:44 am
कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की बेटी प्रियंका गांधी वैसे तो राजनीति से दूर हैं लेकिन चुनाव में अक्सर वो अपनी पार्टी के लिए प्रचार करती नजर आती हैं।

कांग्रेस में तुरुप का इक्का मानी जाने वाली प्रियंका गांधी की उत्तर प्रदेश के चुनाव में सक्रियता को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। पार्टी अभी अपने उपाध्यक्ष राहुल गांधी की किसान यात्राओं और राहुल संदेश यात्राओं का विश्लेषण कर रही है, जिसमें प्रियंका गांधी भी बेहद रुचि ले रही हैं। दरअसल, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कोई गठबंधन खड़ा करने की योजना पर काम कर रही है। उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी की कवायद में कितना लाभ मिला है, उस हिसाब से गठबंधन के स्वरूप पर आगे बढ़ा जाएगा। इसकी तस्वीर साफ होने पर प्रियंका गांधी की भूमिका भी सामने आएगी।

गठबंधन को लेकर कवायद में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी- दोनों को ही टटोला जा रहा है। समाजवादी पार्टी की तरफ से मुलायम सिंह यादव समेत तमाम नेता कांग्रेस नेतृत्व के संपर्क में हैं। साथ में अजीत सिंह की पार्टी और कृष्णा पटेल के गुट को लेकर गठबंधन का खाका खींचा जा रहा है। लेकिन अभी सपा में चल रहे घमासान के मद्देनजर यह कवायद थम गई है। दूसरा विकल्प मायावती की बहुजन समाज पार्टी का है। भारतीय जनता पार्टी के धुंआधार प्रचार अभियान के मद्देनजर बसपा में अपना जनाधार संभाले रखने के लिए गठबंधन की जरूरत पर मंथन चल रहा है। एआइसीसी के कुछ शीर्ष नेताओं के साथ बसपा सुप्रीमो मायावती और उनके करीबी नेता सतीश चंद्र मिश्र की अनौपचारिक वार्ता हुई है। इस तरह की वार्ता से कोई स्वरूप निकले तो प्रियंका गांधी की भूमिका बढ़ाने को लेकर फैसला सामने आ सकता है। वजह स्पष्ट है, उत्तर प्रदेश के समर में कांग्रेस अपने तुरुप के इक्के को संभाल कर चलना चाहती है।

फिलहाल तो कांग्रेस यह फैसला नहीं कर पा रही कि प्रियंका गांधी की भूमिका अभी की तरह सीमित रहे या राहुल गांधी की तरह वे पूरे राज्य में सक्रिय हों। अभी उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर वे खुलकर सामने नहीं आई हैं। पर्दे के पीछे से वे कांग्रेस की रणनीति तैयार करने में मदद कर रही हैं। अभी मां सोनिया गांधी के लोकसभा क्षेत्र रायबरेली और भाई राहुल के क्षेत्र अमेठी के कार्यकर्ताओं के साथ वे नियमित बैठकें करती रही हैं। इधर, उन्होंने किसान यात्राओं और संदेश यात्राओं को लेकर दिल्ली पहुंची रिपोर्टों पर भी नजर गड़ाई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में उत्तर प्रदेश के प्रभारी गुलाम नबी आजाद की पहल पर वे चुनाव मैदान के सेनापतियों- राज बब्बर और शीला दीक्षित के साथ बैठक कर चुकी हैं। वे उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों से भी हाल में मिल चुकी हैं। गुलाम नबी आजाद कहते हैं, ‘पार्टी के नेता और कायकर्ता चाह रहे हैं कि प्रियंका गांधी अमेठी और रायबरेली से बाहर निकलें और पूरे राज्य में प्रचार करेंगे। उम्मीद है कि वे जल्द ही फैसला करेंगी और पार्टी के लिए समय निकालेंगी।’

प्रियंका गांधी इस तरह की मांग को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। फिलहाल, उन्होंने यही तय किया है कि 28 अक्तूबर के बाद से वे न सिर्फ रायबरेली और अमेठी के, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के नेताओं को मिलने का समय देंगी। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने उनके सामने पूरे उत्तर प्रदेश में 150 जनसभाएं करने का प्रस्ताव रखा है। जनसभाओं की शुरूआत करने के लिए तीन तारीखों का प्रस्ताव है- 31 अक्तूबर, 19 नवंबर या नौ दिसंबर। लेकिन इसपर वे कुछ भी नहीं बोल रही हैं। न तो इस बाबत कांग्रेस अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की कोई राय ही एआईसीसी नेताओं के सामने आई है।

 

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