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आउटर पर देर तक खड़ी रही ट्रेन, तेज गर्मी से 5 महीने के मासूम ने तोड़ दिया दम

रेलवे का कहना है कि रेलवे अस्पताल के डॉक्टरों को एस-8 कोच में भेजा गया था। लेकिन तब तक परिवार वाले डफरिन के लिए निकल चुके थे, वहां डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। पीड़ित मोहम्मद बिहार के कैमूर के रहने वाले हैं। घटना के बाद पीड़ित परिवार मुगलसराय के रास्ते अपने घर के लिए चला गया।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद में शुक्रवार को क्षमता से अधिक लोगों से भरी रेल में अत्यधिक गर्मी से एक छह माह की बच्ची की मौत हो गई। बच्ची ब्रह्मपुत्र एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में अपने माता-पिता के साथ जा रही था। पीड़ित के परिजनों का आरोप है कि रेल का कोच यात्रियों से भरा पड़ा था और अत्यधिक गर्मी में दम घुटने से बच्ची की मौत हो गई। रेलगाड़ी असम के डिब्रूगढ़ से दिल्ली जा रही थी। बच्ची की मौत से व्यथित परिजनों का आरोप है कि रेलगाड़ी को इलाहाबाद आउटर पर दो घंटे से अधिक समय तक रोक दिया गया जिससे बच्ची की हालत खराब हो गई। सह-यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि चिकित्सा सहायता के अनुरोध के बावजूद, ट्रेन टिकट कलेक्टर समेत किसी ने भी उनकी जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया। जब रेल इलाहाबाद पहुंची, तो यात्रियों ने शोर मचाया, जिसके बाद रेलवे अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया।

रेलवे का कहना है कि रेलवे अस्पताल के डॉक्टरों को एस-8 कोच में भेजा गया था। लेकिन तब तक परिवार वाले डफरिन के लिए निकल चुके थे, वहां डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। पीड़ित मोहम्मद बिहार के कैमूर के रहने वाले हैं। घटना के बाद पीड़ित परिवार मुगलसराय के रास्ते अपने घर के लिए चला गया। एक रेलवे अधिकारी ने कहा, “बच्चा एक नॉन एसी कोच में था, इसलिए एसी फेल होने या कूलिंग नहीं होने का सवाल ही नहीं था। जैसा कि कहा गया ट्रेन को आउटर पर नहीं रोका गया था, पिछली रात को तूफान की वजह से ट्रेनों का रुट प्रभावित हुआ था।

रिपोर्ट के मुताबिक एक ही परिवार के सदस्य 22 वर्षीय मुर्तुजा, 15 वर्षीय मकसूद एवं अन्य परिजन एस-6, एस-7 और एस-8 में यात्रा कर रहे थे। उत्तर मध्य रेलवे के पीआरओ अमित मालवीय ने बताया कि ये यात्रीगण बिहार के भभुआ के निवासी हैं। इन्होंने सुबह 8:38 बजे इलाहाबाद जंक्शन पर डिप्टी एसएस कार्मिशयल से संपर्क कर बताया कि बच्चे की तबियत बहुत खराब है। मालवीय ने बताया कि डिप्टी एसएस ने तुरंत रेलवे अस्पताल को सूचित किया और 8:49 बजे डाक्टर महेश स्टेशन पर पहुंचे, लेकिन यात्रीगण बच्चे को लेकर डफरिन अस्पताल चले गए जहां पर डाक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया।

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