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देखते ही देखते जुर्म की दुनिया का बादशाह बन बैठा मुन्ना

हत्या, लूट, डकैती की वारदातें कर जरायम की दुनिया में दाखिल हुआ प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी उत्तर प्रदेश के भाड़े के शूटरों का राबिनहुड था।

अब तक 40 हत्याएं कर चुके अपराध के इस बेहद शातिर दिमाग शख्स ने भाजपा के पूर्व विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कर सुर्खियां बटोरी थीं।

हत्या, लूट, डकैती की वारदातें कर जरायम की दुनिया में दाखिल हुआ प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी उत्तर प्रदेश के भाड़े के शूटरों का राबिनहुड था। जौनपुर के पूरेदयाल गांव के रहने वाले मुन्ना ने 17 साल की छोटी सी उम्र में पहला अपराध किया था। उसके बाद सनसनीखेज वारदातों को अंजाम देने में वह कभी नहीं हिचका। अब तक 40 हत्याएं कर चुके अपराध के इस बेहद शातिर दिमाग शख्स ने भाजपा के पूर्व विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कर सुर्खियां बटोरी थीं। जौनपुर के दबंग गजराज सिंह की सरपरस्ती स्वीकार करने के बाद मुन्ना बजरंगी ने 1984 में लूट के दरमियान एक व्यापारी की हत्या कर दी। इस वारदात को अंजाम देने के कुछ समय बाद मुन्ना बजरंगी ने अपने आका गजराज सिंह के कहने पर जौनपुर से भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने ताबड़तोड़ कई सनसनीखेज वारदातों को अंजाम दिया। 1990 में उसने माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी का गैंग ज्वाइन कर लिया। मऊ से संचालित होने वाले इस गैंग ने मुख्तार अंसारी के राजनीति में दाखिल होने के बाद अपनी ताकत कई गुना बढ़ा ली। अब मुन्ना बजरंगी का दखल सरकारी ठेका-पट्टा लेने में भी हो गया।

एसटीएफ में रहने के दौरान मुन्ना बजरंगी की गिरफ्तारी की कोशिशों में लगे प्रदेश के एक वरिष्ठ आइपीएस कहते हैं कि पूर्वांचल के सरकारी ठेकों में वसूली के कारोबार पर मुख्तार काबिज थे। उसी बीच तेजी से उभरे भाजपा नेता कृष्णानंद राय मुख्तार अंसारी के लिए चुनौतियां पेश करने लगे। मुन्ना बजरंगी को कृष्णानंद राय को रास्ते से हटाने का काम सौंपा गया। भाजपा विधायक कृष्णानंद राय को ठिकाने लगाने के लिए मुन्ना बजरंगी कोशिशें करने लगा। इसी बीच 29 नवंबर, 2005 को मुन्ना ने कृष्णानंद राय की दिनदहाड़े हत्या कर दी। उसने अपने साथियों के साथ लखनऊ राजमार्ग पर कृष्णानंद राय के काफिले पर एके-27 से करीब चार सौ गोलियां बरसार्इं। इस गोलीबारी में कृष्णानंद राय के अलावा उनके साथ चल रहे छह लोग भी मारे गए। पोस्टमार्टम के दौरान हर मृतक के शरीर से 60 से सौ गोलियां निकाली गर्इं।

इस घटना के बाद से मुन्ना बजरंगी के चर्चे आम हो गए। जरायम की दुनिया में उसकी तूती बोलने लगी। मुन्ना बजरंगी पर सात लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था। उसके बाद एसटीएफ और उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुन्ना बजरंगी की गिरफ्तारी की कोशिशें तेज कीं तो वह मुंबई भाग गया। यहीं उसने सी व डी क्लास की पिक्चरों में जरायम की दुनिया से कमाया गया पैसा लगाया। 29 अक्तूबर, 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुंबई के मलाड इलाके से मुन्ना बजरंगी को गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस का तब कहना था कि दिल्ली के विवादास्पद एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजबीर सिंह की हत्या में मुन्ना बजरंगी का हाथ था। जिस कदर बागपत की जेल में मुन्ना बजरंगी की सोमवार तड़के हत्या की गई, उससे प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार सवालों के घेरे में है। इसकी बड़ी वजह 10 दिन पहले मुन्ना की पत्नी की लखनऊ में की गई प्रेस वार्ता है जिसमें उन्होंने एसटीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी समेत कुछ सफेदपोशों पर मुन्ना की हत्या की साजिश रचने का संदेह जताया था।

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