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उत्तर प्रदेश: नगरपालिका का संपत्ति रजिस्टर गायब, करोड़ों की जमीन पर भूमाफिया का कब्जा

शाहजहांपुर की नगर पालिका अपनी निजी संपत्ति में कई जिले में सबसे आगे मानी जाती है। लेकिन नगर पालिका की अरबों की संपत्ति के कागज अचानक लापता हो गए हैं। आरोप है कि पालिका के अधिकारी ने संपत्ति के रजिस्टर गायब करवा दिया है जिसके बाद करोड़ों की जमीनों पर कब्जे शुरू हो गए हैं। […]
Author शाहजहांपुर | October 3, 2016 05:22 am
(File Pic)

शाहजहांपुर की नगर पालिका अपनी निजी संपत्ति में कई जिले में सबसे आगे मानी जाती है। लेकिन नगर पालिका की अरबों की संपत्ति के कागज अचानक लापता हो गए हैं। आरोप है कि पालिका के अधिकारी ने संपत्ति के रजिस्टर गायब करवा दिया है जिसके बाद करोड़ों की जमीनों पर कब्जे शुरू हो गए हैं। नगर पालिका का संपत्ति रजिस्टर कड़ी सुरक्षा के बीच से लापता हो गया हैं।

संपत्ति के रजिस्टर के लापता होते ही नगर पालिका क्षेत्र की करोड़ों की संपत्ति को कोई ब्योर पालिका के पास नहीं है। संपत्ति रजिस्टर में 1945 के बाद की सारी संपत्तियों का ब्योरा दर्ज था जिसमें बेशकीमती जमीने, तालाब और भवन शामिल है। आरोप है कि एक साजिश के तहत नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने एक सपा नेता के इशारे पर ये रजिस्टर गायब करवाया है। संपत्ति रजिस्टर गायब होने के बाद से नगर पालिका की संपत्तियों पर भूमाफियाओं ने कब्जा करना शुरू कर दिया है। जब एक सामाजिक कार्यकर्ता ने इस मामले की शिकायत राज्यपाल से की खुलासे के बाद नगर पालिका में हड़कंप मचा हुआ है। शिकायतकर्ता की माने तो नगर पालिका की करोड़ों की संपत्तियों को खुर्द बुर्द करने का खेल शुरू हो गया है और नगर पालिका की जमीनों पर तेजी से कब्जा किया जा रहा है।

नगर पालिका की संपत्ति का रजिस्टर बेहद महत्त्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन जिस तरह से इस संपत्ति को गायब किया है, वो एक बड़ी साजिश की तरफ इशारा कर रही है। वहीं आरोपों से घिरे नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी का कहना है कि संपत्ति रजिस्टर लापता होने की शिकायत पुलिस में भेज दी गई है और सर्वे रजिस्टर के आधार पर खोई हुई संपत्ति का ब्योरा इकट्ठा किया जा रहा है। नगर पालिका की कई संपत्तियों पर भूमाफिया पहले से ही कब्जा जमाएं बैठे हैं लेकिन संपत्ति रजिस्टर के गायब होने के बाद से अब भूमाफियां

उसी संपत्ति के मालिक बन गए है। हालांकि इस मामले में डीएम विजय किरण आनंद ने नगर पालिका पहुंच कर जब संपत्ति रजिस्टर मांगा तो नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी से इस रजिस्टर के बारे में जानकारी की तो वह अपनी बगले छाकने लगे। नगर पालिका इस रजिस्टर गायब होने की असलीयत पता चलता इससे पहले ही डीएम विजय किरण आनंद का तबादला करा दिया गया। तब से रजिस्टर गायब होने के मामले में फिर से पर्दा पड़ गया।

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