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UP: मंत्री बनते ही गायत्री मुलायम के चरणों में, पप्पू निषाद कैबिनेट से बाहर, राजकिशोर की नहीं हुई वापसी

समारोह मेंं अखिलेश के करीबी समझे जाने वाले राज्यसभा सांसद और मुलायम के चचेरे भाई राम गोपाल यादव की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही।

Author लखनऊ | September 27, 2016 04:10 am
मुलायम सिंह यादव।

उत्तर प्रदेश के दागी पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रजापति को सोमवार को फिर अखिलेश यादव की कैबिनेट में शामिल कर लिया गया। राज्य के 2017 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले संभवत: यह आखिरी कैबिनेट विस्तार है। गायत्री को दोबारा मंत्री बनाने की विपक्षी दलों ने कड़ी निंदा की है। गायत्री के अलावा तीन अन्य मंत्रियों को शामिल किया गया जबकि छह राज्य मंत्रियों को पदोन्नत किया गया है। राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल राम नाईक ने गायत्री, मनोज पांडेय, शिवाकांत ओझा और जियादुदीन रिजवी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। दो हफ्ते पहले बर्खास्त गायत्री को राज्य कैबिनेट में शामिल करने के फैसले को एक सामाजिक कार्यकर्ता ने चुनौती दी थी। रिजवी जून में हुए कैबिनेट विस्तार में शपथ नहीं ले पाए थे क्योंकि वे उस समय विदेश में थे। अखिलेश सरकार 2012 में सत्ता में आई थी। तब से अब तक यह आठवां विस्तार है। अब उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद में अधिकतम 60 मंत्री हैं।

दिलचस्प बात यह है कि गायत्री के साथ बर्खास्त किए गए राज किशोर सिंह वापसी करने में नाकाम रहे। राज्य मंत्री लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद को अखिलेश कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री रहे रियाज अहमद, यासर शाह और रविदास मेहरोत्रा को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। राज्यमंत्री अभिषेक मिश्रा, नरेंद्र वर्माऔर शंखलाल माझी को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।अखिलेश मंत्रिपरिषद में अब 32 कैबिनेट मंत्री, नौ स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और 19 राज्यमंत्री हैं। शपथ ग्रहण समारोह में गायत्री का सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के चरणों में बैठकर फोटो खिंचवाना बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी 8दिन भर समाचार चैनलों और सोशल मीडिया पर छाया रहा। गायत्री ने शपथ लेने के पहले और बाद दोनों ही मौकों पर मुलायम के पैर छुए। शपथ लेने के बाद वह अखिलेश के पैर छूने को भी झुके।

समारोह के बाद मुलायम ने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने गायत्री को पुन: शामिल करने का सुझाव दिया था और मुख्यमंत्री ने उसे मान लिया। ‘गायत्री पिछड़ी जाति का नेता है और मेहनती व पार्टी का वफादार सिपाही है।’ समारोह मेंं अखिलेश के करीबी समझे जाने वाले राज्यसभा सांसद और मुलायम के चचेरे भाई राम गोपाल यादव की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही। शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद बसपा, भाजपा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने गायत्री को दोबारा मंत्री बनाए जाने की कड़ी निंदा की। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा, ‘भूतत्व एवं खनन मंत्री के रूप में भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आरोप में कुछ दिन पहले बर्खास्त गायत्री प्रसाद प्रजापति को दोबारा मंत्री बना कर सपा सरकार के मुखिया (अखिलेश) ने न केवल अपने आपको एक अत्यंत ही कमजोर व यूटर्न लेने वाला मुख्यमंत्री साबित किया है बल्कि यह भी जगजाहिर हो गया है कि इस सपा सरकार में खराब कानून व्यवस्था के साथ साथ यहां भ्रष्टाचार भी बेलगाम जारी रहेगा।’

मायावती ने कहा, ‘प्रदेश की जनता यह समझ नहीं पा रही है कि जिस मंत्री को अभी हाल ही में खनन विभाग में जबर्दस्त भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त किया गया था और जिस विभाग में व्यापक भ्रष्टाचार के मामले पर हाई कोर्ट ने सीबीआइ जांच का आदेश दिया है तो उसे फिर किस मजबूरी में दोबारा मंत्री बना दिया गया।’उधर, भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, ‘‘भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरे गायत्री प्रजापति की पुन: मंत्रिपरिषद में वापसी भ्रष्टाचार को खुलेआम स्वीकृति प्रदान करना है।’’उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच के आदेश दिये, उसे पुन: मंत्री पद देना भ्रष्टाचार को मजबूती प्रदान करना है।कांग्रेस नेता संजय सिंह ने संभल में गायत्री की दोबारा वापसी पर हैरत जताते हुए कहा कि गंभीर आरोपों में घिरे मंत्री हटाए जाने के बाद अचानक अखिलेश यादव को स्वीकार कैसे हो गए।

शपथ ग्रहण समारोह से 48 घंटे पहले सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने राज्यपाल को अर्जी देकर गायत्री को मंत्रिपरिषद में शामिल करने पर आपत्ति जताई। नूतन ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा सीबीआइ जांच के आदेश दिये जाने के बाद भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में गायत्री को मंत्री पद से हटा दिया गया था और अब उन्हें फिर शामिल किया जा रहा है।

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