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मायावती ने दी सफाई, कहा- अभद्र भाषा का जवाब लेने के लिए लगाए दयाशंकर की मां-बेटी पेश होने के नारे

मायावती ने तंज और चेतावनी भरे लहजे में कहा ‘‘36 घंटे घंटों की मीयाद बीतने के बावजूद दयाशंकर सिंह को गिरफ्तार नहीं किया गया।

Author लखनऊ | July 24, 2016 3:13 PM
मायावती ।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने अपने खिलाफ भाजपा के निष्कासित नेता दयाशंकर सिंह द्वारा की गयी कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में पिछले दिनों लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान अपने कार्यकर्ताओं की कथित आपत्तिजनक नारेबाजी पर सफाई दी और इसे लेकर उठे प्रतिवाद को ‘दूषित मानसिकता’ की निशानी बताया। सिंह द्वारा की गयी कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ बसपा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन में उनके परिवार की महिलाओं के प्रति कथित आपत्तिजनक नारेबाजी किये जाने को लेकर उठे विवाद के बीच मायावती ने खुद कमान सम्भालते हुए यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा ‘‘धरना प्रदर्शन में ‘दयाशंकर सिंह, अपनी मां, बहन बेटी को पेश करो’ के नारे लगाये गये थे, उन्होंने इन नारों को दूषित मानसिकता से देखकर मीडिया में प्रचारित कराया है।’’

उन्होंने पार्टी महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी का हवाला देते हुए कहा ‘‘जिस अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल दयाशंकर ने किया, क्या उनकी मां, बहन और बेटी उसे सही ठहराएंंगी। हमारे कार्यकर्ताओं ने इसका जवाब लेने के लिये ही उनकी मां, बहन और बेटी को पेश करने को कहा था। नसीमुद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि धरना प्रदर्शन में दयाशंकर की मां, पत्नी और बेटी के लिये कोई अपशब्द नहीं कहे गये।’’ मायावती ने सिंह की मां को ‘सलाह’ देते हुए कहा ‘‘अच्छा होता अगर दयाशंकर सिंह की मां ने अपनी पोती और बहू के आत्मसम्मान को लेकर शिकायत दर्ज कराने के साथ यह भी कहा होता कि एक दलित की बेटी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाले दयाशंकर के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई करायी जाए। उन्होंने ऐसा नहीं किया जिससे आम माताओं बहनों के प्रति उनकी दोहरी मानसिकता जाहिर होती है। उनसे जो कराया जा रहा है वह भाजपा की शह पर दयाशंकर को बचाने के लिये किया जा रहा है।’’

मायावती ने कहा कि दयाशंकर सिंह की मां और पत्नी मीडिया में जो भी बयान दे रही हैं वह भाजपा की शह पर दयाशंकर के कृत्य से ध्यान हटाने की कोशिश है। मैं अपने कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देना चाहती हूं कि उन्होंने अपनी मुखिया के खिलाफ अपशब्दों के विरोध में प्रदर्शन किया। उनका यह संघर्ष जरूर रंग लाएगा।’’ बसपा अध्यक्ष ने दावा किया कि गुजरात के ऊना कस्बे में हाल में कथित गोरक्षकों द्वारा दलितों की बर्बरतापूर्ण पिटाई मामले को संसद के अंदर और बाहर जोरदार तरीके से उठाये जाने से परेशान होकर भाजपा के नेताओं ने साजिश के तहत इस घटना से ध्यान हटाने के लिये उनके खिलाफ दयाशंकर सिंह से राजनीतिक तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करवाया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से बसपा का ध्यान हटाने के लिये षड्यंत्र के तहत ऐसा किया गया।

मालूम हो कि भाजपा के तत्कालीन प्रान्तीय उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने पिछले हफ्ते मायावती को लेकर एक कथित आपत्तिजनक बयान दिया था जिसके बाद उन्हें भाजपा से निकाल दिया गया था और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके विरोध में बसपा कार्यकर्ताओं ने गत गुरूवार को सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर राजधानी में प्रदर्शन किया था, जिसमें सिंह की बेटी तथा उनके परिवार की महिला सदस्यों के खिलाफ कथित अपशब्दों का प्रयोग किया गया था। सिंह की 36 घंटे में गिरफ्तारी करने के प्रशासन के आश्वासन पर प्रदर्शन समाप्त हुआ था। इस मामले में गत शुक्रवार को हजरतगंज कोतवाली में बसपा मुखिया मायावती, महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी और प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर आदि के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी।

मायावती ने सिंह की गिरफ्तारी ना होने के लिये भाजपा और सत्तारूढ़ सपा की मिलीभगत को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी अब सिंह की गिरफ्तारी की मांग पर समय खराब करने के बजाय सपा और भाजपा का पर्दाफाश करने और जनहित में अगले महीने से प्रदेश में ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ विशाल महारैलियां आयोजित करेगी, जिन्हें वह खुद सम्बोधित करेंगी। इसकी शुरूआत 21 अगस्त को आगरा से होगी। बसपा मुखिया ने इस प्रकरण में अपने खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई को ‘संसद की अवमानना’ करार देते हुए कहा ‘‘मुकदमे में मुझ पर संसद में गलत बातें कहने का आरोप लगाया गया है।

इस सम्बन्ध में मेरा यह कहना है कि देश के हर पुलिस अधिकारी को यह मालूम होना चाहिये कि संविधान के अनुच्छेद 105 में यह प्रावधान है कि हर सांसद को संसद में अपनी हर बात रखने का अधिकार है। अनुच्छेद 105 :2: में यह भी स्पष्ट कहा गया है कि संसद में कही गयी बात पर सम्बन्धित सांसद के खिलाफ किसी भी अदालत में कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। मगर इसके बावजूद हजरतगंज कोतवाली में मेरे खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ, यह संसद की अवमानना भी है। भाजपा ने सपा पर दबाव डालकर यह गलत काम करवाया है।’’

मायावती ने तंज और चेतावनी भरे लहजे में कहा ‘‘36 घंटे घंटों की मीयाद बीतने के बावजूद दयाशंकर सिंह को गिरफ्तार नहीं किया गया। अगर भाजपा के दबाव में आकर प्रदेश सरकार खासकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी बुआ के दोषी दयाशंकर सिंह को गिरफ्तार करके सख्त सजा नहीं दिलवायी तो प्रदेश में बसपा सरकार के बनते ही इस प्रकरण की समयबद्ध निष्पक्ष जांच करायी जाएगी और सख्त कानूनी कार्रवाई भी जरूर की जाएगी। साथ ही सपा सरकार में हुए उत्पीड़न के अन्य मामलों में भी सख्त कार्रवाई होगी।’’

बसपा अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गोरखपुर एम्स के शिलान्यास और अर्से से बंद पड़े उर्वरक कारखाने को दुबारे खोलने के कार्य की शुरूआत करने को राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि विधानसभा चुनाव नजदीक आते देख ऐसा किया गया है।

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