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यूपी: योगी सरकार का फैसला, मंदिर हो या मस्जिद बिना इजाजत नहीं बजेगा लाउडस्पीकर

राज्य सरकार को यह छूट है कि वह एक कैलेन्डर वर्ष में अधिकतम 15 दिनों के लिए सांस्कृतिक या धार्मिक अवसरों पर रात 10 बजे से रात 12 बजे के बीच ध्वनि प्रदूषण कम करने की शर्तों के साथ लाउडस्पीकर बजाने की छूट दे सकती है।

Author January 8, 2018 9:06 AM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिये सार्वजनिक स्थानों पर लगे स्थायी लाउडस्पीकरों के बारे में आज विस्तृत दिशा निर्देश जारी किये हैं। प्रमुख सचिव (गृह) अरविंद कुमार ने आज बताया, ‘‘ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) के प्राविधानों का कड़ाई से अनुपालन करने के संबंध में उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने इस संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश जारी किये हैं।’’ उच्च न्यायालय ने बीते 20 दिसंबर को राज्य में ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण में नाकामी को लेकर कड़ी नाराजगी जताई थी और राज्य सरकार से पूछा था कि क्या प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों, मस्जिदों, मंदिरों, गुरुद्वारों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगे लाउडस्पीकर संबंधित अधिकारियों से इजाजत लेने के बाद लगाये गये हैं? सरकार ने इस संबंध में प्रशासन से इजाजत लेने के लिए 15 जनवरी आखिरी तिथि निर्धारित की है । इसके बाद 20 जनवरी से लाउडस्पीकर हटवाने का कार्य आरंभ कर दिया जायेगा। सरकार ने 10 पृष्ठ का लाउडस्पीकर के सर्वेक्षण का प्रोफार्मा जारी किया है। इसमें स्थायी रूप से लाउडस्पीकर लगाने की इजाजत लेने का फॉर्म और जिन लोगों ने लाउडस्पीकर लगाने की इजाजत नहीं ली है, उनके खिलाफ की गयी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी देने को कहा गया है।इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने 20 दिसंबर को राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए यह पूछा था कि क्या प्रदेश के मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों, गिरिजाघरों एवं अन्य सभी सरकारी स्थानों पर बजने वाले लाउडस्पीकरों के लिए अनुमति ली गयी है?

अदालत की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश के धार्मिक स्थलों एवं अन्य सरकारी स्थानों पर बिना सरकारी अनुमति के लाउडस्पीकर बजाने पर सख्त ऐतराज जताया था। अदालत ने प्रमुख सचिव गृह एवं उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन को यह सारी सूचना अपने व्यक्तिगत हलफनामे के जरिये एक फरवरी तक पेश करने का आदेश दिया था। अदालत ने दोनों अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि ऐसा नहीं करने की स्थिति में दोनों अधिकारी अगली सुनवायी के समय व्यक्तिगत रूप से हाजिर रहेंगें। स्थानीय वकील मोतीलाल यादव की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन की खंडपीठ ने 20 दिसंबर को यह आदेश जारी किया था। पारित किया था। ध्वनि प्रदूषण नियमन एवं नियंत्रण नियम, 2000 में यह प्रावधान है कि ऑडिटोरियम, कांफ्रेंस रूम, कम्यूनिटी हॉल जैसे बंद स्थानों को छोड़कर रात 10 बजे से प्रात: छह बजे तक लाउडस्पीकरों का प्रयोग नहीं किया जायेगा। हांलाकि राज्य सरकार को यह छूट है कि वह एक कैलेन्डर वर्ष में अधिकतम 15 दिनों के लिए सांस्कृतिक या धार्मिक अवसरों पर रात 10 बजे से रात 12 बजे के बीच ध्वनि प्रदूषण कम करने की शर्तों के साथ लाउडस्पीकर बजाने की छूट दे सकती है।

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