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दो छात्रों पर राष्‍ट्रद्रोह का केस, कश्‍मीरी छात्रों की धमकी- आरोप वापस नहीं लिए तो छोड़ देंगे एएमयू

पूर्व में यूनिवर्सिटी द्वारा छात्र वसीम अय्युब मलिक और अब्दुल हसीब मीर को सस्पेंड कर दिया गया था। आरोप था कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों द्वारा मारे गए आतंकी मन्नान बशीर वानी के लिए कैंपस में प्रार्थना की थी।

Author October 14, 2018 11:48 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फोटो सोर्स इंडियन एक्सप्रेस)

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में पढ़ रहे जम्मू-कश्मीर के दो छात्रों के खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज होने के एक दिन बाद इसी राज्य के छात्रों ने धमकी दी है कि अगर दोनों छात्रों के खिलाफ आरोप वापस नहीं लिए गए तो वह 17 अक्टूबर को कैंपस छोड़ देंगे। यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी है। छात्रों ने यह धमकी एक पत्र के माध्यम से दी है। इसमें जम्मू-कश्मीर के छात्रों के हस्ताक्षर हैं। ये पत्र पॉक्टर मोहसिन खान को भेजा गया है। एएमयू के पब्लिक रिलेशन इंचार्ज एम सैफी किदवई ने बताया, ‘मैंने पॉक्टर से बात की है, जिन्होंने छात्रों द्वारा पत्र मिलने की पुष्टि की है।’ मामले में जब संडे एक्प्रेस ने किदवई से पूछा कि क्या पत्र को प्रमाणिक माना जा सकता है कि इसे कश्मीरी छात्रों ने ही लिखा है। इसपर उन्होंने जवाब दिया कि ऐसा माना जाता है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस राज्य के 950 छात्र पढ़ते हैं।

इससे पहले यूनिवर्सिटी द्वारा छात्र वसीम अय्युब मलिक और अब्दुल हसीब मीर को सस्पेंड कर दिया गया था। आरोप था कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों द्वारा मारे गए आतंकी मन्नान बशीर वानी के लिए कैंपस में प्रार्थना की थी। वानी की सोशल मीडिया में आतंकियों संग तस्वीरें वायरल होने से पहले वह कैंपस में पीएचडी का छात्र था। पूर्व में उसकी जो तस्वीरें वायरल हुईं उनमें दावा किया गया कि वह आंतकी संगठन में हिजबुल मुजाहीदिन में शामिल हो गया। इसपर अलीगढ़ पुलसिस ने छात्र मलिक, मीर और अन्य छात्रों के खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज किया।

दूसरी तरफ कश्मीरी छात्रों द्वारा यूनिवर्सिटी प्रशासन को जो पत्र दिया गया है उसमें लिखा है, ‘यूनिवर्सिटी के छात्र केनेडी हॉल लॉन में घाटी में उभरती स्थिति पर चर्चा कर रहे थे और शांतिपूर्वक एक-दूसरे के बीच बात कर रहे थे। कोई भी प्रार्थना या कोई प्रासंगिक गतिविधि नहीं की गई थी। एएमयू के प्रॉक्टर के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया था। इसी दौरान कुछ गैर कश्मीरी छात्रों ने लाठियों से हमला कर दिया।’

पत्र में आगे लिखा गया है कि ‘कश्मीरी छात्र मनगढ़ंत आरोपों की कड़ी निंदा करते हैं। मामले में छात्रों के खिलाफ सस्पेंशन और कारण बताओ नोटिस तुरंत वापस नहीं लिया गया तो हम जम्मू-कश्मीर के छात्र 17 अक्टूबर को सुरक्षा और बचाव के चलते कैंपस छोड़ देंगे।’

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