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मिठाइयों में मिलावट से बेकरी उद्योग की ‘दिवाली’

त्योहारी मौसम में बढ़ी मांग पूरी करने के लिए मिठाइयों में मिलावट के कारण उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं की वजह से इस दीपावली पर बेकरी उद्योग के लिए अभूतपूर्व..

Author लखनऊ | Updated: November 11, 2015 1:40 AM

त्योहारी मौसम में बढ़ी मांग पूरी करने के लिए मिठाइयों में मिलावट के कारण उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं की वजह से इस दीपावली पर बेकरी उद्योग के लिए अभूतपूर्व उछाल की उम्मीद रोशन हुई है। इस बार उपभोक्ताओं का रुझान चॉकलेट के बजाय बेकरी उत्पादों की तरफ बढ़ा है। वे अब इसे बेहतर विकल्प मानते हुए हाथोंहाथ ले रहे हैं।

उद्योग मंडल एसोचेम के एक ताजा सर्वे के मुताबिक मिठाइयों में भारी मिलावट की आशंका के कारण परंपरागत दुग्ध उत्पादों की मांग में 50 फीसद तक की भारी गिरावट आई है। लेकिन यह गिरावट पिछले कुछ वर्षों के दौरान धीरे-धीरे बढ़ी है और चॉकलेट ने उसके विकल्प के तौर पर जगह बनाई थी। लेकिन अपेक्षाकृत सस्ते और विविधतापूर्ण किस्मों के कारण अब बेकरी उत्पाद पहली पसंद बनकर उभर रहे हैं।

एसोचेम के राष्ट्रीय महासचिव डीएस रावत ने बताया कि मिठाइयों में सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले तत्त्वों की मिलावट के डर और कम चिकनाई वाली चीजें खाने की बढ़ती इच्छा के कारण दुग्ध उत्पादों की मांग में 50 फीसद तक गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि उपभोक्ताओं के रुझानों पर गौर करें तो इस दीपावली पर विभिन्न किस्मों के मेवायुक्त बिस्कुट, केक और कम कैलोरी वाले अन्य बेकरी उत्पादों की मांग में करीब 30 फीसद की वृद्धि होने का अनुमान है। इससे देश में बेकरी उत्पादों के करीब 25 हजार करोड़ रुपए का कारोबार और फलने-फूलने की प्रबल संभावना है।

उन्होंने कहा कि भारत का परंपरागत मिठाई बाजार करीब 50 हजार करोड़ रुपए का है लेकिन अधिकांशत: असंगठित यह बाजार दूध, मक्खन, चीनी व सूखे मेवे जैसे कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के खतरों से हमेशा जूझता है। यही वजह है कि त्योहारों के दौरान बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए कई मिठाई कारोबारी कीमतें नीचे रखने के लिए मिलावट का सहारा लेते हैं।

एसोचेम के सोशल डेवलपमेंट फाउंडेशन की ओर से पिछले दो हफ्तों के दौरान देशभर में करीब सौ प्रमुख मिष्ठान प्रतिष्ठानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए गए इस अध्ययन के मुताबिक त्योहारों और मिठाइयों का भावनात्मक रिश्ता है, लिहाजा ब्रांडेड मिठाइयों के कारोबार में चमक बरकरार है। सर्वे के दायरे में लिए गए ज्यादातर मिष्ठान प्रतिष्ठानों के मालिकों या प्रतिनिधियों ने माना कि मिठाइयों की मांग में 25 से 50 फीसद तक की गिरावट हुई है।

सर्वेक्षण के मुताबिक ज्यादातर मिठाई उत्पादकों ने बताया कि उन्होंने मिठाइयों में ज्यादा मेवा और कम खोया (मावा) डालना शुरू किया है। लेकिन इससे उनकी उत्पादन लागत 15 से 20 फीसद तक बढ़ गई है। कुछ मिष्ठान उत्पादकों का तो यह भी कहना है कि बिस्कुट और अन्य बेकरी उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए अपने ब्रांड से बिस्कुट बेचना शुरू किया है।

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