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सच्ची घटना पर बनी है फिल्म ‘एक कश्मीरी पंडित की डायरी’

कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का दर्द कितना था? किस कदर अपनी ही सरजमीं पर कश्मीरी पंडित बेगाने थे? ऐसी हकीकत से पर्दा उठाती है एक कश्मीरी पंडित की डायरी।

प्रतीकात्मक चित्र

कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का दर्द कितना था? किस कदर अपनी ही सरजमीं पर कश्मीरी पंडित बेगाने थे? ऐसी हकीकत से पर्दा उठाती है एक कश्मीरी पंडित की डायरी। फिल्म के अंत में गुमनाम कश्मीरी पंडित की 1990 में गोली मारकर हत्या कर दी जाती है। यह फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है। इस फिल्म के इंटर प्रोड्यूसर हैं अश्विनी भटनागर और निर्देशक हैं सुरेश भटनागर। फिल्म में अदाकारा दीप्ति नवल ने अभिनय किया है।

फिल्म ‘एक कश्मीरी पंडित की डायरी’ एक ऐसे किरदार के इर्द-गिर्द घूमी है जिसे किसी ने देखा नहीं। फिल्म में दीप्ति नवल के हाथों में उसी कश्मीरी पंडित की खुली हुई डायरी है जिसे आवाज दी है जेपी पांडेय ने। डायरी में जिक्र है कि कैसे कश्मीर से कश्मीरी पंडितों को 1980 के दशक में बाहर चले जाने को मजबूर किया गया। जो नहीं भागे, उन्हें किस तरह से कत्ल किया गया। अज्ञात शख्स की डायरी में तीन हजार कश्मीरी पंडितों के कत्ल का जिक्र है।

डायरी में अपने पुश्तैनी घर में रह रहा कश्मीरी पंडित लिखता है, मुझे कश्मीर से चले जाने के लिए कहा जा रहा है। जान से मारने की बार-बार धमकी दे रहे हैं यहां रह रहे लोग। मेरे पड़ोसी भी अब मुझसे बात नहीं करते। मेरे मुसलमान दोस्तों से मेरा साथ कब का छूट गया है। लखनऊ के कॉफी हाउस में आयोजित इस कार्यक्रम में मशहूर अदाकार अनिल रस्तोगी, डा. दाऊजी गुप्ता, थियेटर से जुड़े तमाम बड़े लोग और शहर के संभ्रांत वर्ग के नुमाइंदे उपस्थित थे।

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