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अपना वादा निभाएं अखिलेश यादव, मुलायम सिंह को पार्टी की कमान सौंपे वापस: अपर्णा यादव

अखिलेश ने जनवरी में वादा किया था कि विधानसभा चुनावों के बाद वह सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद नेताजी को सौंप देंगे

पति प्रतीक यादव के साथ अपर्णा यादव। (Photo Source: Indian Express Archive)

यूपी चुनावों में बुरी तरह हार का सामना करने वाली समाजवादी पार्टी में एक बार फिर जंग शुरू होती नजर आ रही है। इस बार की पार्टी संयोजक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव ने आवाज उठाई है। अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, अपर्णा यादव ने कहा कि उनके चुनाव प्रचार को पार्टी के भीतरी लोगों ने ही खराब किया था। अपर्णा यादव ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी में सब कुछ ठीक हो जाएगा। इसके अलावा उन्होंने अपने पति के बड़े भाई व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से अपना वादा निभाते हुए पार्टी की कमान मुलायम सिंह को वापस करने की मांग भी की।

अखिलेश के छोटे भाई प्रतीक यादव की पत्नी और इसी साल विधानसभा चुनावों में खड़ी हुई अपर्णा ने कहा कि “अखिलेश यादव ने चुनाव से पहले जनवरी महीने में वादा किया था कि विधानसभा चुनावों के बाद वह सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद नेताजी को सौंप देंगे। अखिलेश कहते हैं कि वह अपनी बातों के पक्के हैं और वादों को पूरा करते हैं। अब, मुझे लगता है कि उन्हें वादा पूरा करना चाहिए।” बता दें कि जनवरी माह में समाजवादी पार्टी में तकरार के समय अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष बन गए थे और उन्होंने अपने पिता से तीन महीने का समय मांगा था। उन्होंने यह भी कहा था कि वह विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी की कमान मुलायम सिंह को लौटा देंगे। अपर्णा यादव ने कहा कि फिलहाल उनका परिवार ही उनके लिए सब कुछ है। उन्होंने कहा कि जब तक नेताजी रहेंगी तब तक उन्हीं की बातें सर्वमान्य होंगी। उन्हें बुरा लगा कि नेताजी के साथ ऐसा किया गया, वह दुखी हैं। अपर्णा ने कहा कि उन्हें नहीं पता भविष्य में क्या हो, लेकिन वह अपने परिवार को एकजुट देखना चाहती है।

परिवार की फूट में फंस गई, वरना जीत जाती चुनाव

26 साल की अपर्णा लखनऊ कैंट से समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी थीं, लेकिन उन्हें बीजेपी की रीता बहुगुणा जोशी के हाथों हार नसीब हुई थी। अपर्णा ने कहा था वह यादव परिवार में फूट के बीच में आ गईं, वरना वह जीत जातीं। उन्होंने कहा कि मेरी कश्ती वहां डूबी, जब किनारा साफ नजर आ रहा था। अपनों के द्वारा दिया गया दर्द बहुत गहरा होता है, लेकिन मैंने अच्छा चुनाव लड़ा। मैंने उस सीट से चुनाव लड़ा, जिस पर समाजवादी पार्टी कभी चुनाव नहीं जीती है।

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