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दलित वोट पर बीजेपी की नजर, अंबेडकर जयंती पर दलितों के साथ ‘जन भोज’ करेंगे भाजपा नेता

साल 2016 में विधानसभा चुनाव से पहले भी बीजेपी की ओर से दलित भोज का आयोजन किया गया था। मोहनलाल गंज से बीजेपी के सांसद कौशल किशोर ने दलितों के लिए लंच का आयोजन किया था।

Author नई दिल्ली। | April 8, 2017 12:22 PM
भोज में शामिल होते बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह। (Express Photo by Vishal Srivastav)/FILE PHOTO

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली रिकॉर्ड जीत के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का एजेंडा दलितों वोट बैंक को पार्टी की तरह मजबूती से खड़ा करना है। दलितों को पार्टी से जोड़ने के लिए बीजेपी ने यूपी में दलितों के साथ सामूहिक भोज के आयोजन की तैयारी की। बीजेपी की ओर से ‘जन भोज कार्यक्रम’ का आयोजन 14 अप्रैल (बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती के दिन) को किया जाएगा। बीजेपी के इस आयोजन को बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की मुखिया मायावती से छिटके दलित वोट बैंक को अपनी ओर किए जाने और अपने कोर वोटबैंक में दलितों को शामिल करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर बीजेपी 6 अप्रैल (अपने स्थापना दिवस) से कार्यक्रमों की सीरीज की शुरुआत की जो कि 14 अप्रैल को जन भोज कार्यक्रम के साथ खत्म होगी। यूपी बीजेपी के प्रवक्ता चंद्र मोहन ने मेल टुडे से कहा कि इससे पहले भी हम बाबा साहब अंबेडकर की जंयती मनाते आए हैं और पूरे देश में बाबा साहब की मूर्तियों का माल्यार्पण करते आए हैं। इस बार हमने फैसला किया है कि अपना संदेश लोगों तक पहुंचाएंगे। इस बार हमने मंडल स्तर पर ‘सामुदायिक भोज कार्यक्रम’ का आयोजन किया है। इस कार्यक्रम में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लोग और नेता शामिल होंगे।

साल 2016 में विधानसभा चुनाव से पहले भी बीजेपी की ओर से दलित भोज का आयोजन किया गया था। मोहनलाल गंज से बीजेपी के सांसद कौशल किशोर ने दलितों के लिए लंच का आयोजन किया था। इसमें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। बीजेपी के इस भोज के बाद बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने अमित शाह और भाजपा पर निशाना साधा था। मायावती ने इस लंच को राजनीतिक नाटक करार देते हुए कहा था कि कांग्रेस नेता भी इस तरह की हरकतें कई बार कर चुके हैं।

हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई। वहीं, मायावती को तगड़ा झटका लगा, उनके कोर दलित वोट बैंक में बीजेपी सेंधमारी करने में कामयाब रही। सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े दलितों के बीजेपी के साथ आने का सबसे कारण प्रधानमंत्री उज्जवला योजना रही। जिसके तहत गरीबों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए।

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