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मुलायम सिंह ने अमर सिंह को बनाया सपा का राष्ट्रीय महासचिव, लिखी दो लाइन की चिट्ठी

अमर सिंह को समाजवादी पार्टी (सपा) का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है।

मुलायम सिंह यादव ने यह चिट्ठी लिखी थी।

अमर सिंह को समाजवादी पार्टी (सपा) का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। उन्हें यह पद समाजवादी पार्टी के प्रमुखमुलायम सिंह यादव ने दिया है। 60 साल के अमर सिंह का जन्म आजमगढ़ में हुआ था। वह राजपूत समाज से आते हैं। मुलायम सिंह यादव की तरफ से 20 सितंबर को लिखा गया, ‘प्रिय अमर सिंह, आपको समाजवादी पार्टी महामंत्री नियुक्त किया जाता है। मुझे आशा है आप आने वाले वक्त में उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव और समाजवादी पार्टी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।’ हाल ही में अखिलेश ने इशारों-इशारों में अमर सिंह को ‘बाहरी व्यक्ति’ तक कह दिया था।

अमर सिंह की हाल ही में सपा में वापसी हुई है। इसके बाद मुलायम सिंह ने उन्‍हें राज्‍य सभा के लिए चुना था। जया प्रदा और अमर सिंह को फरवरी 2010 में सपा से निकाल दिया गया था। दोनों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की गई थी। अमर सिंह ने बाद में राष्‍ट्रीय लोक मंच नाम से पार्टी बनाई थी। लेकिन पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई।

अमर सिंह की सपा में वापसी की कहानी भी चंद्रकांता संतति का किस्सा बन गई थी। ‘न तो को और न मो को ठौर’ जुमला एकदम सटीक बैठ रहा था। अमर सिंह ने किस दल में ठौर ठिकाना नहीं तलाशा सपा से बाहर होने के बाद। पर किसी ने भाव नहीं दिया। मजबूरी में लोकसभा चुनाव रालोद उम्मीदवार की हैसियत से आगरा की फतेहपुर सीकरी सीट से लड़ना पड़ा। हार तो तय ही थी, पर हसरत तो पूरी हो ही गई। कितना जनाधार है, पता चल गया। उसके बाद तो सपा के कद्दावर मुसलिम चेहरे आजम खान के लिए उनकी लानत-मलानत करना आसान हो गया। दोनों में अदावत जगजाहिर है। जब भी मुलायम या अखिलेश से मिलते हैं, अटकलें शुरू हो जाती हैं। पिछली दफा सैफई महोत्सव में पहुंचे। पत्रकारों ने मुलायम से पूछा कि कब घर वापसी होगी किसी जमाने के उनके हनुमान की। मुलायम भी मंजे खिलाड़ी ठहरे। पहलवानी करते हुए सियासत में आए थे। सो, दाव-पेंच में माहिर हैं। फरमाया कि अमर सिंह उनके दिल में रहते हैं। पर दल में कब आएंगे, इसका खुलासा नहीं किया था। हालांकि बीच में एकाध बार मुलायम ने उनकी तारीफ में कसीदे भी पढ़े थे। कहा था कि अमर सिंह भरोसे लायक साथी थे। अब पार्टी में वैसा कोई भरोसे लायक नेता नहीं।

सपा में अमर सिंह की वापसी में अखिलेश यादव सबसे बड़ा रोड़ा बने थे। इटावा में मुलायम ने कहा था कि अमर सिंह उनके दिल में रहते हैं। कन्नौज में पत्रकारों ने इसी सवाल पर अखिलेश को घेरा तो जवाब मिला- दिल और दल में कौन बड़ा है, इसका फैसला आप लोग कर लें। अखिलेश को अमर गाथाएं अभी तक याद हैं। वे उन्हें पार्टी में लेकर आरोपों की बौछार क्यों कराएं? पार्टी से निकले थे तो सारी मर्यादाएं तोड़ी थीं। क्या-क्या नहीं कहा था मुलायम और उनके कुनबे के बारे में। नेताजी के राज खोलने की धमकी तक दी थी। अगले साल विधानसभा चुनाव है। शायद इसीलिए अखिलेश के दिल की मुलायम ने नहीं सुनी। न ही आजम खान की नाराजगी की परवाह की और एक दिन अमर की वापसी का फरमान सुना दिया। अब जब उन्‍हें सपा का राष्‍ट्रीय महासचिव बनाया गया है तो वह भी ऐसे दौर में जब अखिलेश ने कहा था- किसी बाहरी को बीच में नहीं आने दूंगा। सब मानते हैं कि अखिलेश के लिए ”बाहरी” अमर सिंह ही हैं। पर मुलायम ने इस बार भी उनकी न सुनी।

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