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और बढ़ी सपा की कलह: शिवपाल ने मुलायम और अखिलेश से मुलाकात के बाद छोड़ा मंत्री पद, मुख्यमंत्री ने किया इस्तीफा नामंजूर

प्रो रामगोपाल यादव ने अखिलेश सरकार और समाजवादी पार्टी में आए इस भूचाल का सूत्रधार अमर सिंह को बताया था। लेकिन शिवपाल ने कहा था कि अमर सिंह बाहरी नहीं हैं वे हमारे घर के ही हैं।

Author लखनऊ | September 16, 2016 1:08 AM
टिकट बंटवारे को लेकर एक्शन मूड में मुलायम सिंह यादव

एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में गुरुवार को समाजवादी पार्टी का संकट और गहरा गया और कुनबे का कलह मिटाने की मुलायम सिंह की कोशिश काम नहीं आई। दो दिन पहले अहम मंत्रालय छीन लिए जाने के बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल सिंह यादव ने गुरुवार (15 सितंबर) रात अखिलेश मंत्रिमंडल और समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया। मुलायम से शाम करीब आधे घंटे की मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात करने पहुंचे शिवपाल ने उनसे बीस मिनट की बातचीत के एक घंटे बाद त्यागपत्र दे दिया। मुख्यमंत्री ने रात करीब पौने ग्यारह बजे शिवपाल का त्यागपत्र नामंजूर कर दिया। लेकिन शिवपाल अपने त्यागपत्र पर अड़ गए हैं। इससे पहले प्रो रामगोपाल यादव ने अखिलेश सरकार और समाजवादी पार्टी में आए इस भूचाल का सूत्रधार अमर सिंह को बताया था। लेकिन शिवपाल ने कहा था कि अमर सिंह बाहरी नहीं हैं वे हमारे घर के ही हैं। शिवपाल ने कहा था कि पार्टी में नेताजी की ही चलेगी और सबको उनका आदेश मानना पड़ेगा।

बहरहाल समाजवादी पार्टी इस वक्त सरकार और संगठन, दोनों में बड़ी राजनीतिक अस्थिरता का शिकार है। गुरुवार को लखनऊ पहुंचने और उसके एक दिन पहले दिल्ली में शिवपाल यादव से बैठक करने के बाद भी मुलायम सिंह यादव इस अस्थिरता को दूर नहीं कर पाए। दोपहर बाद से लखनऊ में तेजी से बदले राजनीतिक घटनाक्रम की परिणति शिवपाल यादव के त्यागपत्र के तौर पर हुई। उन्होंने मंत्री पद से त्यागपत्र का फैक्स मुख्यमंत्री को भेजा। जबकि समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के पद से त्यागपत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को भेज दिया है।

शिवपाल यादव के समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से समाजवादी परिवार में शुरू हुए शीत युद्ध के आकार लेने में अभी शुक्रवार का दिन शेष है। शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के संसदीय दल की बैठक है। इस बैठक में इस पूरे विवाद की जड़ को तलाशने और कार्रवाई पर अहम फैसलों का एलान होगा। सूत्र बताते हैं कि बैठक में मुलायम सिंह यादव अमर सिंह पर बड़ा एलान कर सकते हैं। ऐसा इस लिए कहा जा रहा है कि गुरुवार को प्रो रामगोपाल यादव ने यह बात सार्वजनिक कर दी कि समाजवादी पार्टी और अखिलेश सरकार पर मंडराने वाले संकट के बादल के सूत्रधार अमर सिंह हैं।

फिलहाल शिवपाल सिंह यादव के सरकार और संगठन से त्यागपत्र देने के बाद समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सन्न हैं। वे यह नहीं तय कर पा रहे हैं कि आखिर करें क्या, किसके पक्ष में खड़े हों, किसे अपना नेता मानें? गुरुवार रात करीब पौने दस बजे शिवपाल यादव ने अपना त्यागपत्र फैक्स से मुख्यमंत्री को भेजा। वहीं पीसीएफ के चेयरमैन और उनके पुत्र आदित्य यादव ने भी अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। हालांकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव के त्यागपत्र को नकार दिया है। आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि शिवपाल यादव का फैक्स मिलते ही मुख्यमंत्री भावुक हो गए और उन्होंने अपने चाचा का त्यागपत्र तत्काल अस्वीकार कर दिया।

उत्तर प्रदेश की राजधानी में तेजी से घट रहे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच शिवपाल यादव अखिलेश सरकार से दिए गए अपने त्यागपत्र पर कायम हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के पद से शिवपाल यादव के त्यागपत्र पर फैसला करेंगे। शिवपाल अपने बड़े भाई और पार्टी सुप्रीमो की बात का सर्वाधिक आदर करते हैं। शुक्रवार का दिन समाजवादी पार्टी और अखिलेश सरकार के भविष्य के लिहाज से बेहद अहम है। इसी दिन यह फैसला होगा कि आखिर शिवपाल, यादव परिवार में किस कद और पद पर कायम रहेंगे? अमर सिंह का समाजवादी पार्टी में भविष्य क्या होगा? वे कौन से मुद्दे अब अखिलेश सरकार के पास बचेंगे, जिसको आधार बनाकर वह उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के रण में उतरेगी।

गौरतलब है कि कुछ महीनों से गंभीर मतभेदों से दो-चार मुलायम परिवार का द्वंद्व 13 सितंबर को उस समय बढ़ गया था, जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश के मुख्य सचिव दीपक सिंघल को हटा दिया था। सिंघल अखिलेश के चाचा कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव के करीबी समझे जाते हैं। जैसे को तैसा की तर्ज पर मुलायम ने बेटे अखिलेश से प्रदेश सपा अध्यक्ष का पद छीनकर शिवपाल को दे दिया, लेकिन कुछ ही घंटों में मुख्यमंत्री अखिलेश ने शिवपाल से लोक निर्माण, सिंचाई और सहकारिता जैसे महत्त्वपूर्ण विभाग छीन लिए थे।

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