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गरीब किसानों के लिए थी अखिलेश यादव सरकार की योजना, आजम खान समेत सपा मंत्रियों और नेताओं के रिश्तेदारों को मिला ज्यादातर लाभ

पशुपालन विभाग के डायरेक्टर स्तर के अधिकारी ने बताया कि उन्हें सपा से जुड़े लोगों को योजना के तहत लाभ देने का आदेश "ऊपर से" मिला था।

Author Updated: April 17, 2017 12:53 PM
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव। (Photo Source-PTI)

उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्ववाली समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान चलायी गयी एक योजना का सबसे ज्यादा लाभ मंत्रियों और सपा नेताओं को ही मिला। सीएम रहते हुए अखिलेश यादव ने किसानों की बेहतरी के लिए पूरे तामझाम के साथ दूध डेयरी शुरी करने के लिए कामधेनू योजना शुरू की थी। यूपी पशुपालन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार को बताया कि इस योजना  के तहत प्रदेश में खोली गयी 500 डेयरियों में से शायद ही ऐसी कोई हो जिसका समाजवादी पार्टी से कोई संबंध नहीं हो।

इस अधिकारी ने अखबार से कहा कि अगर जांच करायी जाए तो पता चल जाएगा कि इस योजना का लाभ केवल अखिलेश सरकार के मंत्रियों, नेताओं और पदाधिकारियों को मिला है। अधिकारी के अनुसार इस योजना के तहत जरूरी 30 लाख रुपये का निवेश करना आम किसान के मुश्किल है इस वजह से केवल सत्ताधारी सपा के प्रभावशाली लोगों को इसका लाभ मिला। अखबार ने दावा किया है कि उसके पास इस योजना के तहत लाभ पाने वालों की सूची है जिसमें अखिलेश यादव कैबिनेट के मंत्रियों, उनके रिश्तेदारों, सपा के पदाधिकारियों और विधायकों के नाम हैं।

रिपोर्ट के अनुसार इस योजना के तहत लाभ पाने वाले समाजवादी पार्टी नेताओं में पूर्व मंत्री आजम खान, अंबिका चौधरी, बीना भारद्वाज के रिश्तेदारों समेत कई पूर्व समाजवादी सांसद और विधायक, पदाधिकारी शामिल हैं।  पशुपालन विभाग के डायरेक्टर स्तर के अधिकारी ने टीओआई को बताया कि उन्हें सपा से जुड़े लोगों को योजना के तहत लाभ देने का आदेश “ऊपर के अधिकारियों” से मिला था। इस योजना का उद्घाटन 2013 में किया गया था। इसके तहत केवल जर्सी या होल्सटीन फाइसियन गायें और हरियाणा या पंजाब से मुर्रा भैंसें खरीदी जा सकती थीं।

योजना के तहत किसानों को तीन वर्गों- कामधेनु, मिनि कामधेनु और माइक्रो-कामधेनु के तहत क्रमशः 1.21 करोड़ रुपये, 50 लाख रुपये और 25 लाख रुपये के निवेश से डेयरी शुरू करने का प्रावधन किया गया। सभी वर्गों में 25 प्रतिशत राशि प्रोजेक्ट शुरू करने वाले को लगानी होती है और 75 प्रतिशत राशि सरकार ब्याज रहित लोन के रूप में देती है। यानी 1.21 करोड़ के कामधेनु प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए करीब 30 लाख रुपये के निवेश की जरूरत होती है।

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