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अखिलेश यादव ने साधा ‘बाहरी’ पर निशाना, कहा- शिवपाल जानते हैं इसकी असल वजह

अखिलेश की शिकायत को बेहद गंभीरता से लेते हुए नेताजी ने अमर सिंह को अपने आवास पर बुला कर उनसे इस पर खेद जताने के निर्देश दिए थे।
Author लखनऊ | September 15, 2016 00:50 am
अखिलेश सरकार का मंत्रीमंडल विस्तार

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में बीते दो दिनों से हो रहे राजनीतिक घटनाक्रमों का मूल ठहराया है। अपने सरकारी आवास पर मुख्यमंत्री ने इशारों में अमर सिंह का नाम लिए बगैर बड़ा सवाल दागा कि घर के बाहर के लोग हमें सचेत करेंगे तो पार्टी भला कैसे चलेगी? ये परिवार का नहीं, सरकार का झगड़ा है और शिवपाल यादव इसकी असल वजह से वाकिफ हैं।  इस बीच अमर सिंह ने कहा कि वे बाहरी नहीं हैं। अखिलेश उनके लिए बेटे की तरह हैं। आज तक उसके खिलाफ खिलाफ उन्होंने कुछ नहीं कहा। बाहरी बताए जाने पर अखिलेश के बयान पर सिंह ने कहा,  ‘आप कितना भी कहें, मैं मानने को तैयार नहीं। आज तक उसने मेरे बारे में एक शब्द नहीं कहा।’ बीते दो दिनों के दौरान मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी कहे जाने वाले गायत्री प्रसाद प्रजापति और राजकिशोर सिंह को किनारे करने के बाद समाजवादी पार्टी और उसकी सरकार में आई सियासी सुनामी की असल वजह की पहचान बताए बिना अखिलेश ने उसे आज सार्वजनिक कर दिया। मुख्यमंत्री आवास पर फोन करने पर भी मेरी बात अखिलेश से नहीं कराई जाती, अमर सिंह के इस बयान से आहत बताए जा रहे अखिलेश ने इसकी शिकायत खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से उसी वक्त की थी।

समाजवादी पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि अखिलेश की शिकायत को बेहद गंभीरता से लेते हुए नेताजी ने अमर सिंह को अपने आवास पर बुला कर उनसे इस पर खेद जताने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद कानपुर में एक निजी टेलीवीजन चैनल के कार्यक्रम में अमर सिंह ने अपने इस वक्तव्य पर खेद भी जताया था। इसके अलावा अखिलेश को इस बात का भी बेहद मलाल है कि उनके चाचा सार्वजनिक तौर पर उनकी छवि मुख्यमंत्री से इतर खींचने की कई बार कोशिश कर चुके हैं। सपा के सूत्र बताते हैं कि इस बीच शिवपाल सिंह यादव का इटावा में बीते दिनों मंत्रिपद छोड़ने का बयान देना भी मुख्यमंत्री को नागवार गुजरा क्योंकि ऐसा कर शिवपाल ने मुख्यमंत्री की छवि को प्रभावित करने की कोशिश की। उनके इस बयान पर एक माह पहले समाजवादी पार्टी के लखनऊ स्थित प्रदेश मुख्यालय पर मुलायम सिंह यादव को कहना पड़ा कि कुछ लोग शिवपाल को सरकार और सपा, दोनों में काम नहीं करने दे रहे हैं। अखिलेश यादव की मौजूदगी में नेताजी का यह बयान भी मुख्यमंत्री को इस वजह से अखर गया क्योंकि बिना कुछ किए नेताजी का बयान उन्हें भी कटघरे में खड़ा करता नजर आ रहा था।

समाजवादी पार्टी में लंबे समय से चल रही आपसी खींच-तान पर बुधवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बहुत हद तक विराम लगा दिया। उन्होंने दो टूक कहा, उनके परिवार में किसी भी तरह की न ही कोई लड़ाई है और न ही किसी तरह का वैचारिक मतभेद। यह लड़ाई सरकार की है। इस लड़ाई की वजह क्या है? मुख्य सचिव दीपक सिंघल को आखिर क्यों हटाया गया? ऐसे तमाम सवाल जो बीते दो दिनों से उत्तर प्रदेश की सियासी फिजा में तैर रहे हैं, का जवाब शिवपाल सिंह यादव को बखूबी पता है। शिवपाल जानते हैं, इन राजनीतिक घटनाक्रमों का असल कारण क्या है?  मुख्यमंत्री ने कभी-कभी कुछ निर्णय अपने से भी ले लिए जाते हैं, का बयान देकर एक बात सरकार और समाजवादी पार्टी में स्पष्ट करने की कोशिश की कि उत्तर प्रदेश के जिन दो मंत्रियों की रुख्सती हुई, मुख्य सचिव को हटाने और शिवपाल सिंह यादव से आठ विभाग वापस लेने का फैसला विशुद्ध रूप से उनका था। इस बयान की वजह भी साफ है। साढ़े चार सालों तक बंधनों में बंधे रहने के बावजूद समय-समय पर सियासी अपयश हासिल करते-करते अब वे उकता गए हैं। तीन अक्तूबर से अखिलेश यादव को समाजवादी विकास रथ पर सवार होकर उत्तर प्रदेश नापने निकलना है। विधानसभा चुनाव सर पर हैं। ऐसे में वे मास्टर स्ट्रोक खेलने की मुद्रा में हैं। अपने इस मनोभाव का इजहार भी आज मुख्यमंत्री ने किया लेकिन ऐन वक्त पर उसे वापस ले लिया।

लोक निर्माण विभाग का प्रभार हाथ आने के बाद बुधवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने सरकारी आवास पांच कालीदास मार्ग पर दोपहर साढ़े बारह बजे एक कार्यक्रम रखा था। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की खस्ताहाल सड़कों के मरम्मतीकरण के काम का शुभारंभ करना था। यदि इस कार्यक्रम को मुख्यमंत्री ने निरस्त न किया होता तो पूरे प्रदेश में वे यह संदेश बेहद आसानी से दे सकते थे कि आखिर जिस मंत्री के पास लोक निर्माण विभाग का जिम्मा था, वह ही उत्तर प्रदेश की खस्ताहाल सड़कों के लिए जिम्मेदार है। लेकिन ऐन वक्त पर इस कार्यक्रम को निरस्त कर अखिलेश ने साफ कर दिया है कि वे सरकार चलाने के हर हुनर में दक्ष हैं। बस संबंधों की मर्यादा और रिश्तों के बंधन उन्हें कोई भी कदम उठाने से अब भी रोक रहे हैं।

 

 

 

 

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