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कॉमन सिविल कोड-तीन तलाक पर मुस्लिम लॉ बोर्ड ने मोदी सरकार को घेरा

बोर्ड ने कहा कि नायडू ने तीन तलाक के विषय पर विधि आयोग द्वारा जारी की गयी प्रश्नावली को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया है।

Author लखनऊ | Published on: October 16, 2016 2:00 PM
ऑल इंडिया मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड।

ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक और समान नागरिक संहिता को लेकर खुद पर राजनीति करने का इल्जाम लगाने वाले केन्द्रीय मंत्री वेंकैया नायडू पर पलटवार करते हुए रविवार (16 अक्टूबर) को कहा कि नायडू इस मामले पर कुतर्क कर रहे हैं और केंद्र सरकार तीन तलाक की आड़ में समान नागरिक संहिता के मुद्दे को मजबूती देने के लिए विधि आयोग का ‘इस्तेमाल’ कर रही है। बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने कहा कि नायडू ने तीन तलाक के विषय पर विधि आयोग द्वारा जारी की गयी प्रश्नावली को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया है। यह बिल्कुल गलत और भ्रमित करने वाला है। तीन तलाक और विधि आयोग की प्रश्नावली के मुद्दे पर बोर्ड द्वारा राजनीति किए जाने के नायडू के आरोप का जवाब देते हुए उन्होंने कहा ‘हमने कोई राजनीति नहीं की है। हमने तो सिर्फ आवाज उठायी है कि मजहबी कानून को चुनौती ना दी जाए और इसके लिये जो संवैधानिक व्यवस्था है, उससे छेड़छाड़ ना की जाए।’

समान नागरिक संहिता को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए मौलाना रहमानी ने कहा कि सरकार ने ही विधि आयोग को लिखकर भेजा है कि वह समान नागरिक संहिता को लागू करने के उपायों के बारे में राय दे। ऐसे में नायडू का यह कहना कि समान नागरिक संहिता और तीन तलाके के मुद्दे अलग-अलग है, बिल्कुल झूठ और गलत है। दरअसल, केन्द्र की भाजपा सरकार अपने चुनाव घोषणापत्र में समान नागरिक संहिता लागू करने के अपने वादे को अमली जामा पहनाने के लिये विधि आयोग का ‘इस्तेमाल’ कर रही है।

मौलाना रहमानी ने कहा कि उनके इस बयान के पीछे का तर्क यह है कि विधि आयोग ने समान नागरिक संहिता को लेकर जो प्रश्नावली जारी की है, उसमें मुद्दे को बेहद सफाई से समान नागरिक संहिता की तरफ ले जाया गया है। उस प्रश्नावली में साफ कहा गया है कि भारत में ‘डायरेक्टिव प्रिंसिपल 44’ की बुनियादी कानूनी जरूरत है। इसी से जाहिर होता है कि विधि आयोग ने जो किया है, वह सरकार के एजेंडे को पूरा करने के लिए ही किया है।

मौलाना रहमानी ने बताया कि मुस्लिम पर्सनल ला को लेकर जहां तक सरकार की नीयत का सवाल है, तो हाल में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि मुस्लिम पर्सनल ला में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा और उसके कुछ ही दिन बाद केन्द्र सरकार ने तीन तलाक की शरई व्यवस्था खत्म करने के लिये उच्चतम न्यायालय में अपना हलफनामा दाखिल कर दिया। इससे सरकार की कथनी और करनी में फर्क जाहिर हो जाता है। उन्होंने बताया कि आगामी 18 से 20 नवम्बर के बीच कोलकाता में बोर्ड की एक बैठक होगी, जिसमें तीन तलाक को लेकर पैदा हुई सूरतेहाल और विधि आयोग के प्रकरण पर भी व्यापक चर्चा होगी। विस्तृत एजेंडा बाद में जारी होगा।

मालूम हो कि केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने शुक्रवार (14 अक्टूबर) को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड पर समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर जनप्रतिक्रिया जानने के विधि आयोग के कदम का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि तीन तलाक और समान नागरिक संहिता दो अलग-अलग मुद्दे हैं और बोर्ड इन्हें एक-दूसरे से जोड़कर भ्रम फैला रहा है।

इस बीच, बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि केंद्र सरकार एक छोटे से मसले को बेवजह तूल दे रही है। शरई अदालतों में तीन तलाक के मामलों की संख्या कुल मामलों के दो प्रतिशत के बराबर भी नहीं है। तीन तलाक के जो भी मसले होते हैं, उनकी पूरी जांच पड़ताल के बाद ही कोई फैसला दिया जाता है। यह हमेशा से होता आया है। अब अचानक यह मामला क्यों उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बोर्ड विधि आयोग का बहिष्कार नहीं कर रहा है, बल्कि इस मामले पर मुसलमानों की असल भावनाओं को आयोग तक पहुंचाने के लिए हस्ताक्षर अभियान चला रहा है। इसकी रिपोर्ट आयोग के पास भी भेजी जाएगी।

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