3 arrested for sexual harassment in girl shelter house - बालिका संरक्षण गृह में यौन उत्पीड़न के आरोप में तीन गिरफ्तार - Jansatta
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बालिका संरक्षण गृह में यौन उत्पीड़न के आरोप में तीन गिरफ्तार

बिहार के मुजफ्फरपुर सरीखा कांड देवरिया में भी सामने आया है। देवरिया के संवासिनी गृह से रविवार की रात भाग कर पुलिस थाने पहुंची दस वर्षीय बालिका ने पुलिस को आपबीती सुनाई तो प्रदेश सरकार ने कार्रवाई के आदेश दिए।

Author , लखनऊ/ देवरिया , 6 अगस्त | August 7, 2018 6:33 AM
प्रदेश की महिला और परिवार कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने इस मामले पर मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद बताया कि योगी के आदेश पर देवरिया के जिलाधिकारी सुजीत कुमार को हटा दिया गया है।

बिहार के मुजफ्फरपुर सरीखा कांड देवरिया में भी सामने आया है। देवरिया के संवासिनी गृह से रविवार की रात भाग कर पुलिस थाने पहुंची दस वर्षीय बालिका ने पुलिस को आपबीती सुनाई तो प्रदेश सरकार ने कार्रवाई के आदेश दिए। देवरिया के पुलिस अधीक्षक के अनुसार,पीड़िता ने बताया कि संरक्षण गृह में रोज शाम पांच बजे के बाद कुछ लोग आते हैं और बालिकाओं को लेकर चले जाते हैं। इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया के जिलाधिकारी का तबादला कर दिया है। साथ ही अपर मुख्य सचिव महिला कल्याण के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम को देवरिया भेजा है।

पूरे मामले पर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था आनंद कुमार ने बताया कि देवरिया के मां विन्ध्यवासिनी महिला और बालिका संरक्षण गृह में अनियमितताओं की शिकायतें मिली हैं। इस मामले की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव महिला कल्याण रेणुका कुमार और अपर पुलिस महानिदेशक महिला हेल्पलाइन अंजू गुप्ता के नेतृत्व में जांच टीम राजकीय वायुयान से देवरिया भेजी गई है। वे पूरे मामले की जांच कर एक दिन में अपनी रिपोर्ट शासन को सौपेंगी। इस बीच प्रदेश सरकार ने जिला प्रोबेशन अधिकारी अभिषेक पांडेय को निलंबित कर दिया है। साथ ही पूर्व में तैनात रहे जिला प्रोबेशन अधिकारी नीरज कुमार और अनूप सिंह के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने जिलों के महिला व बाल संरक्षण गृह का निरीक्षण कर 12 घंटे में उसकी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को उपलब्ध कराएं।

इस बाबत देवरिया के एसपी कहते हैं, रविवार की रात को पुलिस ने जब संरक्षण गृह में छापेमारी की कार्रवाई की तो वहां के रजिस्टर में 42 लड़कियों के नाम दर्ज मिले। लेकिन मौके पर उन्हें 24 लड़कियां ही मिलीं। इस मामले में संरक्षण गृह की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी और उसके पति मोहन को गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं एडीजी एलओ कहते हैं कि संरक्षण गृह में बीस नाबालिग लड़कियां और तीन लड़के मिले हैं। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों के विरुद्ध आईपीसी की धारा 188, 189, 353, 343, 370, 354ए, 504, 506, पास्को एक्ट की धारा 7 व 8 और किशोर न्याय कानून की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

उत्तर प्रदेश सरकार के पास मौजूद देवरिया नारी संरक्षण गृह की रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि गड़बड़ियों की शिकायत मिलने पर जून वर्ष 2017 में इसकी मान्यता समाप्त कर दी गई थी। सीबीआइ ने भी इस नारी संरक्षण गृह की अनियमितताओं को चिह्नित कर रखा है। इसकी संचालिका हाई कोर्ट से स्थगन आदेश लाकर इसे चला रही थीं। राज्य सरकार अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि आखिर संरक्षण गृह में जिन 18 लड़कियों के नाम दर्ज हैं, वे दरअसल हैं कहां? इस बीच पुलिस ने संरक्षण गृह से 24 लड़कियों को मुक्त कराने के बाद उसे सील कर दिया है। विपक्षी दलों ने मामले की सीबीआइ जांच की मांग की है। देवरिया पुलिस ने यह भी बताया कि वहां रहने वाले बच्चों ने पुलिस को संरक्षण गृह में रह रही लड़कियों से देह व्यापार कराने की बात बताई है।

दूसरी ओर, संस्था की संचालिका गिरिजा का कहना है तीन साल से उन्हें संरक्षण गृह के लिए भुगतान नहीं किया जा रहा था, इसीलिए वह इसे खाली नहीं कर रही थी। जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वे बेबुनियाद हैं। इस बीच, प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) आनंद कुमार ने कहा कि इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच की जाएगी। उसमें रहने वाले बच्चों का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा। पाक्सो कोर्ट के सामने उनके बयान दर्ज कराए जाएंगे और विधिवत कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश की महिला और परिवार कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि उनके विभाग ने उस संरक्षण गृह की मान्यता समाप्ति के आधार पर उसे बंद करने का आदेश दिया था। विभाग ने पिछले दिनों इस मामले में एक मुकदमा भी दर्ज कराया था। जो घटना सामने आई है, वह गंभीर है। सच्चाई सामने आएगी और इस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। इस बीच, विपक्षी दलों ने मामले की सीबीआइ से जांच कराने की मांग की है।

प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य सुनील सिंह ने इस घटना को लेकर सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में राक्षसराज है। यह घटना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि गोरखपुर से सटे देवरिया जिले में हुई है। प्रदेश के नारी संरक्षण गृहों को बाबा संरक्षण गृह कहना चाहिए। कांग्रेस नेता अशोक सिंह ने भी घटना की सीबीआइ जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि नारी के सम्मान की बात करके सत्ता में आई भाजपा के शासन में ऐसी घटनाएं बेहद शर्मनाक हैं।

जिलाधिकारी को हटाया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया शहर स्थित बालिका और नारी संरक्षण गृह में लड़कियों से कथित रूप से वेश्यावृत्ति कराए जाने के सनसनीखेज खुलासे के बाद सख्त कार्रवाई करते हुए सोमवार को जिलाधिकारी को हटा दिया और तत्कालीन जिला प्रोबेशन अधिकारी (डीपीओ) को निलंबित कर दिया। प्रदेश की महिला और परिवार कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने इस मामले पर मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद बताया कि योगी के आदेश पर देवरिया के जिलाधिकारी सुजीत कुमार को हटा दिया गया है। वे एक वर्ष से वहां के जिलाधिकारी थे। उन्हें उस संरक्षण गृह को बंद करने के लिए कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन उन्होंने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। जांच रिपोर्ट आने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

उन्होंने बताया कि संरक्षण गृह को बंद करने का आदेश दिए जाने से छह महीने बाद तक देवरिया के डीपीओ रहे अभिषेक पांडेय को निलंबित कर दिया गया है। उनके बाद दो अधिकारियों नीरज कुमार और अनूप सिंह को उनके विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। इन दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। रीता ने माना कि इस मामले में स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर ढिलाई जरूर हुई है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने महिला और बाल कल्याण विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार और अपर पुलिस महानिदेशक अंजू गुप्ता को मौके पर भेजा है। वे संरक्षण गृह से मुक्त कराई गई सभी बच्चियों से अलग-अलग बात करके मंगलवार तक रिपोर्ट देंगी। उसके आधार पर कार्रवाई कर किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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