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दिवाली पर भगवान की आरती करने वाली मुस्लिम महिलाएं फतवे के खिलाफ बोलीं- राम हमारे पूर्वज

दिवाली पर वाराणसी में कुछ मुस्लिम महिलाओं ने भगवान राम की आरती की थी, जिस पर फतवा जारी हुआ था। अब उन्हीं महिलाओं ने इस पर अपनी चुप्पी तोड़ी है।

Author Updated: October 23, 2017 2:58 PM
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए एमएमएफ और विशाल भारत संस्थान ने दिवाली पर कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें मुस्लिम महिलाओं ने भगवान राम की आरती का पाठ किया था और दीये जलाए थे। (फोटो सोर्सः एएनआई)

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में दिवाली पर मुस्लिम महिलाओं ने भगवान राम की आरती की थी। देवबंदी उलेमा ने इसी को लेकर उनके खिलाफ फतवा जारी किया था,जिस पर अब उन महिलाओं का जवाब आया है। मुस्लिम महिलाओं ने कहा है कि राम उनके पूर्वज हैं और वे बदलते नहीं हैं। महिलाएं मौलाना को बताना चाहती हैं कि ऐसे फतवे जारी करने से कोई इस्लाम से खारिज नहीं होता। अगर ऐसा कुछ है भी तो वे अपना काम करें। वे अपना काम करेंगीं। वे सभी हिंदू-मुस्लिम एकसाथ रहना चाहते हैं। मुस्लिम महिला फाउंडेशन (एमएमएफ) की अध्यक्ष नाजनीन अंसारी ने इस बाबत कहा कि भगवान राम हमारे पूर्वज हैं। हम अपना नाम और धर्म बदल सकते हैं, लेकिन हम अपने पूर्वजों को कैसे बदल सकते हैं? राम की आरती गाने से न केवल हिंदू और मुस्लिमों के बीच की दूरियां कम होती हैं बल्कि यह इस्लाम की उदारता भी जाहिर करता है।

वाराणसी में सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए एमएमएफ और विशाल भारत संस्थान ने दिवाली पर कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें मुस्लिम महिलाओं ने भगवान राम की आरती का पाठ किया था और दीये जलाए थे। वहीं, राम की आरती उतारने वाली नजमा का कहना है कि वह 2006 से राम की आरती कर रही हैं। पहले भी उन्हें इस पर धमकियों और फतवों का सामना करना पड़ा है। वे हिंदुओं संग मिलकर देश की संस्कृति के हिसाब से पूजा करते हैं। हालांकि, ऑनलाइन फतवा विभाग के अध्यक्ष मुफ्ती मो. अरशद फारूखी ने शनिवार को बताया था कि इस्लाम सिर्फ एक ईश्वर में विश्वास रखता है और यहां दूसरे देवी-देवताओं के लिए जगह नहीं है।

दारुल उलूम देवबंद ने आरती करने वाली महिलाओं को इस्लाम से खारिज किया था। कहा था अगर कोई भी मुस्लिम अल्लाह के अलावा किसी और भगवान को मानता है तो वह मुस्लिम नहीं रहता। इसके अलावा दारुल उलूम ने उन महिलाओं को जिन्होंने भगवान राम की आरती की थी, उन्हें हिदायत दी है कि वे अल्लाह से माफी मांग कलमा पढ़ कर ही इमान में दाखिल हों।

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