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लॉकडाउन में फंसी 12 साल की मासूम, 3 दिनों में 100 किमी पैदल यात्रा, घर से 11 किमी पहले ही सांसों ने छोड़ दिया साथ

घर लौटने के लिए जमालो ने 13 अन्य लोगों के साथ तीन दिन से ज्यादा पैदल चलकर 100 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय कर ली थी। हालांकि छत्तीसगढ़ के बीजापुर स्थित अपने घर से करीब 11 किलोमीटर पहले ही उसकी सांसों ने साथ छोड़ दिया।

Author Translated By Ikram नई दिल्ली | Updated: April 21, 2020 12:50 PM
Jamaloजमालो मदकम के माता-पिता एंडोरम और सुकमति (एक्सप्रेस फोटो)

जमालो मदकम (12) कुछ रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ तेलंगाना में एक मिर्च के खेत में काम करने के लिए करीब दो महीना पहले पहली बार घर से बाहर गई थी। मगर बीते रविवार को लॉकडाउन के बीच पैदल घर लौटने की कोशिश के दौरान उसकी मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि आदिवासी मकदम की 18 अप्रैल को इलेक्ट्रोलाइन असंतुलन और थकावट के चलते मौत हो गई। घर लौटने के लिए उसने 13 अन्य लोगों के साथ तीन दिन से ज्यादा पैदल चलकर 100 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय कर ली थी। हालांकि छत्तीसगढ़ के बीजापुर स्थित अपने घर से करीब 11 किलोमीटर पहले ही उसकी सांसों ने साथ छोड़ दिया।

जमालो एंडोरम (32) और सुकमति (30) की इकलौती संतान थी। यह पहली बार था जब काम के लिए घर से बाहर गई थी। एंडोरम कहते हैं, ‘वह गांव की कुछ महिलाओं के साथ तेलंगाना गई थी।’ बता दें कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जमालो के माता-पिता को एक लाख रुपए देने की घोषणा की है। छत्तीसगढ़ की आदिवासी आबादी में से कई लोग हर साल तेलंगाना के खेतों में मिर्ची चुगने का काम करने के लिए जाते हैं।

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पिता एंडोरम ने बताया कि उन्होंने आखिरी बार सुना था कि जमालो ने घर आने के लिए तेलंगाना का पेरुरु गांव छोड़ दिया था। यहां उसने 16 अप्रैल तक अन्य लोगों के साथ काम किया। उन्होंने कहा, ‘लॉकडाउन आने बढ़ाए जाने और काम की संभावना ना होने के चलते उन्होंने घर वापस आने का फैसला लिया था।’ जमालो के साथ घर लौटने वाले 13 लोगों में आठ महिलाएं सहित तीन बच्चे भी शामिल थे।

सूत्रों के मुताबिक जमालो की 18 अप्रैल को सुबह आठ बजे उस वक्त मौत हो गई जब समूह के लोग बीजापुर जिले के बॉर्डर पहुंच गए थे। उसके निधन के बाद समूह परिवार को इसकी सूचना भी नहीं दे पाया था क्योंकि उनके पास सिर्फ एक फोन था जिसकी बैटरी खत्म हो चुकी थी। आखिर में जब समूह बीजापुर जिले के भंडारपाल गांव में पहुंचा तो उसके माता-पिता को बुलाया जा सका।

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मामले में बीजापुर के मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर बीआर पुजारी ने बताया कि जब उन्हें इसकी जानकारी मिली तो वो तुरंत वहां पहुंचे। उन्होंने कहा, ‘चूंकि तेलंगाना का मामला था, तुरंत अपनी टीमें वहां भेजी, लेकिन हम उन्हें खोज नहीं पाए।’ आखिर में गांव के बाहरी इलाके में बीजापुर की एक मेडिकल टीम तेलंगाना से आए समूह को खोजने में कामयाब रही। जिसके बाद जमालो के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया जबकि समूह के अन्य लोगों को क्वारंनटाइन किया गया है।

रविवार शाम को जमालो के माता-पिता उसका शव लेने के लिए हॉस्पिटल पहुंचे। डॉक्टर पुजारी ने बताया कि इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और थकावट के कारण लड़की की मृत्यु होने का संदेह है, क्योंकि समूह तीन दिन से चल रहा था। इस दौरान वो जंगलों में चले एक जगह पर वो गिर भी गई।

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