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कानपुर अस्पताल में बच्चे की मौत का मामला: डयूटी पर तैनात डॉक्टर हटाए गए, पीआरओ सस्पेंड, वार्ड ब्वॉय बर्खास्त

सुनील कुमार 12 साल के अपने बेटे अंश को कंधे पर लाद कर अस्पपताल में एक विभाग से दूसरे विभाग भागते रह। इस बीच, बच्चे की मौत हो गई।
Author कानपुर | September 2, 2016 21:13 pm
अस्पताल परिसर में सुनील कुमार 12 साल के अपने बेटे अंश को कंधे पर लादे हुए। (Photo-ANI)

मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल में पिता के कंधे पर बुखार से पीड़ित बच्चे की मौत के मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने उस दिन डयूटी पर तैनात पीआरओ को शुक्रवार (2 सितंबर) को सस्पेंड कर दिया है, जबकि कांट्रेक्ट पर रखे गए दो वार्ड ब्वॉय हटा दिए गए हैं और उस दिन इमरजेंसी में तैनात डयूटी डाक्टर को हटाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल डॉ. नवनीत कुमार ने शुक्रवार को बताया कि जिलाधिकारी (डीएम) द्वारा गठित कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर घटना के दिन डयूटी पर तैनात पीआरओ पल्लवी शुक्ला को सस्पेंड करने का आदेश शुक्रवार को जारी कर दिया गया है। इर्मेजेंसी में डयूटी पर तैनात ईएमओ डा. मयंक को हटाने के लिए शहर के मुख्य चिकित्साधिकारी को लिखा गया है और उन्होंने उसे यहां से डयूटी से हटा दिया है।

उन्होंने बताया कि कांट्रैक्ट पर रखे गए दो वार्ड ब्वॉय की प्लेसमेंट एजेंसी को पत्र लिख कर उन्हें हटाने को कहा गया था। एजेंसी ने इन्हें हटा दिया है। उल्लेखनीय है कि 28 अगस्त को मरियमपुर चौराहा नजीराबाद के रहने वाले सुनील कुमार 12 साल के अपने बेटे अंश को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड लेकर आए थे। उनका आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें एक विभाग से दूसरे विभाग ले जाने को कहा। वह कंधे पर लाद कर बच्चे को एक विभाग से दूसरे विभाग भागते रह। इस बीच, बच्चे की मौत हो गई। कुमार ने कहा कि उन्होंने कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के बावजूद बुखार के रोगियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नए इंतजाम किए गए हैं और डॉक्टरों को निर्देश दिए गए है कि वे किसी भी तरह की लापरवाही न बरते।

इस मामले में मेडिकल कॉलेज के सीएमएस को घटना की रात को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के आदेश पर सस्पेंड किया जा चुका है। कानपुर के डीएम कौशल राज शर्मा ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर मेडिकल कॉलेज में कार्रवाई की गई है। उन्होंने उत्तर प्रदेश शासन को अपनी रिपोर्ट गुरुवार (1 सितंबर) को शाम भेज दी थी जिसपर अभी कोई जवाब शासन से नही आया है। शासन से जवाब आने के बाद अगर अस्पताल के अन्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जाएगी तो उस पर अमल किया जाएगा।

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