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IIT कानपुर की वेबसाइट पर गीता-रामायण के श्लोक, प्रोफेसर बोले- धर्मनिरपेक्षता पर ना उठाएं सवाल

इस वेबसाइट पर जाकर आप ना सिर्फ गीता, रामचरितमानस, ब्रह्मसूत्र, योग सूत्र के श्लोक को पढ़ सकते हैं बल्कि इन श्लोकों को शुद्ध उच्चारण में सुन भी सकते हैं।
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के सूचना मंत्री ने की थी।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (IIT) कानपुर ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर हिन्दू धर्म ग्रंथों के श्लोक और चौपाइयों को डाला है। इस वेबसाइट पर जाकर आप ना सिर्फ गीता, रामचरितमानस, ब्रह्मसूत्र, योग सूत्र के श्लोक को पढ़ सकते हैं बल्कि इन श्लोकों को शुद्ध उच्चारण में सुन भी सकते हैं। इंटरनेट पर www.gitasupersite.iitk.ac.in जाकर इस वेबसाइट को खोला जा सकता है। आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर टी वी प्रभाकर ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि यह एक सामान्य वेबसाइट है, इसके पीछे का आइडिया हमारे परंपरागत ज्ञान को वेबसाइट पर नये फार्मेट में डालने का है। उन्होंने कहा कि यह एक पुरानी वेबसाइट है लेकिन व्हाट्सएप के जरिये इसे प्रसिद्धि मिली है। उन्होंने कहा कि 10 साल पुराने इस वेबसाइट पर पहले पांच-छह सौ विजिटर्स रोजाना आते थे लेकिन व्हाट्सएप पर प्रचार के बाद इस वेबसाइट पर रिकॉर्ड 24 हजार विजिटर्स आए हैं। IIT कानपुर इस तरह की सेवा प्रदान करने वाला देश का पहला इंजीनियरिंग कॉलेज है।

इस वेबसाइट पर गीता, रामचरितमानस, ब्रह्मसूत्र, योग सूत्र के अलावा श्री राम मंगल दासजी, नारद भक्ति सूत्र को भी अपलोड किया गया है। हाल ही में इस वेबसाइट पर वाल्मीकि रामायण का सुंदरकांड और बालकांड भाग डाला गया है। बता दें कि इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के सूचना मंत्री ने की थी। इसके लिए 25 लाख रुपये का फंड दिया गया था। प्रोफेसर टी वी प्रभाकर ने कहा कि दुनिया और भारत में की गई अपनी तरह की पहली कोशिश है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। प्रोफेसर प्रभाकर और IIT कानपुर के डायरेक्टर महेंद्र अग्रवल इस मुद्दे पर हिन्दू विचारधारा को थोपने और किसी विवाद की बात से इनकार करते हैं। प्रोफेसर प्रभाकर ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘आलोचना करने के लिए आलोचना तो हर अच्छी चीज की होगी, ऐसे उत्तम और पवित्र प्रयासों के लिए धर्मनिरपेक्ष साख पर सवाल नहीं उठाए जा सकते हैं।’

लोगों को धर्मग्रंथों का सही अर्थ और अनुवाद मिले इसके लिए संस्थान ने पारंगत विद्वानों की सेवा ली है। भगवद गीता के अंग्रेजी रुपांतरण के लिए बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से दर्शन शास्त्र में पोस्ट डोक्टोरल डिग्री लिये लोगों की सेवा ली है। जबकि संस्कृत उच्चारण स्वामी ब्रह्मानंद के स्वर का है। इसी प्रकार अवधी में रामचरित मानस का गायन आईआईटी गुवाहाटी के फैक्लटी मेंबर देव आनंद पाठक ने किया है।

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