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IIT प्रोफेसर ने कहा- पीएम मोदी की फेलोशिप में भेदभाव, क्‍या माफिया काम कर रहा है?

उन्होंने यह आरोप है ऐसे समय में लगाया है जब मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्क्रीम को एक दिन पहले ही लांच किया है।

संसद में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

आईआईटी कानपुर के एक प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि हाल के दिनों में लांच हुई प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप में सभी संस्थानों के योग्य छात्रों को इसका फायदा नहीं मिल रहा है। स्कीम में सेंटर टैक स्कूल के छात्रों संग भेदभाव किया जा रहा है। कंप्यूटर साइंस के शिक्षक धीरज सांघी ने बीते रविवार (29 जुलाई, 2018) को अपने ब्लॉग में लिखा, ‘क्या माफिया काम कर रहा है?’ उन्होंने यह आरोप है ऐसे समय में लगाया है जब मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्क्रीम को एक दिन पहले ही लांच किया है। प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप (PMRF) उन छात्रों को दी जाएगी, जो अपना बीटेक का कोर्स पूरा कर चुके हैं या फाइनल ईयर में हैं। इसके अलावा आईआईएस बैंगलुरु से इंटीग्रेटिड एमटैक या इंटीग्रेटिड एमएससी, आईआईटी, एनआईटी, सेंट्रल आईआईटी के योग्य छात्र पीएचडी में प्रत्यक्ष दाखिला ले सकते हैं अगर वो दो शर्तों को पूरा करते हैं। इनमें सीजीपीए में कम से कम आठ प्वाइंट्स और साक्षात्कार में रिसर्च प्लान के बारे में बताना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक इस साल एक हजार छात्रों को फेलोशिप दी जाएगी। सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना में चुने गए छात्रों को पहले दो साल हर महीने सत्तर हजार रुपए, तीसरे साल में 75 हजार रुपए, चौथे और पांचवे साल 80 हजार रुपए हर महीना दिया जाएंगे। साथ ही योग्य छात्रों को एक साल में दो लाख रुपए का ग्रांट भी दिया जाएगा।

धीरज सांघी ने सरकार की इसी योजना पर सवाल उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने दिल्ली और हैदराबाद आईआईटी को इस योजना से बाहर कर दिया है। क्योंकि इनका संचालन केंद्र की बजाय राज्य सरकारों द्वार किया जाता है। उन्होंने लिखा कि सरकार को इसलिए स्वीकार करना चाहिए कि केंद्र सभी छात्रों की मदद नहीं कर रहा है। इसके अलावा सांघी ने सवाल उठाया कि योजना उन छात्रों के लिए क्यों नहीं है जो अपना कोर्स पूरा कर चुके हैं। योजना का लाभ एमएससी और एमटेक कोर्स के छात्रों को क्यों नहीं दिया जा रहा है।

सांघी के मुताबिक आईआईटी कानपुर के एमटेक छात्र पीएचडी के लिए अच्छी तरह तैयार हैं। इस संस्थान में पढ़ रहे एमटेक के छात्र किसी भी प्रीमियर स्कूल के बीटेक ग्रेजुएट छात्रों से बेहतर हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप के लिए सिर्फ आईआईटी और आईआईएस के छात्रों को योजना का लाभ देने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं।

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