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कैराना उपचुनाव: थे एक-दूजे के खून के प्यासे, अब एक हो कर पलटना चाहते हैं बाजी

इस संसदीय क्षेत्र में कुल 17 लाख मतदाता हैं जिनमें अल्पसंख्यक वोटरों की तादाद करीब साढ़े तीन लाख है। इनके अलावा जाट और अन्य पिछड़ी जातियों के मतादाताओं की संख्या करीब चार लाख है।

सीएम योगी ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों का भी जिक्र किया। पांच साल पहले इस दंगे में जाट और मुस्लिम समुदाय आमने-सामने थे लेकिन मौजूदा सियासी समीकरण के तहत अब ये दोनों धुर विरोधी समुदाय लामबंद होते दिख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की कैराना संसदीय सीट पर 28 मई को उप चुनाव होने हैं। बीजेपी ने दिवंगत सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को उम्मीदवार बनाया है, जबकि विपक्षी एकता के बैनर तले सपा नेता तबस्सुम हसन को राष्ट्रीय लोकदल ने अपना उम्मीदवार बनाया है। इस उम्मीदवार को सपा, बसपा और कांग्रेस का भी समर्थन हासिल है। हालांकि, गोरखपुर और फूलपुर उप चुनावों की तरह विपक्षी पार्टियों के बड़े नेता अभी तक यहां मैदान पर जोर आजमाइश करते नजर नहीं आए हैं। रालोद की तरफ से जयंत चौधरी ही मोर्चा संभाले हुए हैं, जबकि बीजेपी ने दर्जन भार जाट विधायकों समेत बड़े-बड़े दिग्गजों को मैदान में उतारा है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार (24 मई) को शामली में चुनावी सभा को संबोधित किया और जयंत चौधरी के वार पर पलटवार करते हुए कहा कि यहां गन्ना और जिन्ना दोनों मुद्दा है। बता दें कि जयंत ने कहा था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जिन्ना नहीं गन्ना मुद्दा है।

सीएम योगी ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों का भी जिक्र किया। पांच साल पहले इस दंगे में जाट और मुस्लिम समुदाय आमने-सामने थे लेकिन मौजूदा सियासी समीकरण के तहत अब ये दोनों धुर विरोधी समुदाय लामबंद होते दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि रालोद द्वारा मुस्लिम महिला उम्मीदवार को उतारने से इलाके के मुस्लिम वोटरों का रालोद की तरफ झुकाव बढ़ा है, जबकि जाट समुदाय पारपंरिक रूप से रालोद के वोटर माने जाते रहे हैं। मुस्लिमों पर अच्छा प्रभाव रखने वाली पार्टियां सपा, बसपा और कांग्रेस ने भी रालोद उम्मीदवार का समर्थन किया है। ऐसे में जाट और मुस्लिम वोटरों का ध्रुवीकरण रालोद उम्मीदवार के पक्ष में होता दिख रहा है। दलित और पिछड़ी जातियां भी इस ध्रुवीकरण का हिस्सा बनती दिख रही हैं।

बता दें कि इस संसदीय क्षेत्र में कुल 17 लाख मतदाता हैं जिनमें अल्पसंख्यक वोटरों की तादाद करीब साढ़े तीन लाख है। इनके अलावा जाट और अन्य पिछड़ी जातियों के मतादाताओं की संख्या करीब चार लाख है। दलित वोट बैंक भी करीब डेढ़ लाख के आसपास है। कैराना संसदीय सीट पर उप चुनाव बीजेपी के सांसद हुकुम सिंह के निधन से सीट खाली होने की वजह से हो रहा है। 2014 में हुकुम सिंह को करीब 50 फीसदी यानी 5.65 लाख वोट मिले थे लेकिन सियासी ध्रुवीकरण की वजह से इस बार बीजेपी के लिए यहां राह आसान होती नहीं दिख रही है।

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