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जनसत्ता विशेष: खरीद केंद्रों के बजाए आढ़तों पर धान बेचने को किसान मजबूर

करीब दो दशक पहले धान पैदावार में उत्तर प्रदेश में अव्वल रहे इटावा जिले में सरकारी खरीद केंद्रों पर अफसरों की उदासीनता के कारण धान किसानों को मजबूरन धान को आढ़तियों के यहां पर बेचने को विवश होना पड़ रहा है। इटावा के जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे ने बताया कि सरकारी समर्थन मूल्य पर धान की खरीद करने के लिए सात एजंसियां लगाई गई हैं।

Author December 19, 2018 5:09 AM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर (Express Photo by Kamleshwar Singh)

करीब दो दशक पहले धान पैदावार में उत्तर प्रदेश में अव्वल रहे इटावा जिले में सरकारी खरीद केंद्रों पर अफसरों की उदासीनता के कारण धान किसानों को मजबूरन धान को आढ़तियों के यहां पर बेचने को विवश होना पड़ रहा है। इटावा के जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे ने बताया कि सरकारी समर्थन मूल्य पर धान की खरीद करने के लिए सात एजंसियां लगाई गई हैं। विपणन शाखा को 15800 मीट्रिक टन, पीसीएफ को 4700, कर्मचारी कल्याण निगम को 4000, भारतीय खाद्य निगम को 1500, यूपी एग्रो को 1000, नेफेड को 3000 और एनसीसीएफ को 3800 मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य दिया गया है। कुल 33800 मीट्रिक टन धान की खरीद होनी है जो किसानों के मौजूदा रुख को देखते हुए पूरी होती नदीं दिख रही है। सभी एजंसियों के क्रय केंद्रों पर अमूमन सन्नाटा पसरा दिख रहा है। जबकि इसके ठीक विपरीत पिछले साल करीब साढ़े तीन हजार किसानों ने क्रय केंद्रों पर धान बेचा था। इस बार हालत यह है कि सिर्फ 751 किसान ही खरीद केंद्रों पर पहुंचे हैं। इनमें धान बेचने के लिए किसानों का अनिवार्य पंजीकरण भी एक बड़ी बाधा मानी जा रही है हालांकि जिला विपणन अधिकारी संतोष पटेल का कहना है कि शासन ने पंजीकरण को लेकर काफी सहूलियत दी है।

अब कोई गैर पंजीकृत किसान क्रय केंद्र पर आकर धान बेच सकता है। केंद्र प्रभारी अपने लैपटॉप से उसका तत्काल पंजीकरण करेंगे। विपणन विभाग के सभी केंद्र प्रभारियों के पास लैपटॉप उपलब्ध है वैसे कोई भी किसान साइबर कैफे से पंजीकरण अभी करवा सकता है। वैसे निर्धारित फरवरी तक लक्ष्य पूरा करने के प्रयास हो रहे हैं। भर्थना के ब्रह्मनगर निवासी किसान राजीव का कहना है कि उनके खेत में 35 कुंतल सुगंधित धान हुआ है जो आढ़त पर बेचा गया है। उन्होंने पर्याप्त कीमत ना मिलने से हाइब्रिड धान की उपज लेना बंद कर दिया है। बकेवर के चंद्रपुराकला निवासी किसान विजय उर्फ राजू चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने करीब पांच एकड़ में धान किया था लेकिन उनका एक भी दाना सरकारी खरीद केंद्र पर नहीं बिका। बकेवर के ग्राम कुडरिया निवासी किसान प्रमोद कुमार तिवारी ने बताया कि उन्होंने दो एकड़ में धान फसल की पैदावार की। धान बेचने के लिए बकेवर सहकारी समिति खरीद केंद्र कई चक्कर लगाए लेकिन उनका दान नहीं बिका ।
महेवा के ग्राम नगला मुलु नौधना निवासी किसान नंदराम ने बताया कि एक हेक्टेयर धान की फसल की है। धान बेचने के लिए क्रय केंद्र के कई चक्कर लगाए लेकिन धान नहीं खरीदा गया। हेल्पलाइन नंबर पर फोन भी किया गया लेकिन पंजीकरण नहीं हो सका ।

इस साल 33800 मीट्रिक टन धान की खरीद होनी है। एक नंबवर से शुरू हुई धान खरीद में मात्र 4518.54 मीट्रिक टन ही धान खरीदा जा सका है। यह कुल खरीद का महज 13.37 फीसद है। अभी तक मात्र 751 किसानों ने ही सरकारी खरीद केंद्रों का रुख किया।
-सेल्वा कुमारी जे, डीएम, इटावा

सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान अपना धान नहीं बेच पा रहे हैं और 1750 रुपए के सरकारी रेट होने के बावजूद भी 1200 या 1300 रुपए में निजी आढ़तियों को बेचने पर मजबूर हैं।
-गोपाल यादव, अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी, इटावा

पूरे जनपद के खरीद केंद्रों का दौरा किया है लेकिन सरकार के गलत मानकों और किसान विरोधी नीतियों के कारण धान खरीद नहीं हो पा रही है।
-उदयभान सिंह अध्यक्ष, कांग्रेस इकाई, इटावा

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