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प्रतापगढ़- पटरी से उतरी है सेहत, जनता डायरिया, पीलिया और वायरल बुखार से पीड़ित

प्रतापगढ़ पुराना शहर है। इसकी पहचान आंवले से जुड़ी है। लेकिन चिकित्सा और शिक्षा दोनों बदहाल हैं।
Author प्रतापगढ | May 31, 2017 03:34 am
चित्र का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर हुआ है। (EXPRESS PHOTO BY PRAVEEN KHANNA)

स्वामीनाथ शुक्ल

प्रतापगढ़ पुराना शहर है। इसकी पहचान आंवले से जुड़ी है। लेकिन चिकित्सा और शिक्षा दोनों बदहाल हैं। योगी राज आने के बाद से सरकारी अस्पताल से डॉक्टर और दवा दोनों गायब हैं, जबकि प्रतापगढ़ की जनता डायरिया, पीलिया और वायरल बुखार से पीड़ित है। डॉक्टर बेलगाम हैं। इससे मरीजों की जान खतरे में है। इस पर योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह, ने कहा कि डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस की सूचना वे स्वास्थ्य मंत्री को दे चुके हैं। बाकी सरकारी दवा के घपले की जांच के लिए मुख्यमंत्री को खत लिखेंगे ताकि गरीबों के नाम का हक खाने वाले बेनकाब हो सकें। योगी कैबिनेट के दो मंत्री प्रतापगढ़ के हैं। इसके बाद रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, कुंवर हरिबंश सिंह और प्रमोद तिवारी प्रतापगढ़ से जुड़े हैं। मगर सरकारी अस्पतालों का हाल बेहाल है। प्रतापगढ़ में दो सांसद और एमएलसी को लेकर आठ विधायक हैं। इसमें एक सांसद और चार विधायक सत्ता से जुड़े हैं। इसके बाद राजेंद्र प्रसाद सिंह और महेंद्र पाण्डेय योगी कैबिनेट के मंत्री हैं। अपना दल के सांसद हरिबंश सिंह को छोड़कर प्रतापगढ़ में सबका बराबर आना जाना है। प्रतापगढ़ में सदर के विधायक संगम गुप्ता को छोड़कर बाकी विधायक जनता से सीधे जुड़े हैं। इसके बावजूद प्रतापगढ़ की स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहर तक के सरकारी डॉक्टर खुलेआम निजी प्रैक्टिस करते हैं।

प्रतापगढ़ के जिला चिकित्सालय की हालत सबसे ज्यादा खराब है। इस अस्पताल में डॉक्टर बिल्कुल आने को तैयार नहीं है जबकि वे रायबरेली, इलाहाबाद, सुलतानपुर, अमेठी और प्रतापगढ़ में निजी प्रैक्टिस करते हैं। सरकारी पैथालॉजी का हाल और बुरा है। इससे मरीज बाहर से जांच के लिए मजबूर है।
पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह ने कहा कि वे जनता की सेहत से किसी प्रकार समझौता नहीं करते हैं। इसके लिए वे स्वयं सरकारी अस्पतालों का निरीक्षण करेंगे। जबकि कांग्रेस की विधायक आराधना मिश्रा ने कहा कि डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर सरकार को गंभीर होना पड़ेगा। तभी डॉक्टर नियमित अस्पताल में बैठेंगे। यही हाल कौशांबी का है। संगम के किनारे बसा कौशांबी नेताओं और अफसरों की अनदेखी का शिकार है। जबकि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य इसी इलाके से जुड़े हैं।

 

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