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उत्तर प्रदेश: ताबड़तोड़ वारदातों ने उड़ाई भाजपा सरकार की नींद

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ना अपराध ना भ्रष्टाचार के जिस नारे के साथ सत्ता फतह की, उसकी कलई प्रदेश के अपराधियों ने दो माह के भीतर खोल कर रख दी।

Author लखनऊ | June 7, 2017 04:00 am
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ना अपराध ना भ्रष्टाचार के जिस नारे के साथ सत्ता फतह की, उसकी कलई प्रदेश के अपराधियों ने दो माह के भीतर खोल कर रख दी। प्रदेश में ताबड़तोड़ हो रहीं आपराधिक वारदातों ने योगी आदित्यनाथ की सरकार की नींद उड़ा दी है। भाजपा की सरकार, इससे पार पाने के रास्ते तलाश रही है, लेकिन अभी तक उसे कामयाबी नहीं मिली है। अपराध तो रुक नहीं रहे हैं, ऊपर से सहारनपुर के जातीय तनाव ने भाजपा सरकार के सामने बड़ी चुनौती पेश कर दी है। सिर्फ दो माह में डकैती, लूट, बलवा, सेंधमारी और बलात्कार की घटनाएं डेढ़ से दोगुनी बढ़ गई हैं। महिलाओं का उत्पीड़न भी डेढ़ से दोगुना बढ़ गया है। वारदातों से योगी सरकार किस कदर परेशान है, इसकी बानगी ताश के पत्तों की तरह फेंटे गये पुलिस अधिकारियों की फेहरिस्त बयां करती है। दो सौ से अधिक पुलिस के आला अधिकारियों के अब तक तबादले किये जा चुके हैं। पुलिस महानिदेशक समेत आला पुलिस के अधिकारियों को लगभग बदल दिया गया है। उसके बाद भी प्रदेश में अपराधियों के हौसले पस्त कर पाने में सरकार अब तक नाकाम ही साबित हुई है।

साठ से ज्यादा डकैतियां
उत्तर प्रदेश पुलिस के पास मौजूद दो महीनों के अपराध के आंकड़े योगी सरकार के सुशासन की तस्वीर खुद बयां करते हैं। उत्तर प्रदेश की सलतनत पर 19 मार्च को काबिज हुई सरकार के दो माह के कार्यकाल में प्रदेश में साठ से अधिक डकैतियां पड़ चुकी हैं। इनमें अब भी आधे से अधिक अनसुलझी हैं। इन दो महीनों के दरम्यान प्रदेश में 638 लूट की वारदातें हुर्इं। इनमें 20 फीसद के करीब सर्राफा व्यापारियों को लुटेरों ने अपना निशाना बनाया। महिलाओं के सशक्तीकरण की बात करने वाली भाजपा सरकार में दो माह के दौरान प्रदेश भर में सात सौ के करीब बलात्कार की वारदातें हुर्इं। औसतन रोज तीन लोग आपसी रंजिश या किन्ही अन्य कारणों से बदमाशों की गोलियों का शिकार होकर अपनी जान गंवा रहे हैं।

पुलिस जवानों की कमी
अखिलेश सरकार में पुलिस के अहम पद पर रहे प्रदेश के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, उत्तर प्रदेश में हर रोज अपराध की छोटी और बड़ी तीस से अधिक वारदातें होती हैं। इन्हें रोक पाने के लिए हमें जिस पुलिस बल की दरकार है वह अब तक हमारे पास नहीं है। अब भी प्रदेश में एक लाख से अधिक पुलिस के जवानों की कमी है। बिना इस कमी को पूरा किए, अपराध पर अंकुश लगा पाना लगभग नामुमकिन है।

कदम उठाने का दावा
प्रदेश को अपराध मुक्त करने के योगी सरकार के दावों को अमलीजाम पहनाने की कोशिशें दरअसल क्या हो रही हैं? इस बाबत पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह कहा कि थानेदार से लेकर आला पुलिस अधिकारियों को कम से कम तीन घंटे अपने कार्यालय में बैठने और जनता की शिकायतें सुनने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। क्षेत्रवार समितियों का भी गठन किया गया है।

इन समितियों में स्थानीय नागरिकों को शामिल किया गया है। असलहे बेचने वाली दुकानों का शत-प्रतिशत सत्यापन कराया जा रहा है। इस बात की खास तौर पर जांच की जा रही है कि जो गोलियां लाइसेंसी असलहों पर खरीदी जा रही हैं, उनका इस्तेमाल कहां और कैसे किया जा रहा है? सुलखान सिंह कहते हैं, उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बहुत जल्द बदलाव परिलक्षित होंगे।

 

 

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