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जिन्ना विवाद: जिसे तस्वीर हटवानी हो वो कोर्ट जाए- जमात-ए-इस्लामी हिंद

जमात-ए-इस्लामी हिंद के प्रमुख मौलाना सैयद जलालुद्दीन उमरी ने तिरुवनंतपुरम में संवाददाताओं से कहा, ‘‘ऐसी मांग के पीछे क्या औचित्य है? क्योंकि यह पिछले 80 साल से लोगों की नजर में है।

बुधवार (2 मई) को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के गेट पर धरना देते विश्वविद्यालय के छात्र। फाइल फोटो- पीटीआई

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर हटाने को लेकर छिड़े विवाद के बीच देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन ने आज (05 मई को) कुछ दक्षिणपंथी संगठनों की इस मांग का औचित्य जानना चाहा और कहा कि अगर कोई ऐसा चाहता है तो उसे अदालत का रूख करना चाहिए। जमात-ए-इस्लामी हिंद के प्रमुख मौलाना सैयद जलालुद्दीन उमरी ने तिरुवनंतपुरम में संवाददाताओं से कहा, ‘‘ऐसी मांग के पीछे क्या औचित्य है? क्योंकि यह पिछले 80 साल से लोगों की नजर में है। फिर भी किसी की ऐसी मांग है तो उसे अदालत जाना चाहिए। इस पर विवाद क्यों?’’

यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर लगाने को एक मामूली मुद्दा बताते हुए उमरी ने कहा कि इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि एएमयू की यह लंबे से अरसे से परंपरा रही है कि वह परिसर में छात्र संघ के आजीवन सदस्यों की तस्वीर लगाता है। उन्होंने कहा कि जिन्ना की तस्वीर 1938 से लगी हुई है। इतने सालों किसी ने भी आपत्ति नहीं जताई या तस्वीर को हटाने की मांग नहीं की।

उमरी ने दावा किया कि भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भी आजादी के संग्राम में जिन्ना की भूमिका पर संदेह नहीं किया है। जमात-ए-इस्लामी हिंद के नेता ने कहा कि यह ऐसा मसला है जिसे छात्र संघ के साथ बातचीत के जरिए हल करने की जरूरत है। उमरी ने भाजपा नीत केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और नागरिकों के मौलिक अधिकार खतरे में है। जमात ने भगवा पार्टी के खिलाफ लड़ने वाली ताकतों का समर्थन किया है।

बता दें कि विवाद की शुरुआत अलीगढ़ के बीजेपी सांसद सतीश गौतम के उस पत्र के बाद शुरू हुआ जिसमें उन्होंने यूनिवर्सिटी के कुलपति से लिखकर पूछा था कि क्या यूनिवर्सिटी में पाकिस्तान के जनक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगी हुई है? अगर हां तो यह तस्वीर कहां लगी हुई है और क्यों लगी हुई है? इसका जवाब देते हुए यूनिवर्सिटी के पीआरओ ने कहा था कि चूंकि जिन्ना यूनिवर्सिटी के स्टूडेन्ट यूनियव के आजीवन सदस्य रहे हैं इसलिए परंपरा के मुताबिर यूनियन हॉल में उनकी तस्वीर लगी हुई है। इसके बाद तस्वीको हटाने की मांग पर हिन्दूवादी संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन किया था जिनकी छात्रों के साथ झड़प भी हुई थी।

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