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सीएजी रिपोर्ट में खुली अखिलेश सरकार की पोल, इन विभागों में बजट के हिसाब से नहीं हुआ काम

शिक्षकों के अलावा सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए खेलने के लिए मैदान नहीं है। इतना ही नहीं स्कूलों में लाइब्रेरी जैसी बेसिक सुविधाओं की कमी है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव। (Photo Source: REUTERS)

भारत के कंपट्रोलर ऑडिट जनरल (सीएजी) ने अपनी जांच में पाया है कि उत्तर प्रदेश की तत्कालीन अखिलेश सरकार की नीतियों और योजनाओं में काफी खामियां रही हैं। इस ऑडिट में यह बात सामने आई है कि यूपी में चलाई जा रही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं में कई गड़बड़िया हुई हैं। इस मामले पर बात करते हुए सीएजी के चीफ पीके कटारिया ने बताया कि पिछले साल राज्य सरकार द्वारा ग्रामीणों के लिए बनाई गई योजनाओं में किसी भी प्रकार का खर्चा नहीं किया गया। जो बजट जवाहर ग्राम सम्रद्धि योजना और सम्पूर्ण रोजगार योजना के लिए राज्य सरकार ने रखा था, वह उसपर खर्च ही नहीं किया गया। केंद्र सरकार को पिछले पांच सालों में यूपी सरकार के कई विभागों से धनराशि वापस मिली हैं। जिनमें कृषि एवं ग्राम विकास, पंचायतीराज, चिकित्सा विभाग, नगर विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, सिंचाई विभाग, प्रार्थमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग, लोक निर्माण जैसे विभाग शामिल हैं।

इसके साथ ही सीएजी ने अपनी जांच में यह पाया है कि पांच सालों में इन विभागों में बजट के हिसाब से कार्य ही नहीं किया गया। वहीं दुर्घटना सहायता फंड की बात करें तो राज्य सरकार ने इसमें पिछले पांच सालों में केवल 49 लाख रुपए ही खर्च किए जब्कि इस फंड का बजट 102 करोड़ रुपए था। प्रार्थमिक और उच्च शिक्षा की खराब व्यवस्था के बारे में खुलासा करते हुए सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि स्कूलों में बच्चों के रजिस्ट्रेशन में कमी आई है, इसके साथ ही परिषदीय विद्यलयों (सरकारी) में करीब एक लाख से भी ज्यादा शिक्षकों की कमी है। शिक्षकों के अलावा सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए खेल के मैदान नहीं है। इतना ही नहीं स्कूलों में लाइब्रेरी जैसी बेसिक सुविधाओं की भी कमी है।

अखिलेख सरकार में बच्चों को पोशाक और किताबें भी नहीं दी गई। सीएजी ने खुलासा किया है कि जिन स्कूलों में बच्चों को किताबें बांटी गई हैं उनमें पारदर्शिता की कमी है। बच्चों को किताब में लिखा हुआ पढ़ने में परेशानी होती है। वहीं राज्य के लोगों के स्वास्थ्य की बात करें तो सीएजी ने खुलासा किया है कि तत्कालीन सरकार उसमें भी गंभीर नहीं दिखाई दी है। सीएजी की इस रिपोर्ट को 18 मई को विधानसभा में पेश किया गया था, जिसे लेकर खूब हंगामा हुआ था।

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